{"_id":"66bac1d5eb0903e8130d6ad4","slug":"bangladesh-unrest-citizens-awaits-interim-relief-amid-political-crisis-and-conflict-resolution-2024-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांग्लादेश: ‘अंतरिम’ राहत का इंतजार… मामले इतने जटिल हैं कि समाधान के बदले उभर रहीं हैं समस्याएं","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
बांग्लादेश: ‘अंतरिम’ राहत का इंतजार… मामले इतने जटिल हैं कि समाधान के बदले उभर रहीं हैं समस्याएं
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस (फाइल)
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सामने चुनौतियां इतनी बड़ी हैं कि वह बीते एक सप्ताह में लोगों को ‘अंतरिम राहत’ तक नहीं दे पाई है और उसका ‘वार्म अप’ समय बढ़ता जा रहा है। हसीना को अपदस्थ कर ‘एक और आजादी’ का जयघोष तो किया गया, पर मामले इतने उलझे हुए और जटिल हैं कि समाधान की जगह नई तरह की समस्याएं उभरने लगी हैं।11 अगस्त की एक वारदात में ढाका के दिलकुशा स्थित इस्लामी बैंक के मुख्य कार्यालय के बाहर कर्मचारियों के दो गुटों में खूनी संघर्ष हो गया। एक तरफ थे 2017 से पहले के नियुक्त अधिकारी-कर्मचारी और दूसरी तरफ थे हसीना के कार्यकाल में नियुक्त अधिकारी-कर्मचारी, जिन्हें कार्यालय में घुसने से रोका गया। इस गोलीबारी में कई घायल हुए और एक व्यक्ति को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह तो सिर्फ बैंकिंग क्षेत्र का संकट है। इसी तरह न्यायपालिका, पुलिस, एंटी करप्शन ब्यूरो, विश्वविद्यालय जैसे दर्जनों सरकारी संस्थानों में हसीना के कार्यकाल में नियुक्त अधिकारियों व कर्मचारियों को एक तरह से दुश्मन माना जा रहा है।
हसीना के देश में रहते जो गोलीबारी हुई, जिसमें 400 से ज्यादा लोग मारे गए, उसके लिए पुलिस को दुश्मन नंबर एक माना जा रहा है। हिंसा में लगभग एक दर्जन पुलिस वालों की भी हत्या की गई। आज देश के अधिकतर थाने खाली हैं और वहां सेना के जवान पहरा दे रहे हैं। कानून व व्यवस्था बहाल रखने वाला तंत्र ही जब भूमिगत हो, तो मारकाट करने से लेकर मुर्गी, बत्तख और घरों के सामान लूटने वाले असामाजिक तत्वों को कौन रोकेगा? हसीना के घर से अंगवस्त्रों की लूट ने वहां के अराजक तत्वों का वहशीपन उजागर कर दिया है।
10 अगस्त को अफवाह उड़ी कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश स्वत
संज्ञान लेकर अंतरिम सरकार को असांविधानिक घोषित करने वाले हैं। सुबह-सुबह हजारों लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को घेर लिया और मुख्य न्यायाधीश ओबैदुल हुसैन से इस्तीफा लिखवा लिया गया। इसकी वजह है कि बांग्लादेश के संविधान में अंतरिम सरकार का कोई प्रावधान नहीं है। हसीना के सत्ता में रहते हुए अंतरिम सरकार की देखरेख में चुनाव कराने की मांग की गई थी, पर सांविधानिक प्रावधान न होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष की याचिका खारिज कर दी थी।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की विदेश मामलों की प्रवक्ता शमा ओबेद इस्लाम रिंकू ने इस लेखक को बताया कि हम संविधान, न्यायपालिका, एंटी करप्शन ब्यूरो, विश्वविद्यालय, बैंकिंग जैसे क्षेत्रों के प्रशासन में व्यापक बदलाव लाना चाहेंगे। सवाल है कि ‘पूरे घर को बदल डालने’ की चाहत किस प्रशासनिक तंत्र से संभव है। कौन-सा ऐसा कानून है या बनेगा, जो इस काम को अंजाम देगा? जहां तक हिंदुओं पर हमले की बात है, तो वहां हिंदू जागरण मंच के बैनर तले लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और उन्होंने देश न छोड़कर अपने हक के लिए लड़ने का फैसला लिया है।
मंच ने संसद में 10 प्रतिशत आरक्षण सहित चार मांगें अंतरिम सरकार के सामने रखी हैं। वैसे अंतरिम सरकार में हिंदू प्रतिनिधि के रूप में प्रोफेसर विधान रंजन रे को रखा गया है। मोहम्मद यूनुस अपनी अंतरराष्ट्रीय ख्याति को देखते हुए बार-बार लोगों से हिंदुओं को नुकसान न पहुंचाने की बात कह रहे हैं। इंटरनेशनल हिंदू वॉयस आफ बांग्लादेश के अध्यक्ष हाराधन देव के मुताबिक, उनका संगठन अब तक हिंदुओं पर अत्याचार के सभी मामलों की जानकारी नहीं ले सका है, पर अब तक दो-ढाई सौ मामलों का पता चला है। कट्टरपंथियों और असामाजिक तत्वों की क्रूरता ने अंतरिम सरकार के इकबाल को चुनौती दी है।
हसीना के देश छोड़ने की खबर फैलने के बाद 5 से 8 अगस्त तक अवामी लीग के नेताओं के साथ-साथ हिंदुओं पर खुलेआम जुल्म हुआ। नाटोर, ढाका के धमराई, पटुआखाली, शरीयतपुर और फरीदपुर, जेसोर, नोआखाली, मेहरपुर, चांदपुर और खुलना में सैकड़ों हिंदुओं के घरों पर हमले हुए। सैकड़ों देवालयों को तोड़ा गया। जान बख्शने की नकद कीमत पर वसूली की गई। यह तांडव पूरे बांग्लादेश में चला।
जहां तक बंगाल में कूचबिहार के शीतलकुची और कुछ और जगहों से लगी सीमा पर शरण की मांग कर रहे हजारों हिंदुओं के जमा होने की बात है, अंतरिम सरकार को अपने प्रतिनिधि भेजकर उन्हें वापस बुलाने और सुरक्षा देने की पहल करनी चाहिए। जैसा कि बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोट के महासचिव गोविंद प्रमाणिक ने बताया कि कुछ लोग भारत में सीएए लागू होने और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के एक बयान से उत्साहित हो सकते हैं, जिसमें उन्होंने एक करोड़ हिंदुओं को बंगाल पलायन के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने को कहा था। बेहतर तो यही है कि वहां के हिंदू पलायन न कर सरकार से अपना हक मांगें।