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शिक्षक दिवस विशेष: पंछियों के संसार से बच्चों को कराएं परिचित, मिलेगा पुरस्कार

Sat, 02 Sep 2023 06:33 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sat, 02 Sep 2023 06:33 PM IST
सार

प्रकृति से परिचय की शुरुआत के लिए बर्डवॉचिंग (पक्षी अवलोकन) एक बेहद ही आसान जरिया है। बर्डवॉचिंग के माध्यम से बच्चों को पड़ोस के पार्क, स्कूल के प्रांगण या निकटवर्ती तालाब के पास खुले वातावरण में जाने का मौका मिलता है। पक्षी वह खिड़की हैं जिससे झांककर हम प्राकृतिक की विचित्र दुनिया के दर्शन कर सकते हैं।

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Teachers Day 2023 Role Of Teacher in environmental education Know About Nature Educators
Nature Educators - फोटो : Saumitra Deshmukh

विस्तार

गरिमा भाटिया व रमन कुमार

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गीता बेंगलुरु में विज्ञान पढ़ाती हैं, वे स्कूल के नेचर क्लब की संचालक भी हैं इसीलिए वे बच्चों को पक्षियों और प्रकृति के बारे में बताने का कोई मौका नहीं चूकतीं। यदि बच्चों को दबाव और क्षेत्रफल के बीच संबंध समझाना हो तो वे पक्षियों का यह उदहारण देती हैं कि किस प्रकार कुछ पक्षी पानी पर तैरते कमल के पत्तों पर सहजता से इसलिए चल सकते हैं क्योंकि उनके विशाल पैर उनके वजन को बड़े क्षेत्र पर विस्तृत करते हैं। गीता यह मानती हैं कि विज्ञान के सिद्धांतों को यदि कक्षा की चारदीवारी के बाहर प्राकृतिक वातावरण में व्यावहारिक उदाहरणों द्वारा समझाया जाए तो विषय में बच्चों की दिलचस्पी स्वतः बढ़ जाती है।

गीता जैसे शिक्षक यह सिद्ध करते हैं कि पाठ्यक्रम के दबाव के बावजूद बच्चों को प्रकृति से जोड़कर एक सार्थक और प्रेरणापूर्ण अनुभव देना संभव है। अनेक वैज्ञानिक शोधों से यह स्पष्ट है कि बचपन में प्रकृति से परिचय होना न केवल बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है बल्कि इससे बच्चों में एकाग्रता, अध्ययन क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलता है।  

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ज्यादातर लोगों का यह मानना है कि प्रकृति के दर्शन के लिए हमें जंगलों में ही जाना पड़ेगा, लेकिन असल में यह काम इतना मुश्किल नहीं है। वास्तव में प्रकृति कीट-पतंगों, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के रूप में हमारे आसपास निरंतर मौजूद है। प्रकृति से परिचय की शुरुआत के लिए बर्डवॉचिंग (पक्षी अवलोकन) एक बेहद ही आसान जरिया है।
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बर्डवॉचिंग के माध्यम से बच्चों को पड़ोस के पार्क, स्कूल के प्रांगण या निकटवर्ती तालाब के पास खुले वातावरण में जाने का मौका मिलता है। पक्षी वह खिड़की हैं जिससे झांककर हम प्राकृतिक की विचित्र दुनिया के दर्शन कर सकते हैं।
 

Teachers Day 2023 Role Of Teacher in environmental education Know About Nature Educators
Nature Educators - फोटो : Saumitra Deshmukh

बच्चों के साथ मिलकर पक्षियों के संसार से रूबरू होना सभी के लिए एक आनंदमय अनुभव हो सकता है। इस सफर को और भी दिलचस्प बनाने के लिए कुछ सुझाव हैं :
 

  • स्कूल के प्रांगण और इसके आसपास मौजूद पक्षियों के बारे में अपनी जागरूकता बढ़ाएं। इसमें आपकी सहायता के लिए हिन्दी सहित कई भाषाओँ में उपयुक्त पोस्टर, पहचान पुस्तिकाएं, आवाजो का परिचय, और पक्षियों पर आधारित वेबिनार आदि सामग्री उपलब्ध है। (early-bird.in/interactive)  
  • छोटे बच्चों को पक्षियों और पर्यावरण के बारे में जागरूक बनाने के लिए कहानियां एक अत्यंत कारगर माध्यम हैं। मसलन, स्टोरी वीवर (storyweaver.org.in) एक ऐसा ऑनलाइन मंच है जिसपर हजारों पुस्तकें मुफ्त उपलब्ध हैं। इनका उपयोग आप बच्चों के साथ कथावाचन के लिए कर सकते हैं।  
  • पर्यावरण शिक्षण हेतु कलात्मक अभ्यासों का प्रयोग बच्चों के लिए काफी असरदार सिद्ध हुआ है। यूट्यूब पर कई वीडियो उपलब्ध हैं (bit.ly/art-activities) जिनमें खासतौर पर बच्चों के लिए पक्षियों की चित्रकारी और अन्य अभ्यास सुझाए गए हैं।  
  • शिक्षण की प्रक्रिया को मजेदार बनाने के लिए ज्ञानवर्धक खेल एक बहुमूल्य साधन हैं। पर्यावरण शिक्षण के लिए खासतौर बच्चों के लिए विकसित अनेकों मजेदार खेल व सहज अभ्यास अर्ली बर्ड (early-bird.in/hindi) और (naturevidya.org) आदि वेबसाइट पर निःशुल्क उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल आप बच्चों में प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।  


यदि आपने बच्चों को पक्षियों से परिचय कराने के लिए कभी इन विधियों का उपयोग किया हो तो हमें (team@early-bird.in) पर जरूर ईमेल करें। सितंबर अंत तक भेजी गई श्रेष्ठ 3 प्रविष्टियों को “प्रकृति का पिटारा” नामक पर्यावरण शिक्षण सामग्री का सेट पुरस्कृत किया जाएगा।

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नोट: गरिमा भाटिया बेंगलुरु में रहने वाली एक बर्डवाचर और फोटोग्राफर हैं। वे "अर्ली बर्ड" नामक एक लाभ रहित कार्यक्रम का नेतृत्व करती हैं जिसका उद्देश्य बच्चों को पक्षियों के बारे में जागरूक करना है। रमन कुमार एक पक्षी वैज्ञानिक हैं जो देहरादून स्थित "नेचर साइंस इनिशिएटिव" से जुड़े हैं। यह संस्था पर्यावरण शिक्षण और संरक्षण पर काम कर रही है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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