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कृषि और समृद्धि: नई योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी बड़े सुधार करने का वायदा, आत्मनिर्भरता का संकल्प
Fri, 18 Jul 2025 07:44 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 18 Jul 2025 07:44 AM IST
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विस्तार
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित जिस प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है, वह कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार करने का वायदा तो खैर करती ही है, भारत को आत्मनिर्भर और जलवायु-अनुकूल कृषि व्यवस्था की ओर ले जाने का संकल्प भी दर्शाती है। योजना के तहत अगले छह वर्षों में चौबीस हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के निवेश के साथ सौ जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इन जिलों का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन सभी में फसलों का उत्पादन कम, फसलों की सघनता मध्यम और ऋण उपलब्धता औसत से कम है।इस योजना की खास बात यह है कि यह नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है, और जो केंद्र के ग्यारह मंत्रालयों की छत्तीस मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगी, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा। भारतीय कृषि को लंबे समय से कम उत्पादकता, जलवायु में बदलाव, और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह योजना इन चुनौतियों के अलावा, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देती है। योजना के तहत फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों की एक ही फसल पर निर्भरता कम होेगी।
यह योजना खासकर छोटे और सीमांत व महिला किसानों, कृषि-तकनीकी स्टार्टअप और स्वयं-सहायता समूहों को फायदा पहुंचाएगी। अनुमान है कि इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे, जिससे स्वाभाविक ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी विकास होगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह केवल सब्सिडी आधारित राहत न होकर, संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित है। इससे किसान उत्पादन से लेकर विपणन तक के हर चरण में सशक्त बनेगा। हालांकि कम उत्पादकता वाले सौ जिलों का चयन और वहां रणनीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन एक जटिल प्रक्रिया होगी। इसके अतिरिक्त, किसानों तक योजना की जानकारी और लाभ पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण की जरूरत होगी।
आवेदन प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाना भी उतना ही जरूरी है, ताकि छोटे और सीमांत किसान आसानी से इसका लाभ उठा सकें। टिकाऊ खेती के लिए मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने की भी जरूरत है। देश की खाद्य सुरक्षा, रोजगार और निर्यात के संदर्भ में यह योजना भारतीय कृषि का कायाकल्प करने की क्षमता रखती है, बशर्ते इसका सही ढंग से कार्यान्वयन भी हो।