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मंजिलें और भी हैं : स्पेशल चिल्ड्रन के परिजनों को दे रही हूं जानकारी
Fri, 05 Jul 2019 12:57 AM IST
Avdhesh Kumar
प्राची देव
प्राची देव
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 05 Jul 2019 12:57 AM IST
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प्राची देव
- फोटो : amar ujala
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स्पेशल चिल्ड्रन की देखभाल करने वालों की कहानियां, बिना शर्त प्यार और विश्वास को प्रदर्शित करती हैं। उनके लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आती है, लेकिन वे अपने बच्चों को उनकी दिव्यांगता से परे देखते हैं। मैं हैदराबाद की रहने वाली हूं, और अभी इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में नौकरी करती हूं। यह काम शुरू करने से पहले मैं माइक्रोसॉफ्ट और टाटा कंसलटेंसी जैसी कंपनियों में टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल की जिम्मेदारी निभा चुकी हूं।
मेरे बड़े भाई डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। बचपन से मैंने महसूस किया कि उनकी बीमारी के बारे में मेरे परिवार को कोई जानकारी उपलब्ध ही नहीं थी। हालांकि ऐसे कई संगठन हैं, जो स्पेशल चिल्ड्रन के साथ काम करते हैं, उन्हें स्कूली शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं लेकिन माता-पिता और देखभाल करने वालों के लिए जानकारी और सहयोग का क्षेत्र बहुत सीमित है।
मैं अच्छी तरह जानती हूं, कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों के परिवार खुद को पूरी तरह से अपने बच्चों के लिए समर्पित तो कर देते हैं, लेकिन जानकारी, व सहयोग के अभाव में इनको अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न परिवारों के साथ काम किया जाए। मैंने थोड़ा अध्ययन किया तो, हमें पता चला कि बहुत कम माता-पिता होते हैं, जिनको जब तक डॉक्टर न बताए तब तक बच्चे के डाउन सिंड्रोम या ऑटिज्म के बारे में पता होता है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए मैंने 'नई दिशा' रिसोर्स सेंटर की शुरुआत की।
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यह मंच बौद्धिक और विकासात्मक रूप से दिव्यांग बच्चों के परिवारों को आवश्यक जानकारी प्रदान करता है, उनके लिए सुविधाएं खोजने में मदद करता है, और उन्हें स्पेशल चिल्ड्रन, ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के अन्य परिवारों से भी जोड़ता है। ये ऑनलाइन और ऑफलाइन बातचीत के माध्यम से देखभाल करने वालों को डाउन सिंड्रोम के विभिन्न चरणों की जानकारी के साथ मदद करता है। माता-पिता के लिए बच्चे की डाइग्नोसिस के बाद का पहला साल हमेशा परेशानी भरा होता है। वे डॉक्टरों के यहां चक्कर काटते हैं और तमाम कोशिशें करते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उन्हें किससे संपर्क करना है।
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मेरे बड़े भाई डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। बचपन से मैंने महसूस किया कि उनकी बीमारी के बारे में मेरे परिवार को कोई जानकारी उपलब्ध ही नहीं थी। हालांकि ऐसे कई संगठन हैं, जो स्पेशल चिल्ड्रन के साथ काम करते हैं, उन्हें स्कूली शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं लेकिन माता-पिता और देखभाल करने वालों के लिए जानकारी और सहयोग का क्षेत्र बहुत सीमित है।
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मैं अच्छी तरह जानती हूं, कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों के परिवार खुद को पूरी तरह से अपने बच्चों के लिए समर्पित तो कर देते हैं, लेकिन जानकारी, व सहयोग के अभाव में इनको अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न परिवारों के साथ काम किया जाए। मैंने थोड़ा अध्ययन किया तो, हमें पता चला कि बहुत कम माता-पिता होते हैं, जिनको जब तक डॉक्टर न बताए तब तक बच्चे के डाउन सिंड्रोम या ऑटिज्म के बारे में पता होता है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए मैंने 'नई दिशा' रिसोर्स सेंटर की शुरुआत की।
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यह मंच बौद्धिक और विकासात्मक रूप से दिव्यांग बच्चों के परिवारों को आवश्यक जानकारी प्रदान करता है, उनके लिए सुविधाएं खोजने में मदद करता है, और उन्हें स्पेशल चिल्ड्रन, ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के अन्य परिवारों से भी जोड़ता है। ये ऑनलाइन और ऑफलाइन बातचीत के माध्यम से देखभाल करने वालों को डाउन सिंड्रोम के विभिन्न चरणों की जानकारी के साथ मदद करता है। माता-पिता के लिए बच्चे की डाइग्नोसिस के बाद का पहला साल हमेशा परेशानी भरा होता है। वे डॉक्टरों के यहां चक्कर काटते हैं और तमाम कोशिशें करते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उन्हें किससे संपर्क करना है।
नई दिशा का उद्देश्य विशेष जरूरतों वाले बच्चों के परिवारों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की जानकारी, मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करना है। ये मदद तीन अलग-अलग तरीकों से की जाती है। सबसे पहले वेबसाइट पर लॉग इन करने पर, उन्हें विषय-विशेषज्ञों के सहयोग से नवीनतम शोध और साक्ष्य-आधारित जानकारी प्रदान की जाती है। यह ऑडियो, वीडियो, इन्फोग्राफिक्स आदि के माध्यम से उपलब्ध है।
दूसरा, वेबसाइट विभिन्न शहरों में उपलब्ध सर्विसेस की एक डायरेक्टरी भी प्रदान करती है। यदि हम किसी व्यावसायिक चिकित्सक को अपने साथ जोड़ते हैं, तो हम उसकी डिग्री, अनुभव आदि के बारे में भी विवरण देते हैं, ताकि माता-पिता सही निर्णय ले सकें। तीसरी सर्विस, सेवा सहायता समूह है। इसमें नौ ऑनलाइन सहायता समूह हैं और कुछ ऑफलाइन पहल माताओं द्वारा हैदराबाद, पुणे, बंगलूरू और मुंबई में एक दूसरे का समर्थन करने के लिए शुरू की गई हैं।
वर्ष 2015 में स्थापित इस मंच से देश भर में लगभग 3,500 परिवारों को जोड़ा जा चुका है। अच्छा लगता है, जब आपको एक मां फोन करके कहे कि, जब तक आपकी वर्कशॉप अटेंड नहीं की थी तब तक नहीं पता था कि उनकी बेटी स्पीच थैरेपी का लाभ उठा सकती है। मैं इस मंच से अलग-अलग भारतीय भाषाओं में डाउन सिंड्रोम की जानकारी उपलब्ध कराने और एक मोबाइल ऐप लॉन्च करने की योजना बना रही हूं। हमें सहानुभूति की आवश्यकता है, और यह तभी होगा, जब लोग जागरूक होंगे।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।
दूसरा, वेबसाइट विभिन्न शहरों में उपलब्ध सर्विसेस की एक डायरेक्टरी भी प्रदान करती है। यदि हम किसी व्यावसायिक चिकित्सक को अपने साथ जोड़ते हैं, तो हम उसकी डिग्री, अनुभव आदि के बारे में भी विवरण देते हैं, ताकि माता-पिता सही निर्णय ले सकें। तीसरी सर्विस, सेवा सहायता समूह है। इसमें नौ ऑनलाइन सहायता समूह हैं और कुछ ऑफलाइन पहल माताओं द्वारा हैदराबाद, पुणे, बंगलूरू और मुंबई में एक दूसरे का समर्थन करने के लिए शुरू की गई हैं।
वर्ष 2015 में स्थापित इस मंच से देश भर में लगभग 3,500 परिवारों को जोड़ा जा चुका है। अच्छा लगता है, जब आपको एक मां फोन करके कहे कि, जब तक आपकी वर्कशॉप अटेंड नहीं की थी तब तक नहीं पता था कि उनकी बेटी स्पीच थैरेपी का लाभ उठा सकती है। मैं इस मंच से अलग-अलग भारतीय भाषाओं में डाउन सिंड्रोम की जानकारी उपलब्ध कराने और एक मोबाइल ऐप लॉन्च करने की योजना बना रही हूं। हमें सहानुभूति की आवश्यकता है, और यह तभी होगा, जब लोग जागरूक होंगे।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।