कश्मीर के युवाओं पर बढ़ता वहाबी प्रभाव सबसे बड़ी चुनौती : सत्यपाल मलिक
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कश्मीर के नौजवानों का सबसे भरोसा टूट चुका है। न उन्हें राजनीतिक दलों पर भरोसा है, न आतंकवादियों पर, न अलगाववादी हुरिर्यत पर न पाकिस्तान पर और न ही हिंदुस्तान पर। वह एसे अंधे मोड़ पर खड़े हैं जहां से उन्हें कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। 13 से 20 साल की उम्र के कश्मीरी युवा हर तरफ निराश हैं। उन पर सऊदी अरब के वहाबी इस्लामी कट्टरपंथ का प्रभाव बढ़ रहा है। सऊदी से कट्टरपंथी मौलवी आ रहे हैं। नई और तमाम सुविधाओं से संपन्न मस्जिदें बन गई हैं, जिनमें हमाम हैं, वातानुकूलित इमारते हैं। अंग्रेजी में कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार किया जा रहा है। यह सबसे बड़ा खतरा है और सबसे बड़ी चुनौती इन किशोरों और युवाओं को इससे निकालकर सही रास्ते पर लाने की है। यह बात जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही।
मलिक ने कहा कि इससे प्रभावशाली तरीके से निपटने के लिए कश्मीरी युवाओं को खेल, शिक्षा, मनोरंजन, फिल्म, संस्कृति, पर्यटन आदि की गतिविधियों से जोड़कर उनके लिए जीवन में आनंद, उल्लास और कैरियर के नए रास्ते खोलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वहाबी कट्टरपंथ से युवाओं को दूर करने के काम में बरेलवी मुस्लिम मौलाना खासे मददगार साबित हो रहे हैं। मलिक का कहना है कि राज्यपाल शासन होने की वजह से उनकी यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि राज्य में सुशासन, शांति और विकास को सुनिश्चित किया जाए और वह इस काम को करने में जुटे हुए हैं।
आतंकवाद के खिलाफ राज्य पुलिस सबसे आगे
आतंकवादियों द्वारा राज्य के तीन पुलिस वालों की अगवा करके उनकी हत्या के बाद कुछ पुलिस कर्मियों के इस्तीफे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मलिक ने इस बात से इंकार किया कि इस तरह की घटनाओं से कश्मीर में राज्य पुलिस का मनोबल कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे है और केंद्रीय सुरक्षा बलों को पूरा सहयोग कर रही है।
राज्यपाल ने कहा कि एसी घटनाएं प्रशासन और पुलिस को कमजोर नहीं कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों ने पिछले एक पखवाड़े में कई कुख्यात आतंकवादियों को मारने में कामयाबी हासिल की है। इससे आतंकवादी और सीमा पार बैठे उनके सरपरस्त बौखलाकर ऐसी शर्मनाक हरकतें कर रहे हैं।
राजनीतिक राज्यपाल की नियुक्ति बेहद सही फैसला
जम्मू कश्मीर में कर्ण सिंह के बाद दशकों बाद एक राजनीतिक व्यक्ति को राज्यपाल बनाने के फैसले को बेहद समझदारी भरा फैसला बताते हुए राज्यपाल मलिक कहते हैं कि उन्होंने श्रीनगर जाकर महसूस किया कि सूबे के लोगों की सबसे बड़ी जरूरत है कि वह अपनी बात शासन के शीर्ष स्तर तक पहुंचा सकें। राजभवन उनके लिए हर वक्त खुला रहे। सरकार तक उनकी पहुंच हो।
राजनीतिक व्यक्ति की आदत होती है लोगों से मेल मुलाकात करते रहना और सबकी बात सुनना । मैने इस प्रक्रिया को जाते ही शुरू कर दिया। राजभवन के दरवाजे सबके लिए खुल गए हैं। सबकी बात सुनता हूं। रात के दो बजे भी अगर कोई व्हाट्सएप पर भी अपनी समस्या या शिकायत भेजता है तो उसका संज्ञान लेकर उस पर कार्रवाई करता हूं। कोई भी प्रतिनिधि मंडल बिना समय लेकर भी मुझसे जब चाहे तब आकर मिल सकता है। मलिक कहते हैं कि उन्होंने जनता और सरकार के बीच जो संवादहीनता थी,उसे खत्म किया है, जनता के साथ संवाद स्थापित किया और लोगों को यह अहसास करा दिया कि यह राजभवन और शासन उनका है। हम तो यहां काम करने आए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी राजनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि का यहां लाभ मिल रहा है।
स्थानीय चुनावों का बहिष्कार नेंका और पीडीपी का सियासी पाखंड
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव में पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियों द्वारा बहिष्कार को लेकर सत्यपाल मलिक का कहना है कि उन्होंने दोनों दलों के नेताओं से इस मुद्दे पर बात की। इस मामल में ये दोनों दल सियासी पाखंड कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कारगिल में हुए स्थानीय चुनावों में हिस्सा लिया। अनुच्छेद 35 ए का मुद्दा तो तब भी था और अभी इस मुद्दे को लेकर कोई फर्क तो नहीं पड़ा।
मलिक कहते हैं कि दरअसल राज्य की ये दोनों पार्टियां अगले विधानसभा चुनावों के लिए अपनी जमीन तैयार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव समय पर होंगे और इन दलों के स्थानीय नेता बिना अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह के चुनाव लड़ेंगे, क्योंकि कोई भी अपनी राजनीतिक जमीन नहीं छोड़ना चाहता है। राज्यपाल ने कहा कि चार दल कांग्रेस, भाजपा, रालोद, जद(यू) तो चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए इनके बहिष्कार का कोई असर नहीं पड़ेगा।
बातचीत का फैसला केंद्र सरकार लेगी
कश्मीर में अमन बहाली के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत के दायरे में बातचीत की नीति पर अमल करते हुए क्या वह राज्य में विभिन्न वर्गों, गुटों और लोगों से बातचीत की प्रक्रिया शुरु करेंगे, इस सवाल के जवाब में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि यह केंद्र सरकार को तय करना है। उनके पास एक सीमित जिम्मेदारी है और वह है राज्य में शांति, सुशासन और विकास को आगे बढ़ाना। मेरा पूरा ध्यान उसी पर है। बातचीत किससे और कब हो यह नीति और फैसला भारत सरकार करेगी। यह पूछने पर कि क्या राज्य में फिर से कोई निर्वाचित सरकार बनाने की कोशिश होगी, मलिक ने साफ कहा कि चोर दरवाजे से सरकार बनाने की न कोशिश है और न होगी।
अपने कहे पर अमल भी करें इमरान खान
पाकिस्तान में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने और भारत से दोस्ताना रिश्तों का संकेत देने का जम्मू कश्मीर के हालात पर क्या फर्क पड़ेगा, के जवाब में मलिक ने साफ कहा कि इमरान खान अगर अपने कहे पर ईमानदारी से अमल करेंगे तो जरूर फर्क पड़ेगा और अगर कथनी करनी में अंतर रहा तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि कश्मीर में सारी समस्या की जड़ तो पाकिस्तान ही है। मलिक ने कहा कि हुर्रियत जैसे संगठनों का अब कोई असर युवाओं पर नहीं है। राज्यपाल ने भरोसा जताया कि उन्हें अपनी कोशिशों में जरूर कामयाबी मिलेगी और सूबे के युवा सही रास्ते पर लौटेंगे।