साहित्य नोबेल 2023: नॉरवेजियन पृष्ठभूमि, भाषा और प्रकृति में गुंथा ‘आज का इब्सन’ जिसे बहुत कम लोगों ने पढ़ा
जब पुरस्कार की सूचना उन्हें मिली वे ड्राइव कर रहे थे। नोबेल समिति के चेयरमैन एंडर्स ऑल्ससन के अनुसार फ़ॉसे का काम उनकी नॉरवेजियन पृष्ठभूमि, भाषा तथा प्रकृति में गुंथा हुआ है। 29 सितम्बर 1959 को नॉर्वे में जन्मे यॉन फ़ॉसे पर सैमुएल बेकेट, अगस्ट स्ट्रिंगबर्ग का प्रभाव दीखता है। इनकी तुलना इब्सन से करते हुए इन्हें ‘आज का इब्सन’ कहा जाता है।
जब पुरस्कार की सूचना उन्हें मिली वे ड्राइव कर रहे थे। नोबेल समिति के चेयरमैन एंडर्स ऑल्ससन के अनुसार फ़ॉसे का काम उनकी नॉरवेजियन पृष्ठभूमि, भाषा तथा प्रकृति में गुंथा हुआ है। 29 सितम्बर 1959 को नॉर्वे में जन्मे यॉन फ़ॉसे पर सैमुएल बेकेट, अगस्ट स्ट्रिंगबर्ग का प्रभाव दीखता है। इनकी तुलना इब्सन से करते हुए इन्हें ‘आज का इब्सन’ कहा जाता है।
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विस्तार
इस बार का साहित्य का नोबेल पुरस्कार (2023) नॉर्वेजियन लेखक यॉन फॉसे को ‘अनकही को आवाज देने वाले उनके नवोन्वेषी नाटकों और गद्य के लिए दिया गया है।’ नॉर्वे के वे चौथे लेखक हैं, जिन्हें यह महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
यॉन फॉसे से पूर्व बियोन्सटन बियोन्सन (1903), क्नूत हाम्सुन (1920), सिग्रिड अन्डसेट (1928)को नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
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पुरस्कार प्राप्ति के समय यॉन फॉसे नॉर्वे में थे। नॉर्वेजियन योनोर्स्क (Nynorsk) भाषा में लिखने वाले यॉन फ़ॉसे को 2011 में नॉर्वेजियन राज्य की ओर से ओस्लो के सिटी सेंटर में रॉयल पैलेस के परिसर में आजीवन घर मिला हुआ है। यह उन्हें ग्रोटन (Grotten) सम्मान के अंतर्गत प्राप्त हुआ है। यह नॉर्वे के राजा द्वारा नॉर्वेजियन कला तथा संस्कृति ने योगदान हेतु प्रदान किया जाता है।
क्नूत हाम्सुन (1859–1952) की एक रचना का ‘भूख’ नाम से तेजी ग्रोवर ने हिन्दी में अनुवाद किया है, जो वाणी प्रकाशन से निकला है, तथा सिग्रिड अन्डसेट (1882–1949) के समग्र कार्य पर विजय शर्मा ने लिखा है जो ‘स्त्री, साहित्य और नोबेल पुरस्कार’ पुस्तक में संकलित है, जिसे भारतीय ज्ञानपीठ ने प्रकाशित किया है और जिसका दूसरा संस्करण बाजार में आ चुका है।
यॉन फ़ॉसे को 2023 का नोबेल पुरस्कार मिला है, उनके एक कार्य का अनुवाद तेजी ग्रोवर ने 2016 में ‘आग के पास आलिस है यह’ नाम से किया है जो वाणी प्रकाशन से आया है। मैंने अनुवाद नहीं पढ़ा है शायद यह ‘आलिस एट द फ़ायर’ का अनुवाद है।
जब पुरस्कार की घोषणा हुई वे ड्राइव कर रहे थे-
जब पुरस्कार की सूचना उन्हें मिली वे ड्राइव कर रहे थे। घोषणा के तत्काल बाद टेलिफोन इंटरव्यू में उन्होंने मनीषा को बताया कि वे बहुत खुश हैं। जब वे घर लौटे, बधाई के सैंकड़ों ई-मेल उनका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एक ई-मेल बहुत टचिंग था। एक यूनानी पाठिका के अनुसार वह उनके काम के कारण ही जीवित है। यदि उनके नाटक न पढ़ती तो उसने आत्महत्या कर ली होती।
दरअसल, यह किसी लेखक केलिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उनको पढ़ने की शुरुआत करने केलिए उन्होंने अपने उपन्यास ‘मॉर्निंग एंड नाइट’ का नाम लिया। मगर मुझे यह उपन्यास ‘मॉर्निंग एंड इवनिंग’ नाम से मिला है, जिसका अनुवाद डैमिओन सीर्ल्स ने किया है, उन्होंने उनके कई अन्य कार्य का भी अनुवाद किया है। जब वे लिखते हैं, वे किसी और दुनिया में होते हैं। लिखना प्रारंभ करने वालों के लिए उनका संदेश था कि वे अपनी भाषा में लिखीं, किसी अन्य की नकल में नहीं।
नार्वेजियन समाज अपने इस लेखक के सम्मान में प्रतिवर्ष साहित्यिक आयोजन करता है। कई बार नॉर्वे की यात्रा कर चुके प्रसिद्ध साहित्य-कला मर्मज्ञ प्रयाग शुक्ल जी ने देखा कि वहां इनके लिए हर साल साहित्य-उत्सव होता है, जिसमें इनके नाटकों का मंचन किया जाता है तथा इनकी कविताओं का पाठ होता है। पहले वे खूब कविताएं लिख रहे थे।
हालांकि, नोबेल समिति ने केवल नाटकों तथा गद्य शब्द का उल्लेख किया है। ‘कलैक्टेड पोएम्स’ नाम से उनका एक काव्य संग्रह है, जिसमें ‘एंजेल विद वाटरी आईज’, ‘द मोवमेंट्स ऑफ़ द डॉग’, ‘डॉगएंड एंजेल’, ‘आईज इन द विन्ड’ तथा ‘नई कविताएँ’ शामिल हैं। इकॉनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार यॉन फ़ॉसे न्यूनतमवाद के मास्टर हैं। इस पुरस्कार में उन्हें 11 मिलियन क्रोनॉर की राशि प्राप्त हुई है।दुनिया में उनके नाटकों के हजारों मंचन हो चुके हैं और उनके गद्य को भी पहचान मिली है।
नोबेल की घोषणा के पूर्व जब अनुमान लगाते हुए मैंने अमर उजाला में एक आलेख लिखा था, तो उसमें बरसों से अनुमान लगाने और कई बार सही होने वाले एलैक्स शेफ़र्ड का हवाले दिया था और उनकी इस साल की अनुमानित लिस्ट में यॉन फ़ॉसे का नाम था। और तभी मैंने इस लेखक पर ध्यान देना प्रारंभ किया था। इनकी कुछ किताबें–‘मेलन्कॉली 1-2’, ‘आई एम द विन्ड’, ‘एलिस एट द फ़ायर’, ‘सीन्स फ़्रॉम ए चाइल्डहुड’ आदि मेरी लाइब्रेरी में हैं।
ये हैं किताबों के नाम-
इनकी इंग्लिश में प्राप्त अन्य किताबों के नाम, ‘द गर्ल ऑन द सोफ़ा’, ‘नाइटसॉन्ग्स’, ‘प्लेज वन, टू, थ्री, फ़ोर, फ़ाइव, सिक्स’, ‘द डेड डॉग्स’, मॉर्निंग एंड एवेनिंग’, ‘बोटहाउस’, ‘सेप्टोलॉजी शृंखला’, एन एंजेल वॉक्सथ्रू द स्टेज: एंड अदर एसेज’, ‘ए शाइनिंग’ हैं। उन्होंने कविताओं के अलावा करीब 40 नाटक, कहानियां, लेख तथा बच्चों केलिए लिखा है। यॉन फ़ॉसे ने अनुवाद कार्य भी किया है। नॉर्वेजियन में बाइबिल के पुनरानुवाद केलिए वे लिटरेरी कन्सल्टेंट भी थे। उनके अपने कार्य का 50 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
नोबेल समिति के चेयरमैन एंडर्स ऑल्ससन के अनुसार फ़ॉसे का काम उनकी नॉरवेजियन पृष्ठभूमि, भाषा तथा प्रकृति में गुंथा हुआ है। 29 सितम्बर 1959 को नॉर्वे में जन्मे यॉन फ़ॉसे पर सैमुएल बेकेट, अगस्ट स्ट्रिंगबर्ग का प्रभाव दीखता है। इनकी तुलना इब्सन से करते हुए इन्हें ‘आज का इब्सन’ कहा जाता है।
1983 में उनका पहला उपन्यास‘रेड, ब्लैक’आया मगर उनके अनुसार छात्र अखबार में प्रकाशित उनकी कहानी ‘ही’ से उनके साहित्यिक जीवन का प्रारंभ हुआ। ‘रेड, ब्लैक’ कई समय तथा कई दृष्टिकोण में आवाजाही करता है। 2014 में उनकी उपन्यासिका ‘वेयरीनेस’ प्रकाशित हुई है। जब वे अच्छा लिख रहे होते हैं, तो उन्हें स्पष्ट लगता है कि जो मैं लिख रहा हूं, वह लिखा जा चुका है। वह है, उसे गायब होने से पहले उन्हें इसे लिख डालना है।
प्रयाग शुक्ल जी जब ओस्लो के नॉर्वेजियन लेखक संघकी इमारत में गए तो उन्होंने देखा कि वहां कैफ़े है, और किताब की दुकान में यॉने फ़ॉसे की किताबे शेल्फ़ में करीने से सजी हुई थीं। वह इलाका बहुत शांत और हरा-भरा है, वहीं पास में यह लेखक रहता है। नोबेल के अलावा यॉन फ़ॉसे को तमाम बड़े पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वैसे एक सर्वे की मानें तो उन्हें महज 7% लोगों ने ही पढ़ा है, 92% लोगों ने नहीं पढ़ा है।
अमेरिका में वे कम पढ़े गए थे, लेकिन अब खूब पढ़े जाएंगे। नोबेल पुरस्कार का एक लाभ यह भी है, यह पाठकों की संख्या में वृद्धि करता है। वे ‘नाइटसॉन्ग्स’ में कहते हैं, ‘क्या आप खुश हो सकते हैं, जब आप नाखुश हैं।’ अब उनके पास नाखुश होने के अधिक कारण नहीं होंगे। उन्होंने खुद भी कहा है, नोबेल पुरस्कार पा कर वे खुश हैं।
नोबेल पुरस्कार मिलने पर उन्हें बधाई..!
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