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आर्थिकी: भारतीय कपड़ा उद्योग के अच्छे दिन, अर्थव्यवस्था का आधार बनेंगे अंतरराष्ट्रीय 'खिलाड़ी'
Wed, 18 Dec 2024 07:04 AM IST
शिव शुक्ला
डॉ. सुरजीत सिंह
डॉ. सुरजीत सिंह
Published by: शिव शुक्ला
Updated Wed, 18 Dec 2024 07:04 AM IST
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कपड़ा उद्योग।
- फोटो :
META AI
विस्तार
शेख हसीना के निष्कासन के बाद पड़ोसी बांग्लादेश गहरे राजनीतिक संकट में फंस चुका है। अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को दरकिनार कर भारत के साथ टकरावपूर्ण रुख अपना रहा है। बांग्लादेश की कमान अब सेना के हाथ में है। कट्टरपंथियों के प्रभाव के कारण अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा ने बांग्लादेश को अस्थिरता के दौर में पहुंचा दिया है। जसीमुद्दीन रहमानी जैसे खतरनाक आतंकवादी की रिहाई के बाद बांग्लादेश भी न सिर्फ पाकिस्तान की तरह दिवालिया होने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि आर्थिक पतन के मार्ग पर भी आगे बढ़ रहा है।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाने वाला कपड़ा उद्योग अस्थिर कानून-व्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। कई कंपनियां देश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के कारण अपना परिचालन बंद करने की स्थिति में पहुंच चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उद्योग हुआ करता था। अमेरिका एवं यूरोपीय बाजार में बांग्लादेश के कपड़ों की बहुत मांग थी। पश्चिम को जिस पैमाने पर और जैसा उत्पाद चाहिए, उसमें बांग्लादेश ने विशेषज्ञता हासिल कर ली थी।
यूरोपीय बाजार में भारत के मुकाबले बांग्लादेशी उद्यमियों की पहुंच अधिक थी। बांग्लादेश का फलता-फूलता कपड़ा उद्योग देश की जीडीपी में 11 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान करता था एवं कुल निर्यात में कपड़ा निर्यात का योगदान 80 प्रतिशत था। बांग्लादेश ने साल 2023 में लगभग 47 अरब डॉलर से अधिक का टेक्सटाइल निर्यात किया था। इस साल इसके 50 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद थी, लेकिन, देश में फैली हिंसा ने कपड़ा उद्योग को नुकसान पहुंचाया है और लगातार काम बंद होने से बांग्लादेश निर्यात ऑर्डर पूरा करने की स्थिति में भी नहीं है। बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति एक दिन में पैदा नहीं हुई है, बल्कि कोरोना काल के बाद से ही बांग्लादेश में निरंतर बढ़ती मुद्रास्फीति, बढ़ता घाटा, घटता विदेशी मुद्रा भंडार, मुद्रा का अवमूल्यन, बढ़ती आय असमानता, बढ़ते गैर निष्पादित ऋण, अपेक्षित सुधारों की कमी आदि के कारण न सिर्फ बेरोजगारी में वृद्धि हुई, बल्कि लोगों का सरकार के प्रति विश्वास भी घटने लगा था।
राजनीतिक अस्थिरता के कारण बांग्लादेश के सबसे बड़े टेक्सटाइल पार्क बेक्सिंपों पर ताला लग चुका है। इसके साथ ही 170 बड़ी टेक्सटाइल फैक्टरियां भी बंद होने के कगार पर हैं। बांग्लादेश का तानाबाना बिखरने के कारण वहां कार्य करने वाले लगभग लाखों मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पा रही है। कई वैश्विक खिलाड़ी, जो हिंसा के कारण घाटे का सामना कर रहे हैं, अब भारत में परिचालन स्थानांतरित करने और भारतीय निर्माताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि चीन प्लस वन नीति के कारण अमेरिका और यूरोपीय बाजार चीन के साथ जाने के बजाय भारत को अधिक वरीयता देते हैं। यही कारण है कि इंग्लैंड में 2020 में चीन का निर्यात 27 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर 19 प्रतिशत ही रह गया है। साल 2023 में अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात में भारत की हिस्सेदारी छह प्रतिशत थी, जो अक्तूबर, 2024 तक बढ़कर सात प्रतिशत हो गई है। इंग्लैंड को किए जाने वाले कपड़ा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2023 में पांच प्रतिशत थी, जो बढ़कर अक्तूबर, 2024 तक छह प्रतिशत पर आ गई है।
बांग्लादेश के तनावपूर्ण हालात के कारण सरकार उनको भारत में परिचालन के अवसर उपलब्ध करवाकर देश के कपड़ा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक लेकर जा सकती है। इससे वैश्विक कपड़ा सप्लाई चेन में भारत की पकड़ बेहद मजबूत हो जाएगी। इससे न केवल अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आएगा, बल्कि लाखों नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे।
वैश्विक खरीदारों का भारत की तरफ बढ़ते झुकाव को देखते हुए भारत को अपनी बुनियादी अवसंरचना में रणनीतिक निवेश, विनियामक सुधारों द्वारा अनुकूल सरकारी नीतियां, कुशल कार्यबल श्रम मानक, नवाचार आदि पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला परिदृश्य में एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में भारत के उज्ज्वल भविष्य को बुना जा सके। भारत में कपड़ा उद्योग का एक समृद्ध इतिहास रहा है। आज भारत इस उद्योग के माध्यम से ब्रांड इंडिया के रूप में वैश्विक लीडर के रूप में स्वयं को स्थापित कर सकता है। समय ने भारत को खुद को फिर से तलाशने का अवसर दिया है। इसे दोनों हाथों से लपक कर कपड़ा उद्योग के सुनहरे दिनों को वापस लाकर संस्कृति के गौरव को पुनः पाया जा सकता है।