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G20: विश्व मंच पर बढ़ी साख, सर्वसम्मति ने साबित कर दी भारत के कूटनीतिक नेतृत्व की क्षमता

Mon, 11 Sep 2023 09:01 AM IST
S D Muni एसडी मुनि
Updated Mon, 11 Sep 2023 09:01 AM IST
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सार
जी-20 सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा पत्र पर बनी सर्वसम्मति ने यह साबित कर दिया कि भारत वैश्विक कूटनीति का नेतृत्व करने में पूरी तरह से सक्षम है। अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल करने और ग्लोबल साउथ के देशों के हितों का मुद्दा उठाकर भारत ने वैश्विक जगत में अपना कद ऊंचा किया है। 
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consensus on New Delhi Declaration at G20 Summit proved India diplomacy at global level
G20 Delhi - फोटो : ANI

विस्तार

यह भारतीय कूटनीति एवं विदेश नीति की सबसे बड़ी सफलता है कि भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुए दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में जारी घोषणापत्र के सभी 83 बिंदुओं पर सर्वसम्मति से मुहर लग गई। रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर साझा घोषणापत्र पर सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती था, लेकिन भारत ने तर्क दिया कि जी-20 को यूक्रेन में जारी युद्ध का मंच न बनाया जाए, क्योंकि विकासशील देशों के समक्ष प्रमुख मुद्दा आर्थिक संकट का है। इस तरह इसमें यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए वहां समग्र व स्थायी शांति सुनिश्चित करने की बात तो कही गई, लेकिन रूस की आलोचना नहीं की गई है।



हालांकि प्रधानमंत्री ने फिर से दोहराया कि यह युद्ध का समय नहीं है। घोषणा पत्र में परमाणु हमलों, परमाणु हमले की धमकी का जिक्र करने के साथ आह्वान किया गया कि सभी देश अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करते हुए दूसरे देश की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का पालन करें, ताकि शांति व स्थिरता सुनिश्चित हो सके। असल में, अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने इस बार थोड़ी नरमी दिखाई है, क्योंकि उनके द्वारा हथियार दिए जाने के बावजूद यूक्रेन कुछ नहीं कर पा रहा है, जबकि रूस अब भी प्रभावी है। 


नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनना इसलिए भी अहम है कि पिछले नौ महीनों के दौरान जितनी भी जी-20 की मंत्रिस्तरीय बैठकें हुईं, उनमें साझा घोषणापत्र जारी नहीं हो पाया था। लेकिन इस घोषणा पत्र में पिछले नौ महीनों के दौरान भारत की ओर से रखे गए लगभग सभी प्रस्तावों को शामिल किया गया है, जिस पर सबने सहमति जताई है। 

इस सम्मेलन की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि भारत ने अफ्रीकी देशों के संगठन अफ्रीकी संघ को जी-20 का सदस्य बनाने की जो पहल की, उसमें भी उसे सफलता मिली। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मामलों में इन देशों का समर्थन हासिल करने और वहां अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद मिलेगी। अफ्रीकी संघ 55 देशों का समूह है, जिसकी आबादी करीब डेढ़ अरब है। यह एक बहुत बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र है, जहां भारतीय उत्पादों को बाजार मिल सकता है। 

वास्तव में बाली शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ के प्रेसिडेंट ने स्थायी सदस्यता की मांग उठाई थी, तो हमारे प्रधानमंत्री ने उन्हें कहा था कि हम आपसे वादा करते हैं कि अगली बार आपको इसमें शामिल किया जाएगा और इस बार अफ्रीकी संघ को जी-20 समूह में शामिल किया गया। अफ्रीकी संघ को बहुत देर से जी-20 की सदस्यता मिली है, यह दस साल पहले हो जाना चाहिए था। असल में पहले जितनी संस्थाएं बनीं, उसमें पश्चिमी देशों का वर्चस्व रहा, इसलिए अफ्रीका को बाहर रखा गया था। जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करना स्वागत योग्य कदम है। 

इसके अलावा, भारत ने ग्लोबल साउथ यानी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील एवं गरीब देशों के हितों का ध्यान रखने का मुद्दा उठाया, उसे भी स्वीकार किया गया। इसके पीछे असली बात यह है कि भारत और चीन के बीच इस बात की प्रतिद्वंद्विता चल रही है कि ग्लोबल साउथ का नेता कौन? भारत तो हमेशा से ग्लोबल साउथ के हितों की बात कर रहा है। गुटनिरपेक्ष आंदोलन तो भारत ने ही शुरू किया, चीन ने तो किया नहीं। हम तो विकासशील एवं गरीब देशों के पुराने समर्थक रहे हैं। चूंकि चीन के पास बहुत पैसा है, इसलिए इधर वह कर्ज देकर ग्लोबल साउथ के देशों का नेतृत्व करना चाहता है। इसके कारण चीन का प्रभाव ग्लोबल साउथ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। लेकिन भारत ने इस सम्मेलन में ग्लोबल साउथ के हितों का मुद्दा उठाकर चीन की विस्तारवादी नीति को करारी मात देते हुए बढ़त बना ली है।

इस घोषणापत्र में सिर्फ चीन को ही सख्त संदेश नहीं दिया गया है, बल्कि पाकिस्तान के लिए भी सख्त संदेश है। घोषणा पत्र में कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा बताया गया है। घोषणापत्र के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर एक समग्र दृष्टिकोण ही आतंकवाद का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है। इसमें कहा गया है कि आतंकवादी समूहों को सुरक्षित आश्रय, संचालन की स्वतंत्रता, आवाजाही और रंगरूटों की भर्ती के साथ-साथ वित्तीय, भौतिक या राजनीतिक मदद रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए। 

इसके अलावा, इस सम्मेलन में अमेरिका सहित कई देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय समझौते हुए हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है-भारत से पश्चिम एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा बनाए जाने की घोषणा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस आर्थिक गलियारे की घोषणा करते हुए कहा कि इससे वैश्विक बुनियादी ढांचे, निवेश के लिए साझेदारी, आवाजही और सतत विकास को नई दिशा मिलेगी। वैश्विक ढांचे पर निवेश के लिए साझेदारी (पीजीआईआई) के जरिये ग्लोबल साउथ देशों में बुनियादी ढांचे की खाई को पाटने में बड़ी मदद मिल सकती है। इस कॉरिडोर के निर्माण में भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, फ्रांस, इटली और जर्मनी की साझेदारी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि इस गलियारे के प्रमुख हिस्से के रूप में हम जहाजों एवं रेलगाड़ियों में निवेश कर रहे हैं। 

भारत ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन की शुरुआत करते हुए सभी देशों से इससे जुड़ने का आह्वान किया। इसका उद्देश्य जलवायु खतरों से निपटने के लिए हरित ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। अगर यह सफल हो जाता है, तो न केवल जीवाश्म ईंधन से छुटकारा मिलेगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर सफल रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू करने के लिए जी-20 के राष्ट्राध्यक्ष सहमत हो गए हैं। 

भारत की अध्यक्षता में जी-20 सम्मेलन की सफलता ने यह साबित कर दिया कि भारत वैश्विक कूटनीति का नेतृत्व करने में पूरी तरह से सक्षम है। अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल करने और ग्लोबल साउथ के देशों के हितों का मुद्दा उठाकर भारत ने वैश्विक जगत में अपना कद ऊंचा किया है। सम्मेलन में सामाजिक-आर्थिक विकास, हरित ऊर्जा से लेकर वैश्विक खाद्य संकट एवं वैश्विक आर्थिक संस्थानों के संचालन ढांचे पर भारत के पक्ष को स्वीकृति मिली है। 

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