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इस उम्र में अक्सर ऐसा होता है: याददाश्त कमजोर की समस्या, कैसे रखें बुजुर्गों को सुरक्षित और स्वस्थ
Fri, 01 May 2026 08:13 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 01 May 2026 08:13 AM IST
सार
मेरी मां चीजें भूलने लगी हैं, जो उम्र बढ़ने पर स्वाभाविक है। वह घर पर अकेली होती हैं। ऐसे में, मैं उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करूं? अपनी मां की भूलने की समस्या से चिंतित बरेली के अवधेश को मनोवैज्ञानिक नीलकंठ ने कुछ यों सलाह दी :
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बुजुर्ग
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
यह वाकई गंभीर चिंता की बात है। जिन बुजुर्गों पर हमने अपनी पूरी जिंदगी भरोसा किया है, उन्हें इस तरह बेबस और असहाय हालत में देखना बहुत ही दुखी और परेशान करने वाला होता है। उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाले संज्ञानात्मक परिवर्तनों का उदाहरण है। विशेष रूप से ताजा बातें याद नहीं रहना कुछ ज्यादा ही गंभीर और चिंताजनक है। लेकिन अपने मस्तिष्क को स्वस्थ और उच्च कार्यक्षमता वाला बनाए रखा जा सकता है।
भूलने की आदत हर इन्सान में अलग-अलग होती है। याददाश्त का कमजोर होना डिमेंशिया या यहां तक कि डिप्रेशन (अवसाद) का भी शुरुआती संकेत हो सकता है। माता जी को जीवनशैली में बदलाव लाने, मानसिक रूप से सक्रिय रहने, नियमित व्यायाम (सप्ताह में 150 मिनट) करने और पौष्टिक आहार (फल, मेवे आदि) लेने के लिए प्रेरित करें। मस्तिष्क को व्यस्त रखने के लिए पहेलियां सुलझाना, नई चीजें सीखना और नियमित सामाजिक मेलजोल बढ़ाना लाभप्रद हो सकता है। उन्हें पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) लेने के लिए कहें और तनावमुक्त रहने के लिए योगाभ्यास करने की सलाह दें।
घर पर अकेली रहने वाली अपनी मां की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आप कुछ खास सावधानीपूर्ण कदम उठा सकते हैं। सबसे पहले आप कोई ऐसा देखभाल करने वाला व्यक्ति (केयरटेकर) खोजें, जो हमेशा उनके साथ रह सके, ताकि वह पूरे दिन घर पर अकेली न रहें। लेकिन देखभाल करने के लिए केयरटेकर रखना भी आजकल चुनौतीपू्र्ण हो गया है। इसलिए, देखभाल करने वाले व्यक्ति को किसी जाने-माने सुविधा केंद्र से या उचित पुलिस सत्यापन के बाद ही रखना चाहिए। अगर, कोई परिचित एवं भरोसेमंद व्यक्ति उनकी देखभाल करने के लिए साथ में रह सके, तो और बेहतर होगा।
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दूसरा, रसोई का दरवाजा बंद रखें, या हो सके तो उसमें ताला लगा दें। असल में, अपनी मां को रसोई का इस्तेमाल न या तब करने के लिए कहें, जब कोई व्यक्ति उनके साथ हो। अगर वह खाना बनाने की जिद करती हैं, तो देखभाल करने वाले व्यक्ति को उन पर नजर रखने के लिए हिदायत दे दें। याददाश्त की कमी दैनिक कार्यों में भी बाधा डालती है, लोग जगहें भूलने लगते हैं, या भ्रम की स्थिति बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में योग्य चिकित्सक की सलाह जरूरी है।
माता जी की याददाश्त कमजोर होने के मामले में भी किसी जनरल फिजिशियन (योग्य चिकित्सक) से सलाह लेना बेहतर होगा। जनरल फिजिशियन को ही तय करने दें कि माता जी को किसी न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करवाने की जरूरत है या नहीं।
हो सकता है डॉक्टर ऐसा करने का सुझाव दें, क्योंकि कुछ मामलों में, याददाश्त कमजोर होने की वजह जानने के लिए मस्तिष्क की एमआरआई जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
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भूलने की आदत हर इन्सान में अलग-अलग होती है। याददाश्त का कमजोर होना डिमेंशिया या यहां तक कि डिप्रेशन (अवसाद) का भी शुरुआती संकेत हो सकता है। माता जी को जीवनशैली में बदलाव लाने, मानसिक रूप से सक्रिय रहने, नियमित व्यायाम (सप्ताह में 150 मिनट) करने और पौष्टिक आहार (फल, मेवे आदि) लेने के लिए प्रेरित करें। मस्तिष्क को व्यस्त रखने के लिए पहेलियां सुलझाना, नई चीजें सीखना और नियमित सामाजिक मेलजोल बढ़ाना लाभप्रद हो सकता है। उन्हें पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) लेने के लिए कहें और तनावमुक्त रहने के लिए योगाभ्यास करने की सलाह दें।
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घर पर अकेली रहने वाली अपनी मां की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आप कुछ खास सावधानीपूर्ण कदम उठा सकते हैं। सबसे पहले आप कोई ऐसा देखभाल करने वाला व्यक्ति (केयरटेकर) खोजें, जो हमेशा उनके साथ रह सके, ताकि वह पूरे दिन घर पर अकेली न रहें। लेकिन देखभाल करने के लिए केयरटेकर रखना भी आजकल चुनौतीपू्र्ण हो गया है। इसलिए, देखभाल करने वाले व्यक्ति को किसी जाने-माने सुविधा केंद्र से या उचित पुलिस सत्यापन के बाद ही रखना चाहिए। अगर, कोई परिचित एवं भरोसेमंद व्यक्ति उनकी देखभाल करने के लिए साथ में रह सके, तो और बेहतर होगा।
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दूसरा, रसोई का दरवाजा बंद रखें, या हो सके तो उसमें ताला लगा दें। असल में, अपनी मां को रसोई का इस्तेमाल न या तब करने के लिए कहें, जब कोई व्यक्ति उनके साथ हो। अगर वह खाना बनाने की जिद करती हैं, तो देखभाल करने वाले व्यक्ति को उन पर नजर रखने के लिए हिदायत दे दें। याददाश्त की कमी दैनिक कार्यों में भी बाधा डालती है, लोग जगहें भूलने लगते हैं, या भ्रम की स्थिति बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में योग्य चिकित्सक की सलाह जरूरी है।
माता जी की याददाश्त कमजोर होने के मामले में भी किसी जनरल फिजिशियन (योग्य चिकित्सक) से सलाह लेना बेहतर होगा। जनरल फिजिशियन को ही तय करने दें कि माता जी को किसी न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करवाने की जरूरत है या नहीं।
हो सकता है डॉक्टर ऐसा करने का सुझाव दें, क्योंकि कुछ मामलों में, याददाश्त कमजोर होने की वजह जानने के लिए मस्तिष्क की एमआरआई जांच करवाने की सलाह दी जाती है।