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मध्य प्रदेशः सरकार गिराने-बचाने के संकट के बीच कोरोना से कितनी सुरक्षित है प्रदेश की जनता?

Tue, 17 Mar 2020 03:24 PM IST
Satish Alia सतीश एलिया
Updated Tue, 17 Mar 2020 03:24 PM IST
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coronavirus attack in madhya pradesh is kamal nath government ready
मप्र की जनता क्या सुरक्षित है कोरोना वायरस से? - फोटो : अमर उजाला

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के बहुमत पर सवालों और राजनीतिक घमासान के बीच विधानसभा की कार्यवाही जिस विश्व महामारी कोरोना के नाम पर 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई उससे निपटने के इंतजाम प्रदेश में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
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सवा साल स्वास्थ्य मंत्री रहे तुलसीराम सिलावट बेंगलुरु में डेरा डाले 22 बागी विधायकों में शामिल थे, जिनमें से छह के मंत्री पद छीनने के बाद विधायक पद से इस्तीफा मंजूर मंजूर किए जा चुके हैं। मंत्रियों के विभाग अन्य मंत्रियों को दे तो दिए गए हैं, लेकिन कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही है।
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मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सरकार बचाने में दिन-रात लगे हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सार्क देशों के राष्ट्र प्रमुखों से बात कर रहे हैं, राज्यों के मुख्यमंत्रियो से बात कर रहे हैं, भाजपा संसदीय दल की बैठक हो रही है। 
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दूसरी तरफ कमलनाथ सरकार और कांग्रेस ऐसा कुछ नहीं करती दिख रही। एमपी की करीब साढ़े आठ करोड़ आबादी कोरोना संकट से आशंकित है। मप्र देश के हर राज्य के संपर्क में है। मप्र देश के बीचों-बीच है, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ से सटा है और केरल, तमिलनाडु से लेकर कश्मीर, बंगाल, बिहार, ओडिशा समेत देश के 90 फीसदी राज्यों को जाने वाली ट्रेनें यहाँ से गुजरती हैं। ट्रक परिवहन भी मप्र से ही गुजरता है। प्रदेश सरकार ने मप्र की सीमा पर कोरोना प्रतिरोध के कोई प्रभावी इंतजामात नहीं किए हैं। केंद्र सरकार को मप्र के हालात को गंभीरता से लेना चाहिए। सरकार गिराने बचाने से ज्यादा जरूरी  लोगों को सुरक्षित रखना है।                                                                
 

coronavirus attack in madhya pradesh is kamal nath government ready
मध्य-प्रदेश के अन्य शहरों में भी चीन, इटली, मलेशिया, ईरान व जापान से कुछ लोग आए हैं। - फोटो : SELF

ऐसे बढ़ रहा है संकट 
कोरोना वायरस की आशंका में इंदौर निवासी इटली से आई युवती को एमवाय अस्पताल में भर्ती किया गया। युवती का मित्र कोविड-19 की जांच में पाॅजीटिव पाया गया है। इस जानकारी के बाद युवती स्वयं अस्पताल पहुंची और खून के नमूने दिए। इस लड़की को सावधानी बरतते हुए पृथक वॉर्ड में रखा गया है।

मध्य-प्रदेश के अन्य शहरों में भी चीन, इटली, मलेशिया, ईरान व जापान से कुछ लोग आए हैं। इसके संदिग्ध मरीज उज्जैन और ग्वालियर में भी मिले हैंं। शिवपुरी में मलेशिया से लौटे दो युवकों को जांच के दायरे में रखा गया है। शुक्र है की अभी तक कोई पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है। चीन में रहकर चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई कर रहे खरगोन का युवक और इंदौर की लड़की वुहान से लौटी है। आपको बता दें कि वुहान वही शहर है, जहां की विषाणु प्रयोगशाला से कोरोना वायरस निकलकर दुनिया के 126 शहरों में फैल गया और इसने पांच हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। भारत सरकार ने इस महामारी को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे विश्वव्यापी महामारी घोषित कर चुका है।

देश में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रविवार तक दिल्ली और कर्नाटक में एक-एक मौत हो चुकी है। अबतक कोरोना के संक्रमण के 7 रोगी दिल्ली, 11 उत्तर-प्रदेश, 6 कर्नाटक, 14 महाराष्ट्र, 19 केरल और तीन लद्दाख में पाए गए हैं। राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, आंध्र-प्रदेश और पंजाब में एक-एक मरीज पाए गए हैं। इन रोगियों में 17 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें इटली के 16 और कनाडा का एक पर्यटक है। 

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मप्र में के अस्पतालों में नहीं है सफाई की जरूरी चीजें। - फोटो : अमर उजाला।

अबतक देश के अस्पतालों से 10 कोरोना संक्रमित ठीक होकर अपने-अपने घर लौट चुके हैं। यह आकड़े रोज बदल रहे हैं।  इस बात को लेकर संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता है कि मध्य-प्रदेश में अभी तक एक भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति नहीं मिला है। प्रदेश सरकार अस्तित्व के संकट से जूझ रही है, इसलिए स्वाभाविक है कि वह इस खतरनाक बीमारी के प्रति सर्तक नहीं है।

तीन दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री पद का भी जिम्मा पाए मप्र के वित्त मंत्री तरुण भनोत का कहना है कि बेंगलुरु में कांग्रेस के जो विधायक नजरबंद हैं, उनका भोपाल आते ही स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा, क्योंकि बेंगलुरु में कोरोना के छह संक्रमित मरीज मिले हैं, उनमें से एक 76 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है। 

कैसी है मप्र में तैयारी? 
इधर आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार ने प्राथमिक सावधानियां बरतते हुए प्रदेश के सभी सरकारी व निजी विद्यालय व महाविद्यालय, सिनेमाघर, डे-केयर सेंटर और आंगनवाड़ी केंद्र 31 मार्च तक बंद कर दिए हैं। इस दौरान घरों पर ही पोषण आहार पहुंचाया जाएगा और वहीं वजन व ऊंचाई नापी जाएगी। जिला अस्पतालों में पृथक वॉर्ड खोलने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सकों, नर्सों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की छुटिट्यां रद्द कर दी गई हैं।

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा की अधिसूचना जारी करने के बाद राज्य सरकारों को कहा गया है कि इससे निपटने के लिए एसडीआरएफ के तहत आर्थिक मदद की जाएगी। राज्य सरकारें इस सिलसिले में वायरस पर नियंत्रण के लिए प्रभावित लोगों के अस्थाई तौर पर ठहरने, खाना, वस्त्र, दवाएं और आइसोलेशन कैंप के लिए एसडीआरएफ धनराशि का इस्तेमाल कर सकती हैं। इस राशि का उपयोग स्क्रीनिंग टेस्ट और सैंपल लेने के साथ प्रयोगशालाएं बनाने में भी किया जा सकेगा।

मध्य-प्रदेश में सरकार पर मंडरा रहे संकट के बीच कोरोना की रोकथाम के प्रति मुख्यमंत्री कमलनाथ के चित्र लगे विज्ञापन जरूर अखबारों में छापे जा रहे हैं। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो छोड़िए जिला चिकित्सालयों तक में मास्क, सेनेटाइजर व डिटाॅल तक नहीं हैं, इसलिए वरिष्ठ नागरिक इन वस्तुओं की मांग जिला कलेक्टरों को ज्ञापन देकर भी करने लगे हैं।

इन नागरिकों के संगठनों ने जिला चिकित्सालयों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से ऐसा कक्ष बनाने की मांग की है, जिसमें इस बीमारी से जुड़े लक्षणों बुखार, खांसी, सर्दी-जुकाम, निमोनिया और सांस के विशेषज्ञ चिकित्सक जांच करें और फिर दवा दें। 

दरअसल, वरिष्ठ नागरिकों को बीमारी से पहले उपचार की चिंता इसलिए सता रही है क्योंकि कोरोना का सबसे ज्यादा असर 70 साल के अधिक उम्र के बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर देखने में आ रहा है। उम्रदराज लोग ही मौत के मुंह में ज्यादा जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस उम्र में रोग-प्रतिरोधात्मक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। गर्भवती महिलाएं भी इसकी गिराफ्त में जल्दी आ सकती हैं। जिन लोगों को हृदय, गुर्दा, जिगर और अस्थिरोग है, उन्हें भी कोरोना तेजी से अपनी चपेट में लेता है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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