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प्रेरणा: कान्स ने खोले सफलता के द्वार; अब लोगों की बन रहीं नैन्सी

Mon, 03 Jun 2024 06:47 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Mon, 03 Jun 2024 06:47 AM IST
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सार
नैन्सी ने कान्स में गुलाबी रंग का जो गाउन पहना, उसे उसने खुद सिला था। इसमें एक हजार मीटर कपड़ा और बनाने में एक महीना लगा। जिस कान्स में बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटीज दुनिया के मशहूर डिजाइनर्स के बेहद महंगे कपड़े पहनती हैं, वहां नैन्सी ने खुद का सिला गाउन पहनकर सबको चकित कर दिया। मशहूर अभिनेत्री सोनम कपूर ने कहा कि वह उसके लिए भी कपड़े सिले।
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Cannes opened doors to success for Nancy now people are becoming
नैन्सी त्यागी - फोटो : इंस्टाग्राम

विस्तार

फ्रांस में हुआ कान्स फिल्म फेस्टिवल इस बार इसलिए बेहद खास रहा कि इसमें उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के गांव बरनावा की तेईस साल की लड़की नैन्सी त्यागी ने सफलता के झंडे गाड़ दिए। इसे वहां ब्रूट एजेंसी की तरफ से भेजा गया था। बेहद गरीब परिवेश से आई इस लड़की को कपड़े सिलने का बेहद शौक है। यह तमाम सेलिब्रिटीज को देखकर कपड़े सिलती थी और उसके फोटो इंस्टाग्राम पर लगाती थी। शुरू में उसे बहुत ट्रोल भी किया गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे इसकी फैन फॉलोइंग बढ़ी और आज इसके साढ़े आठ लाख फॉलोअर्स हैं। अब हो सकता है और भी बढ़ गए हों।



नैन्सी ने कान्स में गुलाबी रंग का जो गाउन पहना, उसे उसने खुद सिला था। इसमें एक हजार मीटर कपड़ा और बनाने में एक महीना लगा। जिस कान्स में बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटीज दुनिया के मशहूर डिजाइनर्स के बेहद महंगे कपड़े पहनती हैं, वहां नैन्सी ने खुद का सिला गाउन पहनकर सबको चकित कर दिया। मशहूर अभिनेत्री सोनम कपूर ने कहा कि वह उसके लिए भी कपड़े सिले। नैन्सी ने फ्रांस में भी पत्रकारों के सवालों के जवाब हिंदी में ही दिए और हिंदी भाषी होने पर गर्व प्रकट किया। उसने कहा कि कम से कम उसे हिंदी तो आती है। उसका कहना है कि अंग्रेजी न आने पर भी वह वहां जा सकी, जहां जाने के सपने बहुत से लोग देखते हैं। शुरू में उसके पिता ने उसका विरोध किया था, मगर कान्स की सफलता के बाद अब वह भी उसका हौसला बढ़ाने लगे हैं। बताते चलें कि नैन्सी के पिता टीवी मैकेनिक हैं और मां एक फैक्टरी में काम करती हैं। उसका कहना था कि मां की हाड़-तोड़ मेहनत उससे देखी नहीं जाती थी। नैन्सी को लगता था कि कहीं मां का स्वास्थ्य न खराब हो जाए। वह उनके लिए ही कुछ करना चाहती थी। नैन्सी बारहवीं के बाद दिल्ली आ गई थी। वह यूपीएससी करना चाहती थी, मगर पैसे की तंगी के साथ अंग्रेजी न आने की समस्या भी थी। हालांकि उसे बाद में यह भी पता चला कि यूपीएससी की परीक्षा हिंदी में भी दी जा सकती है। लेकिन एक बार में चयन हो जाए, यह जरूरी नहीं है। वैसे भी गांव वाले माता-पिता से कहते रहते थे कि क्या लड़की पर पैसे खर्च कर रहे हो, लड़के पर करो। मगर नैन्सी ने एक कैमरा खरीदा और सोशल मीडिया का रुख किया और सहारा लिया अपने शौक यानी कपड़ों को सिलने का। बचपन में वह गुड़ियों के लिए कपड़े बनाती थी, फिर अपने लिए बनाने लगी। नैन्सी की मदद करने के लिए उसकी मां ने अपने गहने तक बेच दिए। उसका कहना है कि उसकी मां ने हमेशा उसे बहुत सहारा दिया। इसलिए वह भी उनके लिए कुछ करना चाहती है।


कुल मिलाकर देखा जाए, तो सिलाई मशीन उसका सबसे बड़ा सहारा बनी। भारत में अरसे से सिलाई मशीन की सहायता से न जाने कितनी महिलाओं ने अपना और अपने परिवार का पेट पाला है। पति के न रहने पर बहुत-सी महिलाएं कपड़े सिलकर अपना गुजारा करती रही हैं। ऐसी बहुत-सी महिलाओं को मैं निजी तौर पर जानती हूं। कई तो रिश्ते में भी हैं। एक जमाने में सिलाई मशीन कंपनियां महिलाओं को कपड़े सिलना सिखाने के लिए स्कूल भी चलाती थीं। नैन्सी के मामले में सिलाई मशीन ने उसकी गरीबी तो दूर की ही, उसके सपनों को भी पूरा किया। यह बात भी उसके अभूतपूर्व आत्मविश्वास को दर्शाती है कि उसने एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में खुद के बनाए कपड़े पहने और खूब प्रशंसा हासिल की। उससे एक संवाददाता ने जब यह पूछा कि कोई तुमसे अगर अभी शादी करने के बारे में कहे, तो क्या करोगी? उसने मुस्कराते हुए जवाब दिया-भगा दूंगी। नैन्सी का कहना है कि सोशल मीडिया पर सफलता के लिए कन्टेंट में दम होना चाहिए। फिर उसने यह भी कहा कि चार-पांच दिन से कुछ नहीं सिला है, तो ऐसा लग रहा है कि कुछ काम ही नहीं किया है।

नैन्सी से प्रेरणा लेकर उसके रिश्तेदारों में कई लड़कियां ऐसा करना चाहती हैं। बात भी सही है, अपने बीच से यदि कोई सफल होता है, तो बाकी औरों के लिए भी सफलता के नए द्वार खोलता है। लड़कियों के मामले में तो यह बात और भी सही है। नैन्सी आगे ही आगे बढ़ती जाएगी, अपने प्रयत्नों से उसने राह के सारे कांटे हटा दिए हैं। आज वह चर्चित मीडिया और फैशन इन्फ्लुएंसर है।

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