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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: प्रसिद्ध सिनेमाटोग्राफर नताशा ब्रायर
सार
जब वे किशोरी थीं, उनके माता-पिता बहुत सम्पन्न न थे। ऑन्ट से कैमरा तो मिल गया था, मगर वह जमाना रील का था, और रील खरीदने में पैसे लगते थे, जो उनके लिए आसान न था। हर बार वे सोच-समझ कर बहुत कम फोटोग्राफ लेती थीं।
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सिनेमा की दुनिया
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
अर्जेंटीना में 11 दिसम्बर 1974 को पैदा हुई नताशा ब्रायर प्रसिद्ध सिनेमाटोग्राफर हैं। वे 2016 से ‘मोशन सिनेमाटोग्राफर की सम्मानित संस्था ‘पिक्चर आर्ट्स तथा साइंसेस की अकादमी’ की सदस्य हैं। अर्जेंटीना के बुएनोस एरिस में उनके माता-पिता मनोचिकित्सक थे। वहीं उन्होंने अपनी स्कूली एवं डॉन्स जी शिक्षा प्रारंभ की।
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कुछ समय बाद परिवार यूरोप चला गया, अत: नताशा ने स्पेन एवं इंग्लैंड में आगे की पढ़ाई की। उन्होंने लंदन के नेशनल फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल से अपनी डिग्री प्राप्त की। फिर वे कैलिफोर्निया लॉस के एंजेल्स जाकर फिल्म उद्योग में कार्यरत हो गईं।
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एक साक्षात्कार के दौरान वे दर्शकों से अपने शुरुआती दिन, आर्थिक संघर्ष, बार-बार तत्काल लिए अपने निर्णय की बात साझा करती है। कैसे उन्होंने अपने जुनून को बनाए रखा, यह जानना रोचक और प्रेरणादायक है।
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शुरुआती दिनों के संघर्ष
जब वे बहुत छोटी थीं, उन्होंने अपनी ऑन्ट से कैमरा उधार लिया। उनकी ऑन्ट के पास सिम्पल रिफ्लेक्स कैमरा था। इसी का उपयोग उन्होंने प्रारंभ में किया। बचपन से वे स्टिल फोटोग्राफी में रूचि रखती थीं। वे श्वेत/श्याम फोटोग्राफी करतीं और प्रोसेसिंग भी स्वयं करतीं। जब वे अर्जेंटीना में हाई स्कूल में थीं, वहां कला के रूप में स्टिल फोटोग्राफी का चलन था।
उनके साथ के सब लोग उनसे उम्र में एकाध साल बड़े थे। उम्र में वे लोग बड़े थे, तो उनमें से कई लोग फिल्म स्कूल जाने लगे। उन लोगों से ही नताशा को पता चला सिनेमाटोग्राफी नाम से कुछ होता है, उनका ध्यान इसकी ओर गया। सोचने लगीं, वे फैशन फोटोग्राफी द्वारा जीवन यापन करेंगीं, साथ ही स्टिल फोटोग्राफी का अपना शौक पूरा करेंगीं।
इसके बाद एक-के-बाद एक बातें होती गईं और वे इस मुकाम तक पहुंचीं, जहां उन्हें प्रतिष्ठित संस्थान ने अपना सदस्य बना लिया। सिनेमाटोग्राफी द्वारा वे दूसरों साथ मिल कर लोगों की कहानियां कहेंगीं, उन्हें ये बात बहुत अच्छी लगी। उनके परिवार में कोई फिल्म से नहीं जुड़ा था। वे कलात्मकता और क्राफ्ट के द्वारा कुछ सृजित कर सकती हैं, उन्हें यह बात मजेदार लगी।
उन्हें डॉर्करूम में फिल्म प्रोसेसिंग का कार्य भी अच्छा लगता है, जहां वे चित्रकला की भांति तरह-तरह से चीजों को परिवर्तित कर सकती हैं। उन्हें डॉर्करूम में काम करने का नशा है, वहां क्रेयान से काम करना अच्छा लगता था।
जब वे किशोरी थीं, उनके माता-पिता बहुत सम्पन्न न थे। ऑन्ट से कैमरा तो मिल गया था, मगर वह जमाना रील का था, और रील खरीदने में पैसे लगते थे, जो उनके लिए आसान न था। हर बार वे सोच-समझ कर बहुत कम फोटोग्राफ लेती थीं। डॉर्करूम काम केलिए भी पैसे लगते थे, निगेटिव का प्रिंट केलिए कागज, केमिकल चाहिए होता है। उन दिनों अर्जेंटीना में फोटोग्राफी का अपना कागज नहीं बनता था, यह बाहर से आयात किया जाता था। अत: मंहगा होता था। उन दिनों फोटोग्राफी का शौक बहुत मंहगा शौक था।
जब आप किसी प्रोडक्शन कंपनी के साथ सिनेमाटोग्राफार काम करते हैं, तो वे लोग सारे उपकरण आपको मुहैय्या कराते हैं, जब उन्हें यह भी पता चला, वे बहुत राहत से भर गईं। इसका मतलब है, इस तरह के काम में कैमरा, फिल्म स्टॉक, फिल्म डेवेलपमेंट और सहायक आदि का इंतजाम, यानि आर्थिक जिम्मा किसी और का होता है। किसी जुनूनी केलिए इससे बढ़िया क्या हो सकता है, बिना रकम की चिंता के अपना काम कर पाना। इसलिए भी उन्होंने इस दिशा में काम करने का विचार किया।
अत: तय किया, हाई स्कूल समाप्त करने के बाद वे फिल्म अध्ययन करेंगी। उनके पिता मनोवैज्ञानिक होने के साथ इस विषय पर लिखते भी थे, उनकी किताबों से प्रभावित हो उन्हें उन्हें स्पेन से प्रोजेक्ट और पढ़ाने का बुलाया आया। वे सपरिवार वहां जा सकते थे। नताशा के स्कूल समाप्त करते ही पंद्रह दिन के भीतर वे लोग स्पेन चले गए। मगर यह बदलाव नताशा केलिए आसान न था।
ऐसा होना किशोरी नताशा के लिए स्थान परिवर्तन कर किसी नई जगह जाकर रहना किसी हादसे से कम न था, क्योंकि हाल ही में उनका पहला ब्यॉयफ्रेंड बना था। साथ ही फोटोग्राफी स्कूल के उनके सारे दोस्त छूट गए थे। उनके लिए यह सब बड़ा तकलीफदेह था।
एक और कठिनाई थी, स्पेन में फिल्म स्कूल प्रवेश के लिए जो क्वालिफिकेशन चाहिए उसके लिए उन्हें एक और साल की पढ़ाई करनी जरूरी थी। वे इसमें लग गईं, परन्तु गर्मियों में वे अपने ब्यॉयफ्रेंड से मिलने अर्जेंटीना गईं। वहां जाकर उन्हें लगा वे स्पेन में नहीं रहना चाहती हैं।
उन्होंने एक पत्रिका (नॉटिकस न्यूज) में काम करना शुरु कर लिया। वहां वे मैगजीन के फोटोग्राफर एडिटर की सचिव का काम करने लगीं। वहां दिन-रात काम कर रही थीं, माता-पिता को उनका निर्णय समझ में नहीं आ रहा था। फिर वे लंदन में फिल्म अध्ययन केलिए चली गईं। उसके बाद उनकी जिंदगी बदल गई।
उन्होंने अब तक 64 कार्यों केलिए सिनेमाटोग्राफी की है, जिसमें फीचर फिल्म, म्युजिक वीडियो तथा टीवी का काम शामिल है। उन्हें 4 पुरस्कार प्राप्त हैं। वैसे पुरस्कार और गुणवत्ता का संबंध कितना होता है, बताना मुश्किल है। हां, पुरस्कार ध्यान खींचते हैं। सिनेमाटोग्राफार नताशा ब्रायर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। अपनी मेहनत से वे इस मुकाम तक पहुची हैं, जहां वे मन मुताबिक प्रयोग कर सकती हैं, नए-से-नए कैमरे के साथ खेल सकती हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।