टैक्सी ड्राइवर, वह लड़की और शर्मिंदा होती उस शहर की एक शाम
घटना कोलकाता की है। टीवी अभिनेत्री अपनी शूटिंग पूरी कर घर लौट रहीं थी। उसने जानी-पहचानी कंपनी से टैक्सी मंगवाई। पर, उसे क्या पता था कि उसके लिए यह टैक्सी मुसीबत का कारण बनने वाली है। पहले तो ड्राइवर ने सामने वाला कार का शीशा ऐसे एडजस्ट किया कि वह कार चलाते हुए उस युवती का चेहरा निरंतर देखता रहे। जबकि यह शीशा पीछे आने वाली गाड़ी की रफ्तार देखने और उससे बचने के लिए होता है।
युवती इस तरह लगातार घूरे जाने से परेशान होने लगी। ड्राइवर ने अपनी हरकतें और बढ़ा दीं। वह अश्लील और भद्दे कमेंट्स करने लगा। युवती के पास कोई विकल्प नहीं था। सुनसान सड़क और सड़क पर लाइट्स भी बहुत कम थी, लेकिन, ड्राइवर को तो जैसे नशा चढ़ा हुआ था।
एक हाथ से गाड़ी को चलाता हुआ वह दूसरे हाथ से युवती को स्पर्श करने की कोशिश करने लगा। उसके भद्दे कमेंट्स भी साथ ही साथ जारी थे। युवती ने जैसे ही एक दो दुकानों में रोशनी देखी और उन्हें खुला देखा तो उसने टैक्सी ड्राइवर को टैक्सी धीमी करने के लिए कहा। पता नहीं किस सद्बुद्धि से उसने गति धीमी कर दी। जैसे ही गति धीमी हुई वह युवती टैक्सी से उतर गई। उसने तुरंत मोबाइल से ड्राइवर व टैक्सी नंबर को क्लिक कर लिया। वह घर कैसे सुरक्षित पहुंची उस बात को जाने दें।
अगली सुबह उसने कार कंपनी को फोन किया तो उन्होंने बहुत ही सहजता से कहा- हम ड्राइवर को समझा देंगे। आजकल ड्राइवर मिलते कहां हैं? उससे हम सख्ती नहीं कर सकते। पर, युवती ने पुलिस थाने में भी रिपोर्ट की। पता नहीं पुलिस थाने से उसे कैसे सहयोग मिल गया। गाड़ी नंबर के कारण कंपनी में ड्राइवर ट्रेस हो गया। युवती ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि पुलिस ने उससे अच्छी खासी पूछताछ की है।
क्या यह पहली घटना है? बेंगलुरु में इससे पहले एक नहीं बल्कि दो-तीन घटनाएं हो चुकी हैं। उस समय इन घटनाओँ की बहुत विस्तृत खबरें बनी थीं। एक युवती का तो रेप हो गया था तो दूसरी ने चलती टैक्सी से छलांग लगा ली थी। उसे गंभीर चोटें आईं थीं और इसी कारण उसकी अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। जोर-जबरदस्ती की घटना में तो युवती की हत्या भी कर दी गई थी।
दरअसल, यह बहुत भयानक और दर्दनाक घटनाएं हैं जो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाते हैं। महिला सशक्तीकरण की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए सभी यह भूल जाते हैं कि अब महिलाओं को किसी भी समय आने-जाने की सुविधा तथा उनकी सुरक्षा की व्यवस्था भी अब तक नहीं हो पाई, तब ऐसे में महिलाओं को सशक्त करने की बातें बहुत सतही लगती हैं।
आज बहुत बड़ी संख्या में महिलाएं कामकाजी हैं। वह घर से निकलकर अब किसी कार्य को करने की जिम्मेदारी निभाती हैं तब देर सबेर हो सकती है। यूं भी कुछ व्यवसाय ऐसे हैं जहां नाइट शिफ्ट करनी होती है। अस्पतालों तथा कई पंच तथा तीन सितारा होटलों में कई युवतियां कार्यरत हैं।
टीवी का माध्यम भी आजकल बहुत लोकप्रिय है। उसके सीरियल की शूटिंग में भी लंबा समय लग जाता है। ऐेसे में युवतियों और महिलाओं को आवागमन की सुविधा और साधन उपलब्ध होना चाहिए। सार्वजनिक वाहन भी देर रात तक नहीं चलते। तब उस समस्या का समाधान क्या हो?
वैसे तो निजी कंपनियों द्वारा उपलब्ध करवाए गए वाहनों की गारंटी होनी ही चाहिए कि वह पूर्णत: सुरक्षित होंगे। नहीं तो इनकी व्यवस्था करने का मतलब ही क्या है। दूसरा यदि किसी कंपनी के एक भी वाहन के चालक द्वारा ऐसा दुर्व्यवहार किया जाता है तो उस कंपनी का संचालन तुरंत बंद किया जाना चाहिए। सार्वजनिक वाहन अधिक से अधिक संख्या में उपलब्ध हों। सड़क पर यदि महिला सुरक्षित होगी तभी वह एक मुक्त व सशक्त महिला होगी।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।