ऋषि कपूर स्मृति शेष: आधी सदी तक सबकी आंखों का तारा रहा वो नीली आंखों वाला लड़का चिंटू
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फिल्म मेरा नाम जोकर का हाथों में गुडिया लिए वह गोल मटोल सा नीली आंखों वाला लडका जिसकी मासूम आंखों की चमक किसी का भी मन मोह ले, बॉबी का वह किशोरवय की दहलीज पार करता हुआ लड़का जो एक लड़का को एकटक देखकर प्रेम की परिभाषा लाखों दिलों को सीधे दिल तक पहुंचा था एक ही सीन मेंँ। बतौर नायक भले ही ऋषिकपूर बॉबी में आए लेकिन असल में उनकी प्रभावी एंट्री मेरा नाम जोकर में ही अपने पिता के किशोर वय के रोल से ही हो चुकी थी।
अपने पिता की ही तरह भावप्रवण आंखें और लरजती आवाज से यह मासूम चिंटू यानी ऋषि कपूर युवा दिलों की धड़कन बन गया था और फिर पुनर्जन्म की कथा आधारित कर्ज का यूथ आइकान यानी मेरी उमर के नौजवानों गाने की बेहद मकबूलियत से लेकर हाल के दिनोेंं में अग्निपथ के रीमेक और डी डे में गैंगस्टर दाऊद के किरदार जैसे विलेन के किरदार चिंटू सदैव मकबूल ही बने रहे। शानदार अदाकार इरफान के कैंसर नामी काल के गाल में समाने के 24 घंटे भी नहीं बीते कि चिटू जी के निधन की खबर भारतीय सिनेमा जगत और सिनेमा प्रेमियो के लिए दोहरे आघात की तरह है।
फिल्मी दुनिया कें हर रंग में चटख चमक के साथ मौजूद रहे ऋषिकपूर मुख्यत: रोमांटिक भूमिकाओं में सफल् रहे और उनके डांस की अदा उन्हें शम्मी कपूर और जितेंद्र से भी आगे ले गई। कर्ज की सफलता से लेकर उनकी आखिरी फिल्म तक वे सबके चहेते थे। चरित्र अभिनेता और हास्य भूमिकाओं में भी उन्होंने खासी लोकप्रियता हासिल की। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी मनमोहन देसाई वाली तूफानी सफलता वाली फिल्मों मेंं उनके छोटे भाई की भूमिकाओं में वे खूब जमे।
इनमें अमर अकबर एंथोनी से नसीब तक शामिल हैं। ऋषि की बतौर हीरो डेब्यू फिल्म बाबी की नायिका डिंपल कापडिया ने करीब दो दशक बाद जब वापसी की तो उनके इस दूसरे डेब्यू में नायक ऋषि ही थे, जी हां सागर फिल्म भी वैसी ही प्रभावी रही जैसे हम बॉबी का ही सीक्वल एक लंबे अंतराल के बाद देख रहे हों।
बाद में चिंटू की सर्वाधिक पापुलर नायिका रही नीतू सिंह उनकी लाइफ पार्टनर बनीं और हमने बीते दो सालों में चिंटू के कैंसर से संघर्ष में उनको हमकदम रहते हुए देखा। फिल्माें रचे बसे कपूर खानदार के इस बेहद प्यारे सितारे ने बीमारी के बावजूद अपनी शिद्दत फिल्मों के प्रति कम नहीं होने दी। उनके बेटे रणवीर कपूर ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए खासी मकबूलियत हासिल की है।
फिल्मों के अलावा वे सोशल मीडिया के इस दौर में इस माध्यम पर न केवल जबरदस्त सक्रिय रहते बल्कि अपने दो टूक बयानों और नजरियों से आलोचना भी सहते थे। हाल ही में उन्होंने कोरोना संकट से निपटने के लिए मार्च में ही आपातकाल लगाने की मांग कर दी थी। सब जानते थे कि वे गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं। विदेश में इलाज कराते रहे लेकिन मनुष्य की एक सीमा है, चिकित्सा विज्ञान की भी एक सीमा है। इस कोरोनाकाल में इरफान के बाद अब ऋषिकपूर का यूं चले जाना सिने प्रेमियों को सालों सालता रहेगा।
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