World Health Day 2022: कोरोना काल के बाद आम हो गए विटामिन और इम्यूनिटी जैसे शब्द लेकिन सही सबक सीखना अब भी जरूरी
कोई भी महामारी एक दिन या एक हफ्ते का मामला नहीं होती। जब ये लंबी खिंचती है तो आने वाले समय पर भी इसका बुरा असर पड़ता ही है। कोरोना के आने के साथ ही मास्क, सेनेटाइजर और काढ़े की बाढ़ भी आई। लोग इसमें बह गए।
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बीमारियां या महामारियां अगर तकलीफ और दुख साथ लाती हैं तो ये बहुत बड़ा सबक भी साथ देकर जाती हैं। ये सबक होता है अपनी सेहत के प्रति जागरूक होने और सतर्कता बरतने का। कोरोना से पहले भी जो महामारियां आई होंगी उनका असर भी शायद इसी तरह का रहा होगा। लेकिन असल महत्व इस बात का है कि इस सतर्कता को लोग कितने समय और कैसे साथ रखते हैं। कोरोना के दौर की शुरुआत में लोगों ने वायरस के मीम्स बनाने के साथ ही तेजी से सोशल मीडिया पर काढ़े से लेकर तमाम घरेलू (और कुछ मामलों में अंधविश्वास भी) के तोड़ और उपाय बता डाले। विटामिन सी और इम्युनिटी जैसे शब्द आम होते चले गए। गांव कस्बे तक मे लोगों को ये समझ आने लगा कि विटामिन सी के लिए संतरा, नींबू, विटामिन डी के लिए धूप और प्रोटीन के लिए दाल पीना बहुत महत्वपूर्ण है और इससे इम्युनिटी बढ़ती है। इम्युनिटी बढ़ने का यह मंत्र लोगों ने बिना यह समझे भी आत्मसात कर लिया कि इम्युनिटी ऐसे ही नहीं बढ़ जाती और विटामिन्स और प्रोटींस का सीमा से ज्यादा सेवन तबियत बिगड़ भी सकता है। लिहाजा कोरोना ने लोगों को सजग तो बनाया, सतर्क भी किया लेकिन बिना पूरी बात जाने।
क्यों है इसका बुरा असर?
कोई भी महामारी एक दिन या एक हफ्ते का मामला नहीं होती। जब ये लंबी खिंचती है तो आने वाले समय पर भी इसका बुरा असर पड़ता ही है। कोरोना के आने के साथ ही मास्क, सेनेटाइजर और काढ़े की बाढ़ भी आई। लोग इसमें बह गए। अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दौर में बेवजह और अनियंत्रित तरीके से सेनेटाइजर और काढ़े के प्रयोग ने लोगों की सेहत को उल्टा और बिगाड़ दिया। त्वचा रोगों से पाचन सम्बन्धी रोगों के केसेस बढ़ने लगे। लोगों ने काढ़े का प्रयोग शर्बत की तरह किया और शरीर को नुकसान पहुंचा डाला।
-एक बड़ा प्रतिशत उनका भी रहा जिन्होंने हर सावधानी को ताक पर रख दिया और इस बीमारी के अस्तित्व को ही नकार दिया। ऐसे लोग अगर खुद परेशान नहीं हुए तो उन्होंने कैरियर बनकर दूसरों को बीमार कर डाला।
-बिना प्रशिक्षण और खुद की सेहत को समझे लोगों ने अपने मन से एक्सरसाइज और जिमिंग शुरू कर दी और हालत यह हुई कि दूसरी लहर में कम उम्र लोगों और जिम जाने वालों के मरने का आंकड़ा भी बढ़ गया।
ये सबक सीखने की है जरूरत:
महामारियां आना नई बात नहीं है। नया है हर बार इनसे सीख कर खुद को सुरक्षित रखना। इस मामले में कुछ बिंदुओं पर गौर करना जरूरी है-
-एक्सरसाइज, योग, जिम जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन बिना सही प्रशिक्षण और बिना अपने शरीर को जाने इनका असीमित प्रयोग आपके शरीर की लय ताल को बिगाड़ सकता है।
-आपका खान-पान और रूटीन पूरे जीवन के लिए संतुलित रहना जरूरी है। केवल महामारी आने के कुछ समय तक इसका पालन करना और बाद में पीछे हट जाना मुश्किल खड़ी कर सकता है।
-फिजिकल के साथ मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना कितना जरूरी है यह भी इस बीमारी ने सिखाया। आंकड़े बताते हैं कि जिन लोगों ने सकारात्मक सोच रखी और बीमारी को दिमाग पर हावी नहीं होने दिया, वे इस बीमारी जीते भी और स्वस्थ भी हुए। इसलिये फिजिकल फिटनेस के साथ मेंटल फिटनेस के लिए भी सजग रहना आवश्यक है।
-इस बीमारी ने होने के बाद पीड़ितों के शरीर को अंदरूनी तौर पर भी नुकसान पहुंचाया। कई शोध इस बात को साबित कर चुके हैं कि कोरोना के मरीजों के ह्रदय, लिवर, फेफड़ों सहित हड्डियों तक पर इसका बुरा असर हुआ है और ध्यान न देने की सूरत में यह गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिये बीमारी से ठीक होने के बाद भी नियमित रूटीन, खान-पान और एक्स्ट्रा सप्लीमेंट्स का सेवन डॉक्टर की सलाह से करना जरूरी है।
-हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापा, जो हमारे देश के लिए पहले ही एक बड़ा खतरा है, उनका अनियंत्रित रहना कोरोना के केस बिगाड़ सकता है यह बात भी साबित हो चुकी है। इसलिए इन बीमारियों का सही इलाज और प्रबंधन भी बहुत जरूरी है।
-सालाना जांचों को लेकर सजग रहना भी फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इससे बीमारी को समय पर जानने और उसका इलाज पाने में मदद मिल सकती है।
-मास्क और सामान्य हाइजीन को लेकर सतर्कता भी अभी जरूरी है। क्योंकि अभी बीमारी पूरी तरह गई नहीं है। खासकर उन लोगों के लिए जो पहले ही किसी बीमारी से जूझ रहे हैं।
-इस वर्ल्ड हेल्थ डे खुद से यह वादा भी जरूरी है कि केवल मेडिक्लेम ले लेने भर से काम नहीं चलेगा। सम्पूर्ण स्वास्थ्य को लेकर सजगता और जानकारी रखनी होगी और उनके अनुसार जीवन जीना होगा। यह आने वाले समय में देश के स्वास्थ्य की सही तस्वीर पेश कर सकेगा।
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