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द्वंद्व: जब तर्क और भावना की लड़ाई हो, कुशल प्रबंधक ही पार जाएगा

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सार
पहले लोग सोचते थे कि भावनाएं आदिम और विनाशकारी होती हैं और एक तार्किक व्यक्ति किसी भावुक मनुष्य से ज्यादा मजबूत होता है। जबकि आज हम समझते हैं कि भावनाएं अक्सर बुद्धिमत्तापूर्ण होती हैं और अधिकांश समय तर्क का मार्गदर्शन करती हैं। मनोविज्ञान की दुनिया में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
 
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Conflict: When logic and emotion clash, only a skilled manager will prevail
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : freepic

विस्तार

यदि मुझे पिछली आधी शताब्दी की बौद्धिक उपलब्धियों की सूची बनाने को कहा जाए, तो मैं निश्चित रूप से भावनाओं की हमारी समझ में आई क्रांति को उसमें शामिल करूंगा। हजारों वर्षों से, यह आम धारणा रही है कि तर्क और भावनाओं के बीच एक शाश्वत युद्ध चलता रहता है। इस तरह की सोच में तर्क शांत, तार्किक और परिष्कृत होता है, जबकि भावनाएं आदिम, आवेगपूर्ण होती हैं और आपको भटका सकती हैं।



बुद्धिमान व्यक्ति अपनी आदिम भावनाओं पर काबू पाने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए तर्क का प्रयोग करता है। लेकिन आधुनिक तंत्रिका विज्ञान ने इस सोच पर करारा प्रहार किया है। यदि पहले लोग सोचते थे कि भावनाएं आदिम और विनाशकारी होती हैं, तो अब हम समझते हैं कि वे अक्सर बुद्धिमत्तापूर्ण होती हैं। भावनाएं अधिकांश समय तर्क का मार्गदर्शन करती हैं और हमें ज्यादा तार्किक बनाती हैं। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। समस्या यह है कि हमारी संस्कृति और संस्थाएं हमारे ज्ञान के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई हैं। आज भी हम ऐसे समाज में रह रहे हैं, जो कच्ची बुद्धि से भरा हुआ है। हमारे स्कूल बच्चों को मानकीकृत परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत करते हैं, तथा शरीर में विद्यमान उस ज्ञान को कम महत्व देते हैं, जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है।


हमारे आर्थिक मॉडल इस विचार पर आधारित हैं कि मनुष्य एक तार्किक प्राणी है, जो अपने स्वार्थ को महत्व देता है, लेकिन तब हमें आश्चर्य होता है, जब निवेशक खुद को शेयर बाजार के बुलबुले के उन्माद में झोंक देते हैं। बहुत से लोग अपने आंतरिक जीवन से इसलिए कटे हुए हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि भावनाएं कैसे काम करती हैं। हम भावनात्मक संबंध बनाने के मामले में अच्छे नहीं हैं।

वर्ष 1994 में जब एंटोनियो दामासियो ने अपनी क्लासिक किताब डेसकार्टेस एरर प्रकाशित की, तो भावनाओं की समझ में बदलाव शुरू हुआ। दामासियो ने अपने अध्ययन में दर्शाया कि भावनाएं बड़ी चतुराई से चीजों को मूल्य प्रदान करती हैं, और यह जाने बिना कि क्या महत्वपूर्ण है, या क्या अच्छा या बुरा है, मस्तिष्क बस अपने पहिये घुमाता रहता है। भावनाएं और तर्क, दोनों अच्छे निर्णय लेने के लिए जरूरी हैं। उसके बाद से तंत्रिका वैज्ञानिक भावनाओं के अध्ययन में जुट गए। अब हमें इस बात की बेहतर समझ है कि भावनाएं कैसे बनती हैं और वे हमारे लिए क्या करती हैं। सरल शब्दों में कहें, तो चेतन जागरूकता से नीचे आपका शरीर लगातार आपके आसपास की घटनाओं पर प्रतिक्रिया कर रहा है। हर दिन, हर सेकंड आपका दिमाग आपके शरीर से आने वाले संकेतों पर नजर रखता है और उन्हें अर्थ देने की कोशिश करता है। क्या ये शारीरिक प्रतिक्रियाएं घबराहट हैं? चिंता हैं? नहीं! दरअसल, शरीर सक्रिय हो जाता है और फिर मन एक भावनात्मक अनुभव रचता है। भावनाएं हमें सही मानसिक स्थिति में लाती हैं, ताकि हम उस स्थिति के बारे में प्रभावी ढंग से सोच सकें, जिसमें हम उलझे हुए हैं। दूसरे शब्दों में, भावनाएं परिस्थितियों के अनुसार मन को एक या दूसरी दिशा में मोड़ देती हैं। क्रोध हमें अन्याय पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। विस्मय हमें महानता के सामने छोटा महसूस करने और दूसरों के प्रति अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है। उत्साह हमें जोखिम उठाने की मानसिकता में डाल देता है। खुशी हमें रचनात्मक और सोच में अधिक लचीला बनाती है। घृणा हमें अनैतिक व्यवहार को खारिज करने के लिए प्रेरित करती है। भय हमारी इंद्रियों को तीव्र करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। चिंता हमें निराश करती है, जिससे हम जोखिम उठाने से बचते हैं। उदासी याददाश्त बढ़ाती है और सटीक निर्णय लेने में मदद करती है, हमें स्पष्ट संवाद करने वाला और निष्पक्षता के प्रति चौकस बनाती है।

जैसा कि लिसा फेल्डमैन बैरेट ने अपनी पुस्तक हाउ इमोशन्स आर मेड में लिखा है, ‘आप सोच सकते हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी में, आप जो देखते और सुनते हैं, वह आपकी भावनाओं को प्रभावित करता है, लेकिन ज्यादातर इसके विपरीत होता है: आप जो महसूस करते हैं, वह आपकी दृष्टि और श्रवण को बदल देता है।’ तंत्रिका विज्ञानी जॉन कोट्स ने पाया कि कभी-कभी हमारी भावनाएं चीजों को गलत दिशा में ले जाती हैं और हमें आत्मघाती मानसिक स्थिति में डाल देती हैं। न्यूरोसाइंटिस्ट बनने से पहले वह गोल्डमैन सैश, मेरिल लिंच और ड्यूश बैंक में वॉल स्ट्रीट ट्रेडर थे। अपनी पुस्तक द आवर बिटवीन डॉग एंड वुल्फ में, उन्होंने बताया है कि कैसे तेजी वाले बाजार व्यापारियों की भावनात्मक मानसिकता को बदल सकते हैं। निर्णय लेने वालों को जोखिम उठाने और आगे बढ़ने के लिए भावनात्मक आत्म-जागरूकता की जरूरत होती है।

कोट्स और अन्य लोगों द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि प्रमुख व्यापारी शारीरिक परिवर्तनों के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं-जैसे, उनके दिल की धड़कनों में बदलाव। दूसरे शब्दों में, वे भावनात्मक मूल्यांकन में असाधारण रूप से कुशल होते हैं। वे अपनी भावनाओं से संवाद करते हैं।

किसी भावना को शब्दों में व्यक्त करना उसे सही परिप्रेक्ष्य में रखने का बेहतरीन तरीका है, जैसा कि शेक्सपियर ने मैकबेथ लिखते समय समझा था- ‘दुख को शब्द दो। जो दुख बोलता नहीं, वह भरे हुए हृदय में फुसफुसाता है और उसे तोड़ देता है।’ मुख्य बात यह है कि जीवन में महान निर्णय लेने के लिए आपको भावनाओं के प्रबंधन में कुशल होना चाहिए। जीवन गणित की समस्याओं का समूह नहीं है। जीवन विभिन्न भूभागों और परिस्थितियों से गुजरने का नाम है। भावनाएं ही दिशा-निर्देशन प्रणाली का मार्गदर्शन करती हैं।

यह तो हम हमेशा से जानते रहे हैं कि भावनाएं मानवीय संबंधों की कला का केंद्रबिंदु हैं। अब हम समझते हैं कि दुनिया में एक प्रभावी और तर्कसंगत व्यक्ति बनने के लिए भावनाएं जरूरी हैं। फिर भी हममें से ज्यादातर लोग भावनात्मक रूप से अस्पष्ट हैं। अगर आप लोगों को नौकरी पर रखने, शादी करने, दोस्ती करने, उन्हें प्रबंधित करने या उन्हें प्रशिक्षित करने जा रहे हैं, तो क्या आपको उनके मूल प्रभाव, उनके जीवन भर के भावनात्मक आधार के बारे में नहीं जानना चाहिए? क्या आपको यह नहीं पता होना चाहिए कि वे अपनी भावनाओं को समझने, उन्हें चिह्नित करने और व्यक्त करने में कितने कुशल हैं?

जब लोगों को नौकरी से निकाला जाता है, तो ऐसा शायद ही कभी होता है कि उनमें तकनीकी योग्यताओं का अभाव होता है; ऐसा लगभग हमेशा होता है कि वे प्रशिक्षित नहीं होते, उन्हें गुस्सा आता है या वे टीम के बुरे साथी होते हैं। दूसरे शब्दों में, उनमें भावनात्मक कौशल की कमी होती है, जो कि नियुक्ति प्रक्रिया में अक्सर पता नहीं चल पाता। कुछ लोग दूसरों की तुलना में भावनात्मक रूप से बेहद कुशल होते हैं, फिर भी मुझे यकीन नहीं है कि हम इन कौशलों का मूल्यांकन करना जानते हैं या हम उन्हें सिखाने में अच्छे हैं। मैं ऐसी संस्कृति में रहना पसंद करूंगा, जो भावनाओं के बारे में उस सराहना, परिष्कार और स्पष्टता के साथ बात कर सके, जिसके वे हकदार हैं।

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