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डॉ. अब्दुल कलाम जयंती विशेष: विकसित भारत के स्वप्न दृष्टा अब्दुल कलाम साहब

Mon, 14 Oct 2024 10:44 AM IST
Dr.Naaz Parveen डॉ. नाज परवीन
Updated Mon, 14 Oct 2024 10:44 AM IST
सार

भारत के कलाम साहब यकीनन विकसित भारत के स्वप्न दृष्टा के रूप में काबिज हैं। उनका सपना भारत को आत्मनिर्भर बनाने का था। जिसे उन्होंने शिद्दत से पूरा करने का प्रयास भी किया। वो एक बेहतरीन शिक्षक, श्रेष्ठ वैज्ञानिक, सादगी पसन्द जनता के राष्टृपति, एक आसाधारण व्यक्तित्व वाली शख्सियत के तौर पर विश्वविख्यात हैं।

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doctor Abdul Kalam the dreamer of developed India
तमिलनाडु के रामेश्वरम् में जैनुलआबिदीन और आशिअम्मा के घर 15 अक्टूबर 1931 को कलाम साहब का जन्म हुआ। - फोटो : PTI

विस्तार

21वीं सदी की बड़ी उपलब्धि भारत की लगातार बढ़ती अर्थव्यवस्था है। जो विश्व में अपनी बढ़त बनाने में कामयाब हो रही है। विकसित भारत के बुनियादी शिल्पकारों में से एक शिल्पी भारत के कलाम साहब भी है। जिन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनते हुए देखने का सपना संजोया था। वो भारतवर्ष के उन चुनिंदा सपूतों में से हैं जिन्होंने भारत को दुनिया के समक्ष सीमित साधनों के साथ कामयाबी का पर्याय बनाया। जिन्होंने असंभावनाओं को आने वाली सम्भावनाओं में तबदील किया।

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विरले ही होते हैं ऐसे लोग जो स्वयं से पूर्व राष्टृ को रखते हैं। भारत की बेमिसाल शख़्सियत थे, भारत के अब्दुल कलाम साहब जिन्होंने भारत की युवा पीढ़ी को खुली आंखों से सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया। वो स्वयं भी ऐसे ही सकारात्मक विचारों से ओत-पोत रहते थे। बचपन में पंक्षियों को आकाश में उड़ते देख आसमानों में परवाज़ होने की ख्वाहिश ने उन्हें संसार के क्षितिज पर परवाज करने का सफर तय कराया।
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भारत के कलाम साहब यकीनन विकसित भारत के स्वप्न दृष्टा के रूप में काबिज हैं। उनका सपना भारत को आत्मनिर्भर बनाने का था। जिसे उन्होंने शिद्दत से पूरा करने का प्रयास भी किया। वो एक बेहतरीन शिक्षक, श्रेष्ठ वैज्ञानिक, सादगी पसन्द जनता के राष्टृपति, एक आसाधारण व्यक्तित्व वाली शख्सियत के तौर पर विश्वविख्यात हैं। बहुत कम व्यक्ति होते हैं जिन्हें लोगों के दिलों में शासन करने का मौका मिलता है। कलाम साहब उन महान शख्सियतों में से हैं जिन्हें समस्त हिन्दुस्तानियों ने अपने दिलों में बसाया।
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तमिलनाडु के रामेश्वरम् में जैनुलआबिदीन और आशिअम्मा के घर 15 अक्टूबर 1931 को कलाम साहब का जन्म हुआ। उनके पिता पेशे से एक नाविक और मां एक गृहिणी थीं। माता-पिता निहायत ही संजीदा और अमन पसन्द लोगों में शुमार थे। जिसका प्रभाव कलाम साहब पर दिखाई देता है। कलाम साहब का जन्म उस दौर में हुआ जब भारत स्वतंत्रता के संद्यर्षो में घिरा हुआ था। भारत गुलाम था। कलाम साहब का बचपन उस दौर की यादों से भी गुजरा जब भारत में साइंस और तकनीकी जादू की दुनिया से कम न थी।

फिर भी उन्होंने अपने सपनों को सकारात्मकता की उड़ान दी। दुनिया को यह यकीन करने में मजबूर कर दिया कि वो दिन भी आएगा जब भारत विज्ञान और तकनीकी की दुनिया में पहली पंक्ति में खड़ा होकर दुनिया की आखों में आखें डाल विकास की उड़ान भरेगा। वो अकसर कहते थे, कि ’सपने वे नहीं होते, जो आपको रात में सोते समय नींद में आए बल्कि सपने वे होते हैं, जो रात में सोने ही न दें।’ उनके सकारात्मक विचार भारत के युवाओं में जोश भरने का काम करते हैं। वो आज भी युवाओं के सबसे पसन्दीदा अध्यापक हैं। उनका छात्रों के साथ बेहद लगाव था। उनके जन्मदिन को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उनका मानना था कि यदि किसी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त होना है और खूबसूरत दिमाग वाले लोगों से भरना है तो समाज में तीन ऐसे लोग हैं, जो ऐसा कर सकते हैं। वे हैं माता-पिता और अध्यापक सम्भवतः इसीलिए वो सबसे खुश एक अध्यापक के तौर पर नज़र आए। अपने जीवन के अन्तिम क्षण में भी वे शिलांग के छात्रों में उत्साह भरने का काम कर रहे थे। छात्रों और शिक्षा के प्रति डॉ. कलाम साहब के प्रयासों को सम्मान देने के लिए उनके 79वें जन्मदिवस पर संयुक्त राष्टृ संगठन ने उनके जन्मदिन को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तब से निरन्तर दुनिया कलाम साहब के जन्मदिन को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाती है।

27 जुलाई सन् 2015 को उनका शरीर भौतिक रूप से हमारे मध्य न रहा लेकिन आज भी प्रत्येक होनहार संद्यर्षशील छात्र के तरक्की पसन्द विचारों में कलाम साहब देखे जा सकते हैं। वे छात्रों के सबसे पसन्दीदा अध्यापक, मेण्टोर, मोटीवेटर के रूप में आज भी मौजूद हैंै। विश्व छात्र दिवस का उददेश्य, दुनियाभर के छात्रों को शिक्षा के महत्व से परिचित कराना है ताकि शिक्षा के मौलिक अधिकारों की प्राप्ति हो सके। किसी भी देश के छात्र, उस देश के मेरूदण्ड से कम नहीं होते हैं। ऐसे में युवाओं के देश भारत में, तरक्की और कामयाबी की असंख्य संभावनाएं हैं। जरूरत उन्हें सही दिशा देने की है।

आकाश की उड़ान भरने के लिए हवाई जहाज या अन्य साधनों से भी ज्यादा आवश्यक है हौसला। हौसलों की लम्बीं उड़ान दुनिया के आसमान में बादशाहत कायम करने में सक्षम है। ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं जिनमें हम खुली आंखों के सपनों को पूरा होते हुए देख सकते हैं। कलाम साहब उसी हौसले की उड़ान से आसमान में परवाज करने की बातें छात्रों से दोहराते रहे। एम.आई.टी. में पढ़ाई के दौरान वो अकसर वहां रखे दो हवाई जहाजों के पास बैठ अपने सपनों को हकीकत में बदलने की ख्वाहिशों में अकसर तल्लीन रहते।

इल्म हासिल करने को लेकर उनके विचार स्पष्ट थे। वो कहते थे इल्म बड़ा करामाती हथियार है। जिसका इल्म जितना ज्यादा होगा, उतना ही वह आजादी का हकदार होगा। भारत को मिशाइल टेक्नोलॉजी के हुनर में दुनिया के चन्द चुनिंदा देशों के बराबर खड़ा करने में डाॅ. कलाम साहब का बड़ा योगदान है। अग्नि की सफल उड़ान से पूर्व डिफेंस मिनिस्टर ने उनसे सवाल किया कि आर्प अिग्न की सफलता पर किस प्रकार से अपनी खुशी जाहिर करना चाहेंगे, तब उन्होंने कहा कि ’हम एक लाख पेड़ों की कोपलें लगाएगे।

बेइन्तेहा सादगी पसन्द थे कलाम साहब उनके सपनों और ख्वाहिशों की फेहरिश्त देख यकीन होता है की यकीनन वो इंसानी शरीर में फरिश्तें की रूह लेकर भारत के छोटे से शहर रामेश्वरम् में पैदा हुए और भारत की कामयाबी की उड़ान की रूपरेखा तैयार करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। भारत को आत्मनिर्भर बनते हुए देखना, उनका सपना था। आज भारत विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन चुका है। इस कामयाबी की नींव में एक पत्थर कलाम

साहब के हाथों से भी यकीनन शामिल हुआ होगा। उनका अपने वतन की सरज़मीं से बेइन्तेहां मोहब्बत, युवाओं को सपने देखने की सीख देना, भारत की सुरक्षा के लिए किए गए सफल प्रयोग, उन्हें युवाओं और बच्चों पसन्दीदा हीरो बनाता है। वे जानते थे कि भारत में प्रतिभाओं की कमीं नहीं है इसलिए वे अपनी जीवनी में लिखते हैं, कि ’ मैं जानता हूं कि बहुत से साइंस के महारथी और इंजीनियर मौका मिलते ही वतन छोड़ जाते हैं। दूसरे मुल्कों में चले जाते हैं।

ज्यादा रूपये कमाने के लिए, ज्यादा आमदनी कमाने के लिए लेकिन यहां रहकर ये आदर, ये इज्जत क्या कमां सकते हैं? जो उन्हें अपने वतन से मिलती है।’ यदि यह कहें कि इल्म को हथियार बनाकर कामयाबी की इबारत लिखने वाले देश के ग्यारहवें राष्टृपति, भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने विकसित भारत के स्वप्न दृष्टा के रूप में सपनों की कोपलें युवाओं की आखों में बोने का सफल प्रयास किया था तो कोई अतिश्योक्ति न होगी।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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