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क्या अंतरिक्ष में उम्र तेजी से बढ़ती है: रहस्य की पड़ताल कर रहे वैज्ञानिक, 'एक्सिओम-2’ मिशन से क्या पता लगा?
Wed, 23 Sep 2026 10:58 AM IST
ज्योति भास्कर
सामंथा जोन्स
सामंथा जोन्स
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 23 Sep 2026 10:58 AM IST
सार
अंतरिक्ष में बिताए कुछ हफ्ते शरीर पर वही असर डाल सकते हैं, जो पृथ्वी पर वर्षों में दिखते हैं। वैज्ञानिक अब इस रहस्य की पड़ताल कर रहे हैं। ‘एक्सिओम-2’ मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों में अंतरिक्ष प्रवास के दौरान जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार तेज हुई, जो पृथ्वी पर लौटकर फिर धीमी हो गई।
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अंतरिक्ष से जुड़े शोध कर रहे वैज्ञानिक
- फोटो : Freepik
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर कदम रखते ही मानव शरीर में कुछ ऐसे नाटकीय बदलाव शुरू होते हैं, जो पृथ्वी पर वृद्धावस्था के लक्षणों से हूबहू मेल खाते हैं। दिलचस्प यह है कि घर लौटते ही इनमें से कई समस्याएं कुछ महीनों में गायब हो जाती हैं, जबकि कुछ का असर लंबे समय तक बना रहता है।
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दरअसल, आईएसएस पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्री कम गुरुत्वाकर्षण, नींद में बदलाव और शरीर पर पड़ने वाले अन्य असामान्य दबावों के बीच काम करते हैं। इन परिस्थितियों के बीच जो जैविक परिवर्तन जमीन पर दशकों में होते हैं, वे अंतरिक्ष में महज चंद हफ्तों में हो जाते हैं।
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एक शोध में ‘एक्सिओम-2’ मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों के जैविक संकेतकों की पड़ताल की गई। उनके डीएनए में हुए रासायनिक बदलावों से स्पष्ट हुआ कि अंतरिक्ष में उनकी जैविक उम्र की रफ्तार अचानक बढ़ गई थी, जो धरती पर लौटते ही फिर से घटने लगी।
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पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण मांसपेशियों व हृदय सहित शरीर की कई प्रणालियों पर यांत्रिक दबाव डालता है, जो अंतरिक्ष में काफी कम हो जाता है। इसी कारण अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियों का द्रव्यमान व ताकत तेजी से घटती है। यह स्थिति उम्र बढ़ने के साथ होने वाली मांसपेशियों की कमजोरी की याद दिलाती है, पर वैज्ञानिक अभी यह निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि दोनों प्रक्रियाएं पूरी तरह समान हैं।
इसी पहेली का जवाब तलाशने के लिए ‘माइक्रो-एज’ मिशन के तहत मानव कोशिकाओं से बने चावल के दाने जितने सूक्ष्म ऊतक आईएसएस भेजे गए। इसका मकसद कम गुरुत्वाकर्षण और प्राकृतिक वृद्धावस्था के बीच मांसपेशियों के बदलावों की तुलना करना था। अब वैज्ञानिकों की नजर ‘माइक्रोएज-2’ अभियान पर है, जिसमें माइटोकॉन्ड्रिया पर ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया की मांसपेशियों के कामकाज में अहम भूमिका होती है।
यह शोध न केवल वृद्धावस्था की आणविक प्रक्रियाओं को तेजी से समझने का मौका दे रहा है, बल्कि उम्र से जुड़ी बीमारियों के नए इलाज खोजने की राह भी खोल रहा है।
-साथ में ऐन मैकआर्डल (द कन्वर्सेशन)