फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

आखिर कैसे होगा पृथ्वी का अंत: गैस और धूल के विशाल बादलों से बनी धरती, जीवन समाप्ति के बाद सूर्य इसे निगल जाएगा

Tue, 18 Mar 2025 05:23 AM IST
ज्योति भास्कर शीचुन हुआंग, द कन्वर्सेशन
शीचुन हुआंग, द कन्वर्सेशन Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 18 Mar 2025 05:23 AM IST
सार

पृथ्वी की अपेक्षा मानव का इतिहास बहुत छोटा है। 4.6 अरब वर्ष पहले अंतरिक्ष में गैस और धूल के विशाल बादलों से हमारे ग्रह का निर्माण हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की तपिश से धीरे-धीरे पृथ्वी का वातावरण इतना गर्म हो जाएगा कि एक अरब वर्ष बाद यहां जीवन तो दूर महासागरों में पानी भी नहीं बचेगा।

विज्ञापन
How will the Earth made of huge clouds of gas and dust end Sun will swallow it after life ends on this planet
अंतरिक्ष (प्रतीकात्मक) - फोटो : फ्रीपिक

हर वह चीज जिसकी शुरुआत होती है, उसका अंत भी होता है। पृथ्वी के साथ भी यही होगा, लेकिन विज्ञान की मानें तो फिलहाल पृथ्वी पर कोई संकट नहीं है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, पृथ्वी का अंत इस पर मौजूद अंतिम जीवित प्राणी के खत्म होने के भी अरबों वर्ष बाद होगा। कैलिफोर्निया के पांच वर्षीय बच्चे सोलोमन ने मुझसे सवाल किया कि क्या पृथ्वी हमेशा रहेगी? पृथ्वी और ग्रह वैज्ञानिक होने के नाते मैंने उससे कहा कि हमें अपने ग्रह के भविष्य से पहले इसके इतिहास को जान लेना ठीक होगा कि यहां जीवन कब आया। 



ऑक्सीजन नहीं थी, तो फिर यह पृथ्वी पर आई कैसे?
पृथ्वी की अपेक्षा मानव का इतिहास बहुत छोटा है। करीब 4.6 अरब वर्ष पहले अंतरिक्ष में गैस और धूल के विशाल बादलों से हमारे ग्रह का निर्माण हुआ, जिसे नेबुला कहते हैं। संभवतया 4.4 अरब वर्ष पहले पृथ्वी की सतह पर पहले महाद्वीप का निर्माण हुआ होगा। वर्तमान में पृथ्वी पर करीब 21 फीसदी ऑक्सीजन है, परंतु इसके निर्माण के वक्त ऑक्सीजन नहीं थी। यदि उस वक्त इन्सान पृथ्वी पर होता, तो उसका जीवन मुश्किल हो जाता है, क्योंकि मनुष्य समेत अनेक जीवों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सवाल यह है कि तब ऑक्सीजन नहीं थी, तो फिर यह पृथ्वी पर आई कैसे?

How will the Earth made of huge clouds of gas and dust end Sun will swallow it after life ends on this planet
धरती से जुड़े कई वैज्ञानिक तथ्यों पर शीचुन हुआंग ने डाला प्रकाश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
पृथ्वी पर पहला प्राणी समुद्री स्पंज था, 66 करोड़ वर्ष पहले दिखा था
वैज्ञानिकों का मानना है कि वायुमंडल में करीब 2.4 अरब वर्ष पहले ऑक्सीजन का आना शुरू हुआ था, जिसे महान ऑक्सीकरण घटना कहते हैं। पृथ्वी की सतह पर पहले से ही बहुत छोटे-छोटे सूक्ष्मजीव मौजूद थे। उनमें से कुछ ने सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा उत्पन्न करने की क्षमता विकसित की, जिस तरह से आज पौधे करते हैं। ऐसा करते समय उन्होंने ऑक्सीजन छोड़ी और यह वायुमंडल में जमा हो गई तथा अधिक जटिल जीवन रूपों के विकास को संभव बनाया। इस प्रक्रिया में काफी लंबा वक्त लगा। संभवतया पृथ्वी पर पहला प्राणी समुद्री स्पंज था, जो करीब 66 करोड़ वर्ष पहले दिखा था।

हमारी पृथ्वी एक आग का गोला बन जाएगी और सूर्य उसे निगल जाएगा
माना जाता है कि इन्सान सबसे पहले अफ्रीका में दो से बीस लाख वर्ष पहले जन्मे, जो बाद में हर जगह फैल गए। अब पृथ्वी के भविष्य पर बात करते हैं। इन्सान समेत अन्य जीव और पादप अपने जीवन के लिए सूर्य से ऊर्जा ग्रहण करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की तपिश से धीरे-धीरे पृथ्वी का वातावरण इतना गर्म हो जाएगा कि एक अरब वर्ष बाद यहां जीवन, तो दूर महासागरों में पानी भी नहीं बचेगा। एक मनुष्य का औसत जीवन काल करीब 73 वर्ष का होता है। करीब चार से पांच अरब वर्ष बाद हमारी पृथ्वी एक आग का गोला बन जाएगी और सूर्य उसे निगल जाएगा।
-द कन्वर्सेशन से
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed