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हम सबके राम: वनवासियों और वंचितों के नायक 'श्री राम'

faggan singh kulaste फग्गन सिंह कुलस्ते
Updated Sun, 21 Jan 2024 11:31 AM IST
सार

राम वनवासियों एंव वंचितों के नायक हैं। राम की सरलता ये है कि केवट से नदी पार करवाने हेतु याचना करते हैं और नदी पर करवाने पर कृतज्ञता भाव से उसे गले लगाते हैं। शबरी के जूठे बेर खाकर भाव विभोर हो जाते हैं। राम पहले नायक हैं जिन्होंने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर अखण्ड भारत के सम्पूर्ण दलितों एवं आदिवासियों को एकजुट किया।

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ram mandir pran pratishtha journy of shree ram
मां शबरी और राम - फोटो : Social media

विस्तार

प्रभु श्री राम हमारे भगवान, भारतीय संस्कृति के आधार पुरुष और मनुष्य को मर्यादित जीवन की सीख देने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। आज सिर्फ भारत नहीं पूरी दुनिया राममय है। हमारे राम, सबके राम और सबके दाता राम आ रहे हैं।

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होश संभालने से लेकर सार्वजनिक जीवन में जब-जब प्रभु श्री राम को समझने की कोशिश की है मुझे लगा कि श्री राम सबसे पहले वंचितों, दलितों और वनवासियों के राम हैं। निषाद राज से लेकर शबरी तक और किष्किंधा में वनवासियों तक सबका कल्याण अवध नरेश राम ही करते हैं।
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पिछले दिनों सूरत मे एक समारोह में मुझे इंडोनेशिया के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला देखने का सौभाग्य मिला। मुस्लिम कलाकारों द्वारा उत्कृष्ट प्रस्तुति देखकर मन मंत्रमुग्ध हो गया। चर्चा में कलाकारो ने बड़े गर्व से बताया कि राम हमारे आदर्श ही नहीं हमारे पूर्वज भी हैं। पूजा पद्धति बदलने से पुरखे नही बदलते और न ही सामाजिक-राष्ट्रीय प्रतिमान।
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राजनैतिक आक्रमण के साथ हुए सांस्कृतिक हमलों में इतिहास और संस्कृति भी नष्ट कर दी गई इसलिए साक्ष्य एकत्रित करना उन्हें वैज्ञानिक रूप से साबित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। सम्पूर्ण भारतीय प्रायद्वीप में श्री राम के प्रति श्रद्धाभाव देखा जा सकता है। कंबोडिया, बांग्लादेश, भूटान, बाली, सुमात्रा, थाईलैण्ड, मलेशिया, लाओस आदि देशों में प्रभु श्री राम वैसे से ही आराध्य है जैसे भारत, नेपाल पाकिस्तान और श्रीलंका में। 


वनवासियों-वंचितों के नायक राम

राम वनवासियों एंव वंचितों के नायक हैं। अयोध्या से वनगमन करते हुए उन्होंने कंटकाकीर्ण मार्ग चुना। राम की सरलता ये है कि केवट से नदी पार करवाने हेतु याचना करते हैं और नदी पर करवाने पर कृतज्ञता भाव से उसे गले लगाते हैं। शबरी के जूठे बेर खाकर भाव विभोर हो जाते हैं। राम पहले नायक हैं जिन्होंने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर अखण्ड भारत के सम्पूर्ण दलितों एवं आदिवासियों को एकजुट किया।

मतंग, केवट, शबरी ,सुग्रीव, जटायु वाल्मीकि, हनुमान, भारद्वाज वशिष्ट को वर्तमान व्यवस्था में दलित, आदिवासी उच्च और निम्न माना जाता है किन्तु राम सबके पिता सामान थे। आदिवासियों के नायक राम 14 वर्ष अहर्निश वन-भ्रमण कर वंचित जनजातीय समाज के बीच उन्हीं की तरह रहे। एक सर्वशक्तिमान राजपुत्र का यह आचरण ही उन्हें वंदनीय बनाता है। वो ऋषि अत्रि से मिलने सदूर दण्डकारण्य गये तो शबरी से मिलने वर्तमान गुजरात के आदिवासी क्षेत्र डांग भी गए।

वो किष्किंधा भी गए और चित्रकूट भी गए। इस बीच कितने ही राजा महराजा थे लेकिन राम वनवासियों को संगठित करते रहे। उन्होंने 14 साल के वनवास में कभी किसी राज सिंहासन से मदद नहीं ली। राम हमेशा वंचितों दलित और वनवासियों को एकजुट करके सबका कल्याण करते रहे। इन्हीं के सहयोग से कालजयी रावण का संहार किया। इसलिए राम वानवासियों के गीतो में हैं उनके कथानकों में हैं, उनके जीवन में हैं और उनके मन हैं।

राम के जीवन चरित्र में एक संदेश है कि नायक सभी वर्गो का होता है। समाज का कल्यणकर्ता होता है। राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं क्योकि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में विचलित हुए बिना सीमित संसाधनों से बड़े लक्ष्य को हासिल करना सिखाया।  मुझे गर्व है 40 वर्ष के सक्रिय राजनैतिक जीवन में मैंने उस दल में कार्य किया है जिसका लक्ष्य रामराज्य है। 

नहि दरिद्र, कोउ दुखी न दीना, 
नही, कोउ अबुध न लच्छन होना।
सब नर करहि परस्पर प्रीति
चलहि स्वधर्म, निरत श्रुति नीति।।


हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी मूलमंत्र को मानते हुए वंचित वर्ग के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन और सम्मान पूर्वक जीवन जीने के अधिकार को सुनिश्चित किया है। रावण से युद्ध में विजय का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए वनवासी-आदिवासियों बंधुओं के साथ भारत के दक्षिणी छोर में जाकर हमारे बड़ देव (महादेव) की स्थापना करने वाले मर्यादापुषोतम राम का उनकी जन्मभूमि में भव्य मंदिर बनना हम आदिवासियों के लिये किसी सपने पूरा के होने के समान है।




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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक लोकसभा के सदस्य और भारत सरकार में राज्यमंत्री हैं।आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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