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हाथरस भगदड़: आखिर कैसे इतने बड़ेे हो जाते हैं ये बाबा?

Fri, 05 Jul 2024 12:59 PM IST
Akshay Sharma अक्षय शर्मा
Updated Fri, 05 Jul 2024 12:59 PM IST
सार

हाथरस की घटना से भारत के राजनीतिक दलों को सीख लेनी चाहिए और इन बाबाओं पर भी इसी तरह नजर रखनी चाहिए। 

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Hathras Stampede: Political Support For Fake Babas In Indian Society And Agenda Of Vote Politics of Leaders
साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari

विस्तार

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ थाने के फुलरई गांव में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने हर किसी को यह सोचने को मजबूर कर दिया कि इंसान इस कदर अंधभक्त हो सकता है। एक स्वयंभू बाबा के अंधभक्तों ने बाबा की चरण रज सिर माथे लगाने के चक्कर में 121 लोगों ने अपनी जान गंवा दी।

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दरअसल, जो कुछ भी हाथरस में हुआ और उसके बाद अब जो भी हो रहा है यह पूरा देश देख रहा है। मौत का सत्संग करने वाले बाबा को इस घटना के लिए जिम्मेदार तक नहीं ठहराया जा रहा। पुलिस और प्रशासन इस सत्संग कांड में बाबा पर हाथ डालने से बचता दिख रहा है। 
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खास बात यह है कि अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए राजनीतिक दल सब कुछ करने के लिए तैयार रहते हैं। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसका दूरगामी परिणाम क्या होना है। उन्हें मतलब है तो सिर्फ अपने चुनाव से, उसके लिए वो किसी से भी हाथ मिलाने के लिए तैयार खड़े रहते हैं। खासतौर से बाबाओं की चरण वंदना करने में किसी भी दल के नेता पीछे नहीं रहते। क्योंकि वहां से इनको बड़ा वोट बैंक मिलता है, इसी कारण कभी भी समय रहते इन धर्म के दुश्मनों पर आसानी से कोई एक्शन नहीं होता।

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दरअसल, एक्शन होता भी है तो तब जब ये एक ऐसे बड़े वर्ग को प्रभावित कर चुके होते हैं। जो इनके लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं। भारत के राजनीतिक दलों को सीख लेनी चाहिए हाथरस की घटना से और इन बाबाओं पर भी इसी तरह नजर रखनी चाहिए जिस तरह देश के दुश्मनों पर, बड़े भ्रष्टाचारियों पर या बड़े अपराधियों पर रखी जाती है। 


ऐसा कहने के पीछे एक लंबी लिस्ट है, जो बाबा अभी जेलो में अपनी सजा काट रहे हैं उन सबकी चरण वंदना भी हमारे नेता कर चुके हैं। हर पार्टी में इस तरह के लोग भरे पड़े हैं, जो इन बाबाओं के सामने अपना सिर झुकाते हैं, वोट बैंक के लिए इनके चरणों में गिर जाते हैं। आसाराम, राम रहीम, संत रामपाल, स्वामी नित्यानंद, निर्मल बाबा जैसे बाबा इनके सटीक उदाहरण हैं। बड़े से बड़ा नेता इनके आगे-पीछे घूमता था। 

हाथरस कांड में बाबा को जिस तरह बचाया जा रहा है वह ठीक नहीं है। कोई भी इस तरह का आयोजन बिना किसी की परमिशन के होना संभव नहीं था और अगर बाबा इतने ही अच्छे हैं, तो उन्होंने समय रहते अपने भक्तों के बीच पहुंचकर हालात क्यों नहीं देखे?

आखिर कहां गायब हैं बाबा तमाम सवाल सामने हैं, पर जवाब किसी के पास नहीं। क्योंकि हमारा राजनीतिक सिस्टम तो बाबाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सपोर्ट करता है। काश ये बात हमारे नेताओं को भी समझ आए, वो भी मानव को मानव की तरह देखें ना कि सिर्फ वोटर की तरह।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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