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स्वतंत्रता दिवस 2020: भारत की बहादुर बेटियां जिन्होंने वीरता से लड़ी आजादी की जंग

Sat, 15 Aug 2020 06:14 AM IST
Dr.Naaz Parveen डॉ. नाज परवीन
Updated Sat, 15 Aug 2020 06:14 AM IST
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indian independence day 2020 74th swatantrata diwas women freedom fighters of india importance significance role of women in independence
भारत की वीरांगनाओं का त्याग और बलिदान इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज है - फोटो : social media

निसंदेह भारत की आधी आबादी, भारत की वीरांगनाओं के त्याग और बलिदान इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। उनकी बल- बुद्धि, साहस और शौर्य की कहानियां आज भी अमिट  छाप छोड़ती हैं। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में आधी आबादी की भूमिका सर्वोपरी है। भारत की आजादी की वीरांगनाओं ने देश के हर हिस्से से पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दिया।

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किसी ने फांसी के फंदे को गले का आभूषण बनाया, किसी ने सीने में गोली खाकर, किसी ने उम्रकैद हंंस के गुजारी तो किसी ने जहर खाकर ब्रिटिश हुकूमत के हाथ ना आने का वादा निभाया। जब-जब क्रांति की मशाल ब्रिटिश हुकूमत ने ठंडी करनी चाही, भारत की वीरांगनाओं ने आगे बढ़कर उस मशाल को न सिर्फ थामा, अपितु उसे देश के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाई। 
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आज हम 21वीं सदी में तरक्की के कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं और लगातार कर भी रहे हैं, लेकिन आज भी आए दिन ऐसी खबरें अखबारों की हेडलाइन बनती हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चियों की सपनों की उड़ान भरने से पहले ही उनके पंख काट दिए जाते हैं।
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महिलाएं अपना भविष्य तलाशने और अनिवार्य शिक्षा हासिल करने जैसे कई सवालों में अभी भी कई बार हाशिये पर नजर आती हैं। अपने सपने पूरे करने के लिए अभी भी उन्हें कई सीमाएं पार करनी पड़ती हैं, कई बेड़ियां तोड़ने पड़ती हैं, तब जाकर वे अपने सपनों को जी पाती हैं। अपने सपनों को उड़ान दे पाती हैं।

कितना मुश्किल रहा होगा? 18वीं-19वीं सदी का वह दौर जब महिलाओं ने घर की लक्ष्मण रेखा पार करके, जंग-ए-आजादी में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। उस दौर में महिलाओं की हक की बात कम ही हो पाती थी, लेकिन तब भी इन महिलाओं ने देश की सुरक्षा और आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लिया।

इतिहास की कहानियों में ऐसी अनगिनत महिलाएं हैं जिनका जिक्र इतिहास के पन्नों में दर्ज ही नहीं हो पाया। भारत की बहादुर बेटियों ने आजादी की हर लड़ाई में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर अपना दायित्व बखूबी निभाया। कर्नाटक की "रानी चेन्नम्मा" उन शासकों में थीं,जिन्होंने स्वतंत्रता के शुरुआती दौर में ब्रिटिश हुकूमत के दांत खट्टे किए और लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।

भारत की आजादी में ना सिर्फ देश, अपितु विदेशी महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया...

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सन् 1857 की क्रांति में "महारानी लक्ष्मीबाई" का योगदान इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा गया - फोटो : social media

सन् 1857 की क्रांति में "महारानी लक्ष्मीबाई" का योगदान इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा गया। आज भी रानी लक्ष्मीबाई देश की बहादुर महिलाओं की आदर्श हैं।

उन्होंने सन् 1857 की क्रांति में महिलाओं को घूंघट और घर की चारदीवारी से बाहर लाकर देश की सुरक्षा की कमान सौंपी। उन्हें न सिर्फ युद्ध कौशल में पारंगत् किया बल्कि शेरनी की तरह दहाड़ना भी सिखाया।

अंग्रेजों के विरुद्ध सीमित साधनों में विशाल महिला सेना तैयार करना, वह भी हर तरह के युद्ध में पारंगत उस दौर में आसान काम नहीं था। जिस सेना ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए।

सन् 1857 में अवध की कमान संभालती "बेगम हजरत महल", अवध की बुलंद आवाज बनी। "बेगम जीनत महल" ने भी आजादी की जंग में बढ़- चढ़कर हिस्सा लिया और समाज में नई नजीर पेश की।

भारत की आजादी में ना सिर्फ देश, अपितु विदेशी महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिनका शरीर विदेशी था लेकिन आत्मा भारत के लिए जिंदा थी। एनी बेसेंट, सिस्टर निवेदिता (मार्गेट नोबल), मेडलिन स्लेड (मीरा बहन) जैसी कई महिलाओं ने भारत की आजादी में अहम रोल अदा किया।

स्वतंत्रता आंदोलन में समाज के हर तबके की महिलाओं ने अपनी दहलीज पार करके भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई। मैडम भीकाजी कामा, कस्तूरबा गांधी, सरोजिनी नायडू, कमला नेहरू, अरूणा आसिफ अली, विजय लक्ष्मी पंडित, दुर्गाबाई देशमुख, डॉक्टर लक्ष्मी सहगल, सुचेता कृपलानी, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, अनुसुइया बाई काले, राजकुमारी अमृत कौर, कनकलता बरूआ, रेहाना तय्यब, कल्पना दत्त, नोनी बाला देवी, प्रीति लता वाडेकर, जिन्होंने पोटेशियम साइनाइड खाकर अंग्रेजों के हाथ ना आने का अपना वादा पूरा किया।

आजादी की इन वीरांगनाओं में कई नाम ऐसे भी हैं जो इतिहास में कभी दर्ज ही नहीं हो पाए। लेकिन इतिहास कभी मिटता नहीं है। जब भी भारत की स्वतंत्रता का संघर्ष याद किया जाएगा, भारत की इन बहादुर बेटियों के बलिदानों को गर्व से याद किया जाएगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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