यूरोप डायरी: उत्तर प्रदेश के बुनकरों की मुरीद दुनिया
उत्तर प्रदेश के स्थानीय बुनकरों की मुरीद दुनिया की नामचीन कंपनियां भी हो चुकी हैं। रिटेल क्षेत्र की अंतर्राष्ट्रीय स्वीडिश कंपनी IKEA (आईकिया) के तमाम स्टोर्स में इन बुनकरों के बुने कालीन और रग दुनिया भर में खूब बिक रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के स्थानीय बुनकरों की मुरीद दुनिया की नामचीन कंपनियां भी हो चुकी है। रिटेल क्षेत्र की अंतर्राष्ट्रीय स्वीडिश कंपनी IKEA (आईकिया) के तमाम स्टोर्स में इन बुनकरों के बुने कालीन और रग दुनिया भर में खूब बिक रहे हैं। आईकिया इन्हें लोकल (स्वीडिश में लोकल्त) नाम से बेच रही है।
दरअसल, इन कालीन की मांग काफी ज्यादा है, जिसपर भारतीय बुनकरों ने अपने पारंपरिक व सांस्कृतिक छाप छोड़ी है। दिलचस्प यह है कि उत्तर प्रदेश के महिला बुनकरों के स्वयंसेवी समूह इन कालीन को तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
आईकिया ने अपने लोकल कलेक्शन के लिए उत्तर प्रदेश के स्थानीय हैंडीक्राफ्ट बुनकरों को साथ लिया है। इस कलेक्शन में आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरह की बुनाई का सामंजस्य है।
इधर, इनमें अधिकांश महिला बुनकरों के समूह हैं। ये कुशन कवर और 100% ऊन के बने गलीचे तैयार करने में दक्ष हैं। कंपनी को उम्मीद है कि इस प्रयास से ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और महिला बुनकरों को स्वावलंबी बनने का अवसर भी मिलेगा।
दरअसल आईकिया ने देसी कलाकारी को वैश्विक बनाने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर देने के लिए भारत समेत कुछ अन्य देशों के स्थानीय कारीगरों के साथ भी करार किया है।
कंपनी ने दो साल पहले भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प से प्रभावित होकर इसे आधुनिक रूप में पेश करने का मन बनाया। इसके लिए कंपनी ने स्थानीय भारतीय कारीगरों, डिजाइनर और शिल्पकारों को अपने साथ जोड़ा और फिर इस नई रेंज को LOKALT नाम देकर दुनिया भर के आईकिया स्टोर्स में पिछले साल पेश कर दिया।
LOKALT एक स्वीडिश शब्द है जिसका अर्थ स्थानीय होता है। इस श्रेणी में फिलहाल भारतीय स्थानीय कारीगरों के अलावा जॉर्डन और थाईलैंड के कारीगरों को भी जोड़ा गया है। आईकिया के अधिकारी बताते हैं कि भारतीय कारीगरों द्वारा निर्मित कालीन और रंग की बिक्री अबतक काफ़ी सफल रही है। इसलिए भविष्य में भी यूपी के कारीगरों के साथ उनका नाता बना रहेगा।
आईकिया स्वीडन के मुताबिक कपड़ों और चीनी मिट्टी की चीजों पर पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प लोगों का ध्यान बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित करती है। यह छोटे उद्यमियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने कौशल प्रदर्शन का मौका भी दे रही है।
प्रत्येक कुशन कवर, गलीचा, टोकरी और कटोरों पर उकेरी गई कलाकृति भारतीय विविधता का अनूठा उदाहरण है। भारतीय कलाकारों के बनाए उत्पाद इस वक्त आईकिया के 25 अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक स्तर पर 294 स्टोरों में उपलब्ध हैं।
आपको बता दूं कि आईकिया साल 2013 से ही तमाम छोटे और मझोले शिल्पकारों के साथ मिलकर अपने उत्पादों को तैयार कर रहा है। अनुमानित तौर पर आईकिया के इस प्रयास से क़रीब 30 हजार शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को रोज़गार मिल सका है।
यही नहीं आईकिया ने एक भारतीय युवा डिज़ाइनर आकांक्षा देव को भी अपने नए कलेक्शन के लिए जोड़ा है ताकि बनाना फाइबर से नए तरह के लैंप शेड को तैयार किया जा सके। यह लैंप शेड कारखानों में बचे हुए उत्पादों (वेस्ट मैटेरियल) से तैयार हो रहे हैं। इसे जीरो वेस्ट मैनेजमेंट और नवीकरण की दिशा में कंपनी का अनूठा प्रयास भी माना जा सकता है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अनुसार, भारतीय हस्तशिल्प का निर्यात दुनिया के कई बड़े देशों में किया जाता है। शीर्ष 10 आयातक देशों में अमेरिका, यूके, यूएई, जर्मनी, फ्रांस, लैटिन अमेरिका के देश (एलएसी), इटली, नीदरलैंड, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।