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कोरोना से लड़ाई की राह दिखाता सिक्किम, बाकी राज्य ले सकते हैं सबक

Prabhakar Mani Tewari प्रभाकर मणि तिवारी
Updated Tue, 28 Apr 2020 11:50 AM IST
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coronavirus lockdown in sikkim situation is in proper control no cases till date
सिक्किम में अब तक कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है - फोटो : pixabay

देश का छोटा-सा खूबसूरत पर्वतीय राज्य कोरोना वायरस से निपटने की दिशा में राह दिखा रहा है। यह देश का अकेला ऐसा राज्य है, जहां अब तक कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है। हिमालय की गोद में बसा यह राज्य पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल, भूटान और चीन से घिरा है।

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राज्य सरकार ने मई से नंवबर तक नाथूला सीमा चौकी के जरिए चीन के साथ होने वाले सीमा व्यापार के अलावा इस रूट से कैलाश मानसरोवर यात्रा भी स्थगित कर दी है। यह यात्रा जून से सितंबर के दौरान होती है। पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण चीन से लगी नाथूला सीमा चौकी तो बहुत पहले ही सील कर दी गई थी।
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इसके अलावा सरकार ने महामारी से बचाव के लिए अक्तूबर तक पर्यटकों के राज्य में आने पर पाबंदी लगा दी है। इस तथ्य के बावजूद कि इस राज्य की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही आधारित है और पर्यटकों पर पाबंदी से इसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, लेकिन सरकार का कहना है कि लोगों की सुरक्षा पहले है, कमाई बाद में।
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राज्यपाल गंगा प्रसाद कहते हैं कि राज्य के सात लाख लोगों की सुरक्षा के लिए ही सरकार ने यह कड़ा फैसला किया है। अभी पूरे देश में दूर-दूर तक जब लॉकडाउन की कोई चर्चा तक नहीं थी, सिक्किम ने बीते पांच मार्च को ही विदेशी पर्यटकों के राज्य में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। उसके बाद 17 मार्च को घरेलू पर्यटकों पर भी रोक लगा दी गई औऱ सीमाएं सील कर दी गईं। सरकार ने 29 जनवरी से ही राज्य में पहुंचने वाले लोगों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। उसके बाद अब तक छह लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।

देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले सिक्किम के लोगों की वापसी आसान नहीं होगी...

coronavirus lockdown in sikkim situation is in proper control no cases till date
कोरोना के खिलाफ सिक्किम की लड़ाई कामयाब रही है। - फोटो : PTI

इन ऐहतियाती उपायों का ही नतीजा है कि राज्य में 20 अप्रैल से ही लॉकडाउन में काफी हद तक ढील दे दी गई है और तमाम सरकारी दफ्तर खुल गए हैं। हालांकि बाहर निकलने वालों के लिए मास्क और मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु एप्प अनिवार्य कर दिया गया है।

वाहन चालकों को भी परमिट उसी स्थिति में मिलेंगे जब उनके पास आरोग्य सेतु व मास्क हो और वे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करें। बीते साल मार्च में राज्य में 1.18 लाख पर्यटक आए थे। ऐसे में सीमाएं सील करने का फैसला आर्थिक तौर पर बेहद नुकसानदेह था, लेकिन बावजूद इसके सरकार ने यह फैसला करने में देरी नहीं लगाई।

सिक्किम के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. पेम्पा शेरिंग भूटिया बताते हैं कि पड़ोसी कालिम्पोंग में एक महिला के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना मिलते ही सरकार ने उस महिला के साथ चेन्नई से एक ही विमान से लौटने वाले 12 यात्रियों का तत्काल पता लगाकर उनको होम क्वांरटीन में भेज दिया।

बाहर से आने वाले तमाम लोगों का पता लगाकर उनको क्वारंटीन में भेजा गया। ऐसे लोगों के बारे में सूचना देकर जागरुक नागरिकों ने भी सरकार की मदद की। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग बताते हैं कि जनवरी में चीन में कोरोना का संक्रमण फैलने और इसके पड़ोसी देश नेपाल तक पहुंचने के बाद सिक्किम ने चीन से लगी नाथूला सीमा को फौरन सील कर दिया था।

इसके साथ ही नेपाल से लगी खुली सीमाओं को भी बंद कर दिया गया। सिर्फ पश्चिम बंगाल से लगी दो सीमा चौकियों रंग्पो और मल्ली को खुला रखा गया था। वहां से भी राज्य के लोगों को लौटने और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन की ही अनुमति दी गई थी। बाहर से आने वालों को जांच के बाद होम क्वारंटीन में भेज दिया गया था।

वैसे, राज्य के लोग भी केंद्र की ओर से घोषित लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का सख्ती से पालन कर रहे थे। मुख्य सचिव एस.सी.गुप्ता कहते हैं कि राज्य के लोग 17 मार्च से ही घरों में रह रहे थे। अब तक तमाम नमूनों के नेगेटिव आने के बाद कहा जा सकता है कि कोरोना के खिलाफ सिक्किम की लड़ाई कामयाब रही है।

वह बताते हैं कि तीन मई के बाद जब लॉकडाउन हटता है, देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले सिक्किम के लोगों की वापसी आसान नहीं होगी। उनको कड़ी जांच से गुजरना होगा। उससे पहले ऐसे तमाम लोगों को आरोग्य सेतु पर पंजीकरण करना होगा।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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