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राज कपूर जयंती विशेष: भारत ही नहीं विदेशों में भी छाया रहा बॉलीवुड का शो मैन

Sun, 15 Dec 2024 05:08 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 15 Dec 2024 05:08 PM IST
सार

राज कपूर के काम की गुणवत्ता और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी फिल्म ‘आवारा’ और ‘श्री 420’  रूस में सिनेमाटोग्राफी प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम का हिस्सा रही हैं।  उनकी फिल्म तुर्की, फारसी, अरब भाषा में डब भी हुई है। 

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Raj Kapoor Indian actor and film director his movie and film career review
राज कपूर की जयंती - फोटो : इंस्टाग्राम

विस्तार

अभिनेता, निर्देशक, प्रोड्यूसर राज कपूर और उनकी फिल्मों की लोकप्रियता देश-विदेश में हैं। विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार उन्हें अपनी कालजई कृतियों में दर्ज करते हैं। मेरी बात का विश्वास नहीं है, तो 1970 नोबेल पुरस्कृत साहित्यकार अलेक्जेंडर सोल्जेनित्सिन की प्रसिद्ध रचना ‘कैंसर वार्ड’ के पेज नंबर 170 पर देख लीजिए, क्या कह रही है जोया? वह राज कपूर की फिल्म ‘आवारा’ का गाना गाती है।

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आगे ओलेग उससे यह गाना नहीं गाने को कहता है। पर ज़ोया ने इस फिल्म को चार बार देखा है। वह पूछती है, क्या यह एक वंडरफुल फिल्म नहीं है? वह ओलेग की तुलना ट्रैम्प (आवारा) से करती है। इस शोमैन ने न केवल भारत में वरन पूरे मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया तथा पूरी यूरोप दर्शकों का नजरिया फिल्म के प्रति परिवर्तित कर दिया। 
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‘आवारा’ फिल्म का गाना ‘आवारा हूं, आवारा हूं...’ अल्बानिया से लेकर बुल्गारिया, चीन तक में लोकप्रिय हुआ। ‘मेरा जूता है जापानी...’ न जाने किस-किस देश के युवा गाते रहे हैं। ऐसे प्रतिष्ठित एवं लोकप्रिय व्यक्ति की शताब्दी हम मना रहे हैं। जो ‘सो कॉल्ड’ बौद्धिक लोग लोकप्रिय बनाम कला सिनेमा का भेद करते हैं, उन्हें राज कपूर की फिल्में देखनी चाहिए, अगर देखी हैं तो फिर से देखनी चाहिए।
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दर्शक तो राज कपूर को सदा से सिर-आंखों पर बैठाते आए हैं। आज भी पुरानी पीढ़ी उनकी दवानी है। शताब्दी समारोह नई पीढ़ी को भी राज कपूर से परिचित कराएगा। उन्हें भी उनकी फिल्मों का, उनकी कला का चस्का लगेगा।

राज कपूर की लोकप्रियता

राज कपूर की लोकप्रियता के कई कारण हैं। उनकी सोच, उनके विचार में सदा आम आदमी वाला रहा। आम आदमी और उससे जुड़ा समाज उनके सिनेमा का केंद्र रहा है। मनुष्य की आशा-निराशा, हर्ष-विलाप, उसकी आकांक्षाएं काल और स्थान की सीमा के पार जाती हैं। वे मनुष्य की इन्हीं आशाओं-निराशाओं, हर्ष-विलाप, उसकी आकांक्षाओं को अपने सिनेमा में पिरोते हैं और वैश्विक सिनेमा का निर्माण करते हैं।

उनकी निर्देशित एवं उनके द्वारा अभिनीत फिल्में ‘श्री 420’, ‘जागते रहो’, ‘आग’, ‘बूट पॉलिश’, ‘आह’, ‘मेरा नाम जोकर’ कुछ ऐसी ही फिल्में हैं।

राज कपूर और उनकी फिल्मों  की लोकप्रियता का राज उनके व्यक्तित्व में था। फिल्म बनाना एक टीम वर्क है। राज कपूर की टीम उस समय की बेहतरीन टीम थी। फिल्म की सफलता का एक तत्व उचित अभिनेताओं का चुनाव करना है। वे सदैव पात्रानुकूल अभिनेताओं का चुनाव करते थे।

उदाहरण के लिए के. एन. सिंह, प्राण, प्रेम चोपड़ा को खलनायक की भूमिका हेतु चुनना। खुद उन्होंने कभी नकारात्मक भूमिका नहीं की। ख्वाजा अहमद अब्बास, ध्वन्यांकन करने वाले अल्लाउद्दीन, प्रोसेसिंग करने वाले अरुण भट्ट, मेकअप मैन माधव घई, गीतकार शैलेंद्र, संगीतकार द्वै शंकर-जयकिशन, गायक मुकेश, मोहम्मद रफी और मन्ना डे एवं लता मंगेशकर, कैमरामैन राधु करमाकर जैसे अपनी कला के जानकार उनकी टीम थे। सब उनसे लम्बे समय तक जुड़े रहे। उन्हें आदमी और उसकी प्रतिभा पहचानना आता था।

राज कपूर की बेहद काबिल टीम

उनकी टीम में एक-से-एक काबिल सदस्य थे। टीम बेहतरीन थी क्योंकि उन्हें टीम से काम लेना और टीम के साथ काम करना आता था। वे अपनी टीम के सदस्यों से भावात्मक रूप से जुड़े व्यक्ति थे। आर.के. स्टूडियो के सारे सदस्य एक परिवार की तरह अनुभव करते थे। मनाए जाने वाले गणपति उत्सव, होली समारोह, सदस्यों की फुटबाल टीम के चलते वे सब एक-दूसरे के बहुत करीब थे।

उनके काम की गुणवत्ता और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रूस में ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ फिल्में सिनेमाटोग्राफी प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम का हिस्सा रही हैं। देश-विदेश में ‘आवारा’ फिल्म एप्रिशियशन के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली फिल्म है। वे लोकप्रिय सिनेमा के साथ-साथ अर्थपूर्ण सिनेमा बनाते हैं।

लोकप्रियता की हद ऐसी है कि उनकी फिल्म तुर्की, फारसी, अरब भाषा में डब हुई। 

Raj Kapoor Indian actor and film director his movie and film career review
अभिनेता राज कपूर - फोटो : Twitter

राज कपूर का संगीत से जुड़ाव

इप्टा से जुड़े राज कपूर अपनी फिल्मों में कोरस गान का प्रयोग करते थे। उन्हें लोक की जानकारी थी, वे स्वयं संगीत से जुड़े हुए थे, कई वाद्य यंत्र बखूबी बजा सकते थे। उन्हें लोक गीत, वाद्यों का महत्व ज्ञात था। अपनी फिल्मों में उन्होंने गोआ के लोक गीत का प्रयोग ‘बॉबी’ में किया है। और-तो-और उन्होंने रूसी लोक गीत-संगीत का प्रयोग किया है। बिहार और पंजाब का लोक गीत उनके यहां मिलता है। इसी तरह उनकी फिल्मों में हम ढोलक, बांसुरी जैसे लोक वाद्य का प्रयोग देखते हैं। नाविक गीत और समूह में नाविकों को परदे पर गाते दिखा कर वे लोक (मास) से जुड़ते हैं। 

गरीबी में भी खुश रहते आम आदमी की छवि वे प्रस्तुत करते हैं। परदे पर उनकी शांत एवं मधुर आवाज सीधे दर्शक के दिल पर असर करता है। उनका दिल दर्शक के दिल से जुड़ा है, हम तुझसे मोहब्बत करके सनम...’ देखते हुए किस दर्शक की आंखें नम न हो जाएंगी।

वे समय और समाज की नब्ज पहचानते थे। समाजिक कथानक उनके दिल के करीब थे। गरीबी, बेरोजगारी, अन्याय, वर्ग जनित खाई को वे अपनी में पिरोते हैं। राष्ट्रीय एकता, देश प्रेम उनकी फिल्मों की कहानियों में नजर आता है। आज भी ये मुद्दे समाज में वर्तमान हैं, इसलिए राज कपूर की फिल्में समसामयिक हैं।

चार्ली चैपलिन बहुत लोकप्रिय निर्देशक और अभिनेता हैं। राज कपूर चार्ली चैपलिन के मुरीद थे। ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘मेरा नाम जोकर’ में खुद उन्होंने चार्ली की अभिनय शैली कई फिल्मों में अपनाई, पर अपनी छाप बरकरार रखी है। ‘सिटी लाइट’, ‘द किड’ के कई दृश्यों का हू-ब--हू प्रयोग उन्होंने अपनी फिल्मों में किया है। 

अगर वे गुजर नहीं जाते तो कई फिल्म की योजना उनके पास थी, वे ‘मैं और मेरा दोस्त’, ‘द हिन्दु’, ‘मेक अप उतारो’ जैसी और कई फिल्में निर्देशित करना चाहते थे।

उनकी लोकप्रियता का एक और उदाहरण है, राज कपूर को 1971 में भारत सरकार ने तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण पुरस्कार प्रदान किया। भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहले पिता-पुत्र हैं, यह जिन्हें दिया गया। राज कपर से पहले पृथ्वीराज कपूर को 1969 में यह मिला था। वैसे उनके भाई शशि कपूर को भी 2011 में यह सम्मान प्राप्त हुआ।

उनकी लोकप्रियता इस बात से भी आंकी जा सकती है कि 2013 में भारतीय सिनेमा के शताब्दी वर्ष में यू. के. की ईस्टर्न आई मैगजीन ने बॉलीवुड के महान अभिनेताओं में छठवें स्थान पर रखा था। 2001 में स्टार स्क्रीन अवार्ड्स के दौरान उन्हें ‘बेस्ट डयरेक्टर ऑफ द मिलेनियम’ का खिताब दिया।

अभी आने वाले समय में राज कपूर की लोकप्रियता और बढ़ेगी।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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