{"_id":"5bb74fad867a551292698817","slug":"food-blog-lazania-have-come-from-a-great-distance","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वादगली: बड़ी दूर से लेकर आए हैं ‘लजानिया’","category":{"title":"Blog","title_hn":"ब्लॉग","slug":"blog"}}
स्वादगली: बड़ी दूर से लेकर आए हैं ‘लजानिया’
पुष्पेश पंत
Updated Fri, 05 Oct 2018 05:19 PM IST
विज्ञापन
लजानिया
हमारे लिए इतालवी खाना मतलब सिर्फ पिज्जा और स्पैगेटी है, लेकिन उनके किचन की शान बढ़ाता लजानिया भी स्वाद से भरपूर होता है। तरह-तरह की सब्जियों और चीज से बना लजानिया अब भारतीय रेस्तरां में भी खूब मिलने लगा है।
विज्ञापन
हिंदुस्तानियों के लिए इतालवी खाने का मतलब है पिज्जा। इससे अधिक हुआ तो स्पैगेटी। पिज्जा, राह चलते भूख मिटाने का गरीब परवर नुस्खा है, जिसकी शक्ल पराठे या तंदूरी रोटी के ऊपर रखी चटपटी सब्जियों या मांसाहारी लुकमों वाले व्यंजन जैसी होती है।
विज्ञापन
वास्तव में इतालवी और भारतीय भोजन में बहुत सारी समानताएं हैं। इसका कारण कुछ तो जलवायु की समानता है और कुछ साधनों का अभाव। उत्तरी यूरोप के संपन्न देशों की तरह इतालवी खाने में मांस की प्रचुरता कम होती है और आटे या मैदे की अधिक। आटे से बनी स्पैगेटी, रेवियोली और मैक्रोनी को वहां पास्ता कहा जाता है।
विज्ञापन
लजानिया भी पास्ता का ही एक स्वरूप है। मैदे के आटे को गूंथने के बाद बेलकर उसकी पतली परत बनाई जाती है। फिर इन परतों को जरा चौड़ी कतरनों में काट लेते हैं। इसके बाद एक बड़े से बर्तन में पहले एक परत बिछाकर उस पर पके हुए मसालेदार कीमे की एक तह बिछाई जाती है, फिर पास्ता की दूसरी परत रख उस पर घर पर बने ताजे टमाटर के सॉस की तह बिछाई जाती है।
जिसके ऊपर पास्ता की एक और परत और फिर उसके ऊपर बेहतरीन चीज को कद्दूकस कर मन माफिक मात्रा में छिड़का जाता है। इसके बाद इस बर्तन को एक ओवन में रखकर बेक (पकाया) किया जाता है। यह खासा गरिष्ठ व्यंजन है और खानपान के इतिहासकारों का मानना है कि इसका स्रोत यूनानी मुसाका है।
यह सोचना गलत होगा कि लजानिया सिर्फ मांसाहारी ही होता है। कम से कम भारतीय भोजन भट्टों के लिए समर्थ खाना बनाने वालों ने पालक, हरी सब्जियों और धूप में सुखाए टमाटरों और खुंभ की मदद से बहुत स्वादिष्ट लजानिया तैयार किए हैं।
थोड़ी-सी ही मेहनत से आप घर में इसका आनंद ले सकते हैं। जो चीजें साधारण लजानिया को विशेष बनाती है, वह छोटी-छोटी भले ही नजर आती हों, लेकिन महत्वपूर्ण हैं। ध्यान में रखने लायक यह है कि बेले हुए मैदे की परत बहुत मोटी नहीं होनी चाहिए। दो परतों के बीच भरी सामग्री मसालेदार होनी चाहिए।
अच्छे लजानिया में ऊपर से सॉस या बुरकने वाले मसाले की जरूरत नहीं होनी चाहिए। कीमा या टमाटर सॉस को पकाते वक्त काली मिर्च और सूखी जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है, जैसे बेसिल, रोजमेरी थाइम, मिंट ओरगेनो वगैरह। नाम सुनकर परेशान होनी की जरूरत नहीं, इनमें से कई तो भारत में आसानी से उपलब्ध हैं, जैसे मीठी तुलसी, बन अजवाइन, पुदीना आदि।
आप अपनी पसंद के अनुसार इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं। हां, यह जरूर है कि भारत में उतने प्रकार का चीज या पनीर नहीं मिलता, जितना इटली में सुलभ है, पर आजकल भारत में भी तीन-चार तरह की प्रोसेस चीज चेदार, गौड़ा, इडम, कालीपोंग आदि छोटे-बड़े शहरों में मिलने लगी है। अन्य भूमध्यसागरीय देशों के खाने की तरह इटली के खाने में भी जैतून का तेल काफी लोकप्रिय है। इसे न केवल स्वादिष्ट बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद समझा जाता है।
यदि कीमा, पालक, खुंभ या टमाटर पकाते वक्त आप इसका इस्तेमाल करें, तो आपका लजानिया बिल्कुल इतालवी लगने लगेगा। लजानिया की एक खासियत यह है कि यदि आपने मेहमानों को दावत दे रखी हो, तो इसे पहले से बनाकर तैयार रख सकते हैं और हल्का-सा गरम करने के बाद एक नायाब व्यंजन की तरह परोस सकते हैं।
आमतौर पर लजानिया को उसी बर्तन में परोसा जाता है, जिसमें इसे पकाया गया हो। कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि रोमन काल में जिस बर्तन में लजान्या पकाया जाता था, उसी के नाम के आधार पर इसका नामकरण लजानिया हुआ।