फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Amidst all claims that Indian economy are strong, IMF projected growth rate 5.9 percent for the year 2023-24

अर्थव्यवस्था : आर्थिक हिचकोलों के बीच सियासत और सरकार का गणित

Tue, 18 Apr 2023 09:11 AM IST
Anant Mittal अनंत मित्तल
Updated Tue, 18 Apr 2023 09:11 AM IST
सार

खुदरा मूल्य आधारित मुद्रास्फीति मार्च में  घट गई है, जिससे बेशक भाजपा को चुनाव में फायदा हो, पर यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

विज्ञापन
Amidst all claims that Indian economy are strong, IMF projected growth rate 5.9 percent for the year 2023-24
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद पुख्ता होने के तमाम दावों के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वर्ष 2023-24 के लिए हमारी वृद्धि दर का अनुमान 5.9 फीसदी तक घटा कर आसन्न संकट का डंका पीट दिया है। इसकी वजह वैश्विक अर्थव्यवस्था की दर तीन फीसदी से घटकर 2.8 फीसदी रह जाने का नया अनुमान है। आईएमएफ के अनुसार, यों भी भारत में मुद्रास्फीति की दर पिछले 17 महीने से छह फीसदी या उससे ज्यादा ही है। बजट दस्तावेज भी वर्ष 2023-24 में औसतन 5.3 फीसदी मुद्रास्फीति की आशंका जता रहा है। इस साल मानसून में भी करीब 10 फीसदी कमी के चलते महंगाई से निजात मुश्किल लग रहा है।

विज्ञापन


पिछले साल मानसून 106 फीसदी बरसा था, मगर इस साल मौसम विभाग ने उसके 96 फीसदी ही बरसने का अनुमान लगाया है। प्रशांत महासागर में अल नीनो से मानसूनी बारिश कम हो सकती है। मौसम विभाग 100 फीसदी से चार फीसदी अधिक अथवा कम बारिश को सामान्य ही मानता है, मगर बारिश में दस फीसदी की कमी के असर को किसान बखूबी समझता है। महामारी के दौरान लॉकडाउन के चलते ज्यादातर मुल्कों की वृद्धि दर नकारात्मक यानी शून्य से भी पांच से आठ फीसदी नीचे गिर चुकी है। तभी से दुनिया मंदी में जकड़ी हुई है। रेटिंग एजेंसी पीडब्लूसी यानी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स का ताजा सर्वेक्षण भी भारत में अगले छह माह तक 63 फीसदी लोगों द्वारा खर्च में कटौती की चिंताजनक तस्वीर दिखा रहा है। हरेक वर्ग के उपभोक्ताओं से बातचीत पर आधारित यह सर्वेक्षण देश में 20 फीसदी लोगों द्वारा कंजूसी से खर्च करने की आशंका जता रहा है।
विज्ञापन


महंगाई पीड़ित अधिकतर लोगों ने अगले छह महीने तो सिर्फ खाने-पीने, स्कूल फीस, मकान किराये, बस-मेट्रो किराये, इलाज आदि जरूरी मदों में ही खर्च करने का रुझान दिखाया है। उनके अनुसार, मांग और खपत की भारी कमी से मंदे हुए धंधे ने जेब खाली कर दी है। उपर से महंगाई की मार कमर तोड़ रही है। मूडीज के अनुसार, वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर 4.4 फीसदी तक गिरने से हालात बिगड़े हैं, जिन्हें चालू माली साल भी झेलेगा। वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में जीडीपी 8.8 फीसदी बढ़ी थी, मगर भारी महंगाई ने मांग पर पानी फेर दिया। उससे उत्पादन में कटौती हुई, तो तीसरी तिमाही में वृद्धि दर आधी रह गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


हमारी जीडीपी में 60 फीसदी योगदान मांग आधारित खपत का है। सो खपत घटी, तो वृद्धि दर भी गिरी! भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास भी खपत घटने पर चिंतित हैं, मगर वृद्धि का अनुमान 6.5 फीसदी लगा रहे हैं। जबकि विश्व बैंक भी इसका अनुमान 6.3 फीसदी तक घटा चुका है। केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति रोकने के लिए मई, 2022 से 31 मार्च, 2023 के बीच ब्याज दर में 250 बीपीएस का इजाफा कर चुका है। इससे मुद्रास्फीति तो घटी, पर कर्ज महंगा हो गया। सुस्त अर्थव्यवस्था में चुनावी मौसम में जान फूंकने के लिए रिजर्व बैंक ने इस महीने ब्याज दर और नहीं बढ़ाई। इससे रियल एस्टेट की खरीद-फरोख्त में तेजी की संभावना है। उससे बैंकिंग और कोर सेक्टर, जैसे-सीमेंट, इस्पात आदि उद्योगों का पहिया भी तेज घूम सकता है।


सरकार द्वारा मार्च, 2023 में जीएसटी की उगाही, ई वे बिल, बैंक से कर्ज की मांग तथा कार, दोपहिया की बिक्री में तेजी को खपत बढ़ने का संकेत बताया जा रहा है। मार्च में सरकारी विभागों और निजी संस्थानों में बजट खर्च करने की होड़ वैसे भी खपत बढ़ा देती है। इन्हें मांग में तेजी और मंदी की विदाई वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में मांग बढ़ने पर ही मानी जाएगी। मंदी को असल झटका गांवों में उपभोक्ता सामान की मांग बढ़ने पर लगेगा। फिलहाल पस्त पड़ी ग्रामीण मांग में तेजी रबी की फसल बिकने पर आ सकती है। खुदरा मूल्य आधारित मुद्रास्फीति फरवरी, 2023 में 6.44 से घटकर मार्च में 5.66 फीसदी दर्ज हुई है। इससे कर्नाटक की चुनावी राह भाजपा के लिए भले ही थोड़ी आसान हो जाए, मगर झटके खाती अर्थव्यवस्था से सरकार की चुनौतियां बढ़नी तय है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed