फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Books also speak scent of paper and voice of memories

किताबें बोलती भी हैं: कागज की खुशबू और यादों की आवाज

Sun, 22 Feb 2026 05:58 AM IST
लव गौर मार्गरेट रेनकल, द न्यूयॉर्क टाइम्स
मार्गरेट रेनकल, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: लव गौर Updated Sun, 22 Feb 2026 05:58 AM IST
विज्ञापन
सार
जब आप टॉल्स्टॉय, खलील जिब्रान या मोपांसा जैसे कालजयी लेखकों को पढ़ते हैं, तो आप दरअसल उनके विचारों से खुद को भर रहे होते हैं। उन पलों में आप महान लेखकों से जुड़ रहे होते हैं, जिसका अन्यथा अवसर आपको शायद ही कभी मिल पाता।
 
loader
Books also speak scent of paper and voice of memories
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

मेरे पति हेवुड, जो एक स्कूल में पढ़ाते थे, इस गर्मी में सेवानिवृत्त हो गए। अब वह घर पर रहते हैं और कभी-कभी बच्चों को पढ़ाते हैं। मैं घर के काम करती हूं और ज्यादातर एक शांत घर में अकेली ही पाई जाती हूं। मुझे इस बात की खुशी है कि अब मेरे पति हर वक्त मेरे पास होते हैं, लेकिन एक समस्या है। अपनी 37 वर्ष की नौकरी में उन्होंने जितनी भी किताबें इकट्ठा कीं, जो अब तक स्कूल में रखी रहती थीं, मेरे पति वे सब की सब घर पर ले आए हैं। हमारे माता-पिता की मौत के बाद विरासत में मिली चीजों से पहले ही घर भरा पड़ा है।


अब सवाल है कि इन किताबों को मैं रखूंगी कहां। ऐसा नहीं कि हमारे घर में किताबों की अलमारियों की कोई कमी है। लेकिन हर अलमारी पहले से ही इतनी भरी हुई है कि अब उनमें जगह बना पाना तो तकरीबन असंभव ही है। दरअसल, हमारा घर पढ़ने वालों के लिए स्वर्ग है। मेरा एक बेटा और उसकी एक दोस्त कुछ ही दिन पहले तीन बड़े कार्टन भरकर किताबें ले गए। मेरे बच्चों की स्कूल के दिनों की किताबें अब तक बक्सों में भरी इंतजार कर रही हैं कि उनके बारे में हम कोई फैसला ले सकें, जो अब तक हो नहीं सका है।


मेरे पति के अध्यापन कॅरिअर के तकरीबन आधे समय से अधिक से लोग कहते आए हैं कि प्रिंटेड किताबों का जमाना जा चुका है, या निकट भविष्य में जाने वाला है। लेकिन, हमारे घर में इन किताबों का जमाना न खत्म हुआ है, और न ही आने वाले समय में खत्म होने के कोई आसार हैं। हम किताबों में जीते हैं। किताबों से बात करते हैं और मानो वे भी हमसे दिल खोलकर बातें करती हैं।

हम किताबों के यादगार पन्नों को थोड़ा मोड़कर रखते हैं, कुछ हिस्सों को पेंसिल से रेखांकित भी करते हैं। मेरे पति जिन किताबों को पढ़ चुके हैं, जब उन्हें मैं उठाती हूं, तो उनमें पति के बनाए चिह्न भी दिखते हैं। मैं किताबों के साथ उन चिह्नों को भी पढ़ती हूं, ताकि यह अनुमान लगा सकूं कि अमुक पंक्तियां पढ़ते वक्त उनके दिमाग में आखिर चल क्या रहा था।

लोग मुझसे पूछते हैं कि मुझे प्रिंटेड या ई-बुक्स में कौन-सी अधिक पसंद हैं। आपको शायद यह बात अजीब लगे, लेकिन मैं हर तरह की पढ़ाई के पक्ष में हूं, फिर चाहे वह ई-बुक हो, ऑडियोबुक्स हों, ब्रेल लिपि में लिखी किताबें हों, ग्राफिक आधारित किताबे हों या कोई और। मैं दरअसल किताबें पढ़ने की हिमायती हूं, चाहे वे कैसी भी हों।

हमारा घर भी एक सार्वजनिक पुस्तकालय की तरह है। मेरे पति और हमारे तीनों बच्चे यहां आते हैं और सैकड़ों ऑडियो और ई-बुक्स ले जाते हैं, जिन्हें वे अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पढ़ते हैं।

ई-बुक्स को संभालना प्रिंटेड किताबों की तुलना में आसान होता है। उनके साथ प्रिंट किताबों वाली यह दिक्कत नहीं आती कि कोई ले गया और फिर वापस लौटाया नहीं। ई-बुक्स खोने का भी डर नहीं रहता। एयरपोर्ट पर मैंने जाने कितनी किताबें खोई हैं। एक बार तो मैंने रिचर्ड पॉवर्स के पुलित्जर पुरस्कार विजेता उपन्यास द ओवरस्टोरी की दो प्रतियां एक ही यात्रा के दौरान खो दी थीं।

मेरा मानना है जीवन में कहानियां और कविताएं हर ओर से आनी चाहिए। ये चाहे आपकी उंगलियों और आंखों (प्रिंट या ई-बुक्स) के या चाहे आपके कानों के माध्यम से (ऑडियो बुक) आएं, इनके रस में कभी कोई कमी नहीं होती। जब आप कोई किताब पढ़ते हैं, तो आपका दिल और दिमाग लेखक के दिल-दिमाग से जुड़ता है। क्या यह कमाल की बात नहीं है? जब आप टॉल्स्टॉय, खलील जिब्रान या मोपांसा जैसे कालजयी लेखकों को पढ़ते हैं, तो आप दरअसल उनके विचारों से खुद को भर रहे होते हैं। उन पलों में आप महान लेखकों से जुड़ रहे होते हैं, जिसका अन्यथा अवसर आपको शायद ही कभी मिल पाता।

व्यक्तिगत तौर पर बात करें, तो मैं हमेशा ऐसी किताब पसंद करूंगी, जिसे मैं अपने हाथ से पकड़ सकूं, जिसमें कागज व गोंद की महक हो। क्या आपने कभी किसी नई किताब के पृष्ठों की खुशबू को महसूस किया है? मेरे लिए ऐसा करना किसी नई किताब के साथ अपने रिश्ते की शुरुआत करने जैसा है। हालांकि, जब मैं अकेली कहीं यात्रा कर रही होती हूं, तो अमूमन ऑडियो बुक भी सुनती हूं। लेकिन घर पर आते ही, मैं प्रिंट किताबों की दुनिया में लौट आती हूं। डिजिटल प्रारूप के बजाय कागज पर पढ़ना मुझे शांत और स्थिर बनाता है। इससे एक आत्मीय एहसास होता है।

किताबें आपकी जिंदगी में समय-यात्रा की तरह का एहसास देती हैं। मैं अपनी किताबों की एक अलमारी के पास से गुजरते हुए आपको ठीक-ठीक बता सकती हूं कि कोई खास किताब अब भी वहां क्यों है, जगह कम होने पर भी उसे कभी हटाया क्यों नहीं गया, भले ही अब मुझे दोबारा उसे पढ़ने का कोई मौका न मिले। जब मैं कोई किताब दोबारा पढ़ती हूं, तो अपने बीते हुए दिनों में लौट जाती हूं। बचपन में अंडरलाइन की गई पंक्तियों को जब मैं आज पढ़ती हूं, तो पुराने दिनों की याद आ जाती है। कई बार पुरानी पंक्तियां आज नए अर्थों का एहसास कराती दिखती हैं। मैं कह सकती हूं कि मैंने आज तक जो खाया है, उससे कहीं ज्यादा मैं वह हूं, जो मैंने पढ़ा है।

अपनी किताबों की अलमारियों को देखकर, मुझे अपने पति की जिंदगी के विभिन्न दौर याद आते हैं। एक युवक, जो हमारे हनीमून पर ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम पढ़ता था। एक युवा शिक्षक, जिसने ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ चिल्ड्रेंस वर्स इन अमेरिका की एक प्रति के भीतर मेरे द्वारा छिपाए गए नोट को पढ़कर जाना था कि वह पिता बनने वाला है। एक शानदार बेटा, जिसने अपने बूढ़े पिता को खुश करने के लिए ढेरों कविताएं याद कर ली थीं।

अब, जब हेवुड अपने स्कूल से किताबों का ढेर घर ले ही आए हैं, तो हमें शायद कुछ और अलमारियां बनवानी पड़ें। अब हमारी जो उम्र है, उसे देखते हुए शायद ये नई अलमारियां हमारी अंतिम अलमारियां हों। लेकिन यह तय है कि अब इसके बाद इस घर में किताबों के लिए जगह नहीं बचेगी।

ये किताबें मेरे भी उन सभी रूपों की याद दिलाती हैं, जो मैं कभी हुआ करती थी। वह कविता-संग्रह मैंने अपने पति को तब दिया था, जब हमारा सबसे बड़ा बेटा इस दुनिया में आने वाला था, ताकि वह जोर-जोर से कविताएं पढ़कर मुझे सुना सकें। यह वही किताब थी, जिसकी कविताएं मेरे पिता बचपन में मुझे पढ़कर सुनाते थे। ऐसी दर्जनों किताबें हैं, जो मुझे समय में पीछे ले जाती हैं।

अब से बहुत समय बाद किसी दिन कोई बच्ची कविताओं की कोई किताब खोलेगी और उसमें दर्ज वे नोट पढ़ेगी, जो मैंने उसके दादाजी के लिए लिखे थे। शायद वह भी इन्हें सहेज कर रखे।
©The New York Times 2026
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed