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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   The unique secret of photographic memory; forgetting is also an essential ability of the human brain.

दूसरा पहलू: फोटोग्राफिक मेमोरी का अनूठा राज, भूलना भी इंसानी दिमाग की जरूरी क्षमता

Tue, 26 May 2026 07:46 AM IST
Pavan गैब्रिएल प्रिंसिपे
गैब्रिएल प्रिंसिपे Published by: Pavan Updated Tue, 26 May 2026 07:46 AM IST
सार

क्या इंसानी दिमाग सच में कैमरे की तरह सब कुछ रिकॉर्ड कर सकता है? फोटोग्राफिक मेमोरी की सच्चाई और हमारी यादों के पीछे छिपा विज्ञान क्या है? वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘ईडेटिक इमेजरी’ में कुछ लोग तस्वीर हटने के बाद भी थोड़ी देर तक उसे दिमाग में साफ देख सकते हैं। जब हम किसी घटना को याद करते हैं, तो दिमाग उसे हूबहू वापस नहीं चलाता, बल्कि अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर उसका पुनर्निर्माण करता है। यादें हमारे वर्तमान विचारों, भावनाओं, अनुभवों और परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं।

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The unique secret of photographic memory; forgetting is also an essential ability of the human brain.
फोटोग्राफिक मेमोरी का अनूठा राज - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

फिल्मों और टीवी शो में दर्शक बार-बार ऐसे लोगों के प्रति आकर्षित होते हैं, जिनके पास असाधारण दिमाग होता है। वे किसी कमरे या चेहरे को सिर्फ एक बार देखते हैं और बाद में उसकी हर छोटी-बड़ी जानकारी बिल्कुल सटीक तरीके से दोहरा देते हैं। कुछ लोगों का दिमाग कैमरे की तरह काम करता है।
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फोटोग्राफिक मेमोरी का विचार बेहद आकर्षक है- एक बार कुछ देखो और वह हमेशा के लिए दिमाग में रिकॉर्ड हो जाए। लेकिन विज्ञान अब तक ऐसी किसी क्षमता का प्रमाण नहीं दे पाया है। स्मृति शोध बताते हैं कि इंसानी दिमाग किसी रिकॉर्डिंग डिवाइस की तरह काम नहीं करता। जब हम किसी घटना को याद करते हैं, तो दिमाग उसे हूबहू वापस नहीं चलाता, बल्कि अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर उसका पुनर्निर्माण करता है।
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यादें हमारे वर्तमान विचारों, भावनाओं, अनुभवों और परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। इसलिए कोई घटना आज जिस तरह याद आती है, वह कल थोड़ी अलग लग सकती है। हमारी स्मृति स्थिर नहीं, बल्कि लगातार बदलने वाली प्रक्रिया है। यही कारण है कि यादें अधूरी भी होती हैं और उनमें गलतियां भी शामिल हो सकती हैं। मेमोरी प्रतियोगिताओं के विजेता जरूर असाधारण याददाश्त रखते हैं। वे मिनटों में हजारों अंक या पूरी ताश की गड्डी याद कर लेते हैं। लेकिन यह जन्मजात नहीं होता। वे विशेष तकनीकों, मानसिक ढांचों व वर्षों के अभ्यास का इस्तेमाल करते हैं। उनकी सफलता बेहतर रणनीतियों का परिणाम होती है, न कि किसी जादुई दिमाग का।
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वैज्ञानिकों के अनुसार, फोटोग्राफिक मेमोरी के सबसे करीब ‘ईडेटिक इमेजरी’ नाम की क्षमता मानी जाती है। इसमें कुछ लोग तस्वीर हटने के बाद भी थोड़ी देर तक उसे दिमाग में साफ देख सकते हैं। यह क्षमता दुर्लभ है और अधिकतर बच्चों में पाई जाती है। लेकिन यह भी जल्दी धुंधली पड़ जाती है। भूलना भी इंसानी दिमाग की जरूरी क्षमता है। अगर हर अनुभव हमेशा उतनी ही तीव्रता से याद रहे, तो जीवन बोझिल हो जाएगा। यदि हम दिमाग को कैमरे की तरह देखने की सोच छोड़ दें, तो शायद हम स्मृति को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। दिमाग कोई फिल्म रोल नहीं है, बल्कि एक कहानीकार है, जो वर्तमान के अनुसार अतीत को संपादित करता है, उसकी व्याख्या करता है और उसे नया रूप देता है। और यह कोई कमजोरी नहीं है। यही इंसानी दिमाग की असली सुपरपावर है।  -द कन्वर्सेशन
 
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