फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Danger of major earthquakes ranging from Himalayas to Tibetan Plateau What is going on beneath the earth

मुद्दा: हिमालय से लेकर तिब्बती पठार तक बड़े भूकंप की आशंका... आखिर धरती के नीचे चल क्या रहा है?

Thu, 31 Jul 2025 07:16 AM IST
Nirankar Singh निरंकार सिंह
Updated Thu, 31 Jul 2025 07:16 AM IST
विज्ञापन
सार
रूस में आए भूकंप से पूरी दुनिया में हड़कंप है, तो हाल में हुए एक शोध में हिमालय से लेकर तिब्बती पठार तक बड़े भूकंप की आशंका जताई गई है।
loader
Danger of major earthquakes ranging from Himalayas to Tibetan Plateau What is going on beneath the earth
भूकंप के झटकों और सुनामी के अलर्ट के बाद रूस का एक इलाका - फोटो : पीटीआई

विस्तार

रूस में 8.8 तीव्रता से आए भूकंप से दुनिया में हड़कंप है, लेकिन बीते छह महीनों में दिल्ली-एनसीआर में तीन बार भूकंप आ चुके हैं। इनकी तीव्रता अधिक नहीं थी,  लेकिन एक ही क्षेत्र में बार-बार भूकंप का आना बड़े भूकंप के संकेत हैं। कुछ भूवैज्ञानिकों ने भारत में भयंकर भूकंप की आशंका जताई है, क्योंकि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट टूटने के कगार पर है। इसका एक भाग धरती में समा रहा है। प्लेट के ऊपर के इलाकों में दरारें और तनाव बढ़ रहे हैं, जिनका हिमालय से लेकर तिब्बती पठार तक असर होगा। यह शोध हाल ही में अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन में प्रकाशित हुआ है। कुछ भूवैज्ञानिकों ने अमेरिका में सबसे बड़े भूकंप की आशंका जताई है।



भूगर्भ के अंदर चल रही यह हलचल ऐसी गंभीर प्रक्रिया है, जो हिमालय से तिब्बती पठार तक भूगोल और जीवन को बदल सकती है। भूवैज्ञानिकों ने भारतीय क्षेत्र की भूगर्भीय हलचल को देखते हुए इसे एक से लेकर पांच जोन में बांटा है। इसमें जोन एक में सबसे कम और जोन पांच में सबसे ज्यादा खतरा रहता है। पांचवें जोन में असम, उत्तराखंड, गुजरात, अंडमान निकोबार सहित जम्मू-कश्मीर का कुछ हिस्सा मुख्य रूप से आता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय प्लेट करीब छह करोड़ वर्षों से यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इस टकराव के कारण ही हिमालय जैसे विशाल पर्वत बने हैं, लेकिन अब भारतीय प्लेट के अंदर एक नई प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसे डेलिमिनेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में प्लेट का घना हिस्सा यानी उसका भारी भाग धरती के अंदर मौजूद मेंटल में धंसता जा रहा है और प्लेट दो हिस्सों में टूट रही है।


स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक साइमन क्लेंपरर के अनुसार, जब दो महाद्वीपों के बीच तीव्र दबाव होता है, तो प्लेटों में दरारें आ जाती हैं और भविष्य में भूंकप को जन्म देती हैं। अगर डेलिमिनेशन तेज होती है, तो हिमालय और उत्तर भारत में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ सकती हैं। तिब्बती पठार में भी गहरी दरारें देखने को मिल सकती हैं। भारत के भूगोल में बड़े बदलाव संभव हैं। अब तक का सबसे बड़ा भूकंप 1960 में चिली के वाल्डिविया में आया था। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 9.4-9.6 थी। यह भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके बाद आई सुनामी की लहरें चिली, हवाई, जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक पहुंच गईं। इसकी वजह से करीब छह हजार लोग मारे गए। इसके बाद, 2004 में हिंद महासागर में आए भूकंप ने भी विशाल सुनामी लहरें उत्पन्न की थीं, जिनसे दो लाख से अधिक लोग मारे गए। जापान में 2011 में आया तोहोकू-सेंडाई भूकंप भी काफी विनाशकारी था, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 9.1 थी।

‘द बिग वन’ वह शब्द है, जिसका इस्तेमाल लोकप्रिय संस्कृति में एक विशाल भूकंप का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यह भूकंप सैन एंड्रियास फॉल्ट के साथ आने की संभावना जताई गई है, जो कैलिफोर्निया में एक लंबी दरार है। 1953 में भूवैज्ञानिकों मेसन हिल और थॉमस डिबली ने एक पेपर प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि इस फॉल्ट के कारण 7-8 की तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं, जो लॉस एंजिलिस, सैन डिएगो और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों को प्रभावित कर सकते हैं। इस बारे में कई फिल्में भी बन चुकी हैं। जैसे 1974 की फिल्म अर्थक्वेक और 2015 की फिल्म सैन एंड्रियास, जिनमें भूकंप के बाद होने वाले विनाश को दिखाया गया था।

वर्तमान समय में भूवैज्ञानिकों का मानना है कि ‘द बिग वन’ सैन एंड्रियास फॉल्ट से नहीं, बल्कि कास्केडिया सबडक्शन जोन से आएगा। यह जोन कनाडा के वैंकूवर से लेकर उत्तरी कैलिफोर्निया तक फैला हुआ है। और यहां 8 से 9.2 की तीव्रता का भूकंप आ सकता है। इससे विशाल सुनामी लहरें उत्पन्न हो सकती हैं, जो सिएटल, सलेम जैसे बड़े शहरों को तबाह कर सकती हैं। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, कास्केडिया सबडक्शन जोन में 2060 तक एक विनाशकारी भूकंप आने की 37 प्रतिशत संभावना है। इस क्षेत्र में आखिरी बड़ा भूकंप 1700 के दशक में आया था। उस समय यह भूकंप न केवल उत्तरी अमेरिका, बल्कि जापान में भी सुनामी लेकर आया था।

हॉलीवुड ने ‘द नेक्स्ट बिग वन’ को अमेरिका में एक बड़े भूकंप के रूप में प्रचारित किया है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र में एक और बड़ा भूकंप आ सकता है, जो उत्तर भारत के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है। यह भूकंप रिक्टर स्केल पर 8 की तीव्रता का हो सकता है और दिल्ली, चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों और नेपाल को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, फिलीपींस में लुजोन के पास मारिकिना वैली फॉल्ट सिस्टम भी एक और संभावित स्थान हो सकता है, जहां 7 की तीव्रता का भूकंप आ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed