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कोरोना वायरस ने छीन ली यूरोपीय संघ के पासपोर्ट की ताकत

Wed, 01 Apr 2020 07:06 PM IST
Priyamvada Sahay प्रियंवदा सहाय
Updated Wed, 01 Apr 2020 07:06 PM IST
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Corona virus seized the power of european union passport
यूरोप के देशों की पासपोर्ट की ताकत बहुत कम हो गई है। - फोटो : PTI

क्या आपको पता है कि कल तक जिन देशों के पासपोर्ट को सर्वाधिक शक्तिशाली माना जाता था, आज उसका वजूद कुछ भी नहीं है। कोरोना वायरस ने उन्हें भी शक्तिहीन कर दिया है। मार्च के पहले हफ्ते तक दुनिया के सर्वाधिक शक्तिशाली पासपोर्टधारक देशों की सूची में यूरोपीय संघ(ईयू) पहली पंक्ति में खड़ा था। 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय संघ के पासपोर्ट धारकों को दुनिया के ज्यादा से ज्यादा जगहों पर आने-जाने की अनुमति है। उनका यह सफर वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल होता है। ऐसे में ईयू पासपोर्ट के महत्व का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

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यूरोप के लोगों के घुमक्कड़ स्वभाव के पीछे उनकी संपन्नता के साथ-साथ उनके पासपोर्ट का शक्तिशाली होना भी है। लेकिन कोरोना वायरस ने इनके पासपोर्ट की शक्तियां छीन ली हैंं। आज की तारीख में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर पाबंदी लगने के कारण ईयू पासपोर्ट होते हुए भी आने-जाने पर सख्त मनाही हो चुकी है।

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Corona virus seized the power of european union passport
इटली में कोरोना वायरस ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। - फोटो : Social Media

इस समय यूरोप में कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित देश इटली है, जहां लोग अगले कई महीनों तक जाने या फिर वहां से निकलने में डरेंगे। यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला पर्यटन उद्योग और वस्त्र व फैशन उद्योग बुरी तरह से धराशायी हो चुके हैंं। हाल फिलहाल तक इस देश के पासपोर्ट धारकों का स्वागत दुनिया के कोने-कोने में किया जाता था। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल इससे उलट है। यही हाल फिनलैंड और जर्मनी का भी है।

सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया से कदमताल करते हुए ये सभी देश पासपोर्ट सूचकांक में टॉप टेन में शामिल हैं। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के डर ने इनके पासपोर्ट की ताकत को समाप्त कर दिया है। अब इस देश के निवासियों के लिए अपने पड़ोसी देशों के दरवाजे भी बंद हो चुके हैं।

डेनमार्क ने तो लॉकडाउन के दौरान स्वीडन-डेनमार्क रेल सेवा पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। लॉकडाउन की वजह से इन यूरोपीय देशों के पासपोर्ट और अन्य देशों के पासपोर्ट में कोई अंतर नहीं रह गया है। छोटे व कम शक्तिशाली देश या फिर जिन देशों में कोरोना वायरस का प्रभाव कम है वह भी अपने यहां इन पासपोर्टधारकों को आने से रोक रहे हैं। 

इस वर्ष यानी 2020 के पासपोर्ट सूचकांक के आधार पर जर्मनी के पासपोर्ट धारक दुनिया के 189 देशों में वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल के साथ यात्रा कर सकते थे। जबकि इटली के लिए 188, डेनमार्क व स्पेन 187 और स्वीडन व फ्रांस के पासपोर्ट के लिए 186 देशों में यह व्यवस्था थी। लेकिन कोरोना वायरस के डर से अब दुनिया के अधिकांश देशों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं।

ऐसे में यूरोपीय पासपोर्ट का महत्व दूसरे देशों के पासपोर्ट के समकक्ष हो चुका है। या फिर काफी नीचे आ गया है। आपको बता दूं कि आज की तारीख में इटली के पासपोर्टधारकों को यूरोप के किसी भी देश में जाने की इजाजत नहीं है। जो इटली में हैं या फिर इटली से बाहर हैं, सभी की यात्राओं पर विराम लग चुका है। यही हाल स्पेन का भी है। इन दोनों जगहों पर कोरोना वायरस के ताडंव की कहानी पूरी दुनिया को पता है।

Corona virus seized the power of european union passport
दुनिया में कोरोना वायरस का केंद्र अब यूरोप बन गया है। - फोटो : पीटीआई

दरअसल, मार्च के दूसरे हफ्ते में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जैसे ही यूरोप को कोरोना वायरस संक्रमण का केंद्र बनने की बात कही वैसे ही अमेरिका, भारत समेत ज्यादातर देशों ने अपनी सीमाओं को यूरोपीय संघ के सभी पासपोर्ट धारकों के लिए बंद कर दिया। साथ ही वहां गए यात्रियों पर भी अपने यहां आने पर पाबंदी लगा दी। यही हाल चीन के साथ भी हुआ था। लेकिन देखते ही देखते यूरोप इसके संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित हो गया और इसके पासपोर्ट की ताकत कमजोर हो गई। 

आज दुनिया के सभी देश कोरोना वायरस संक्रमण से डरे हुए हैं और आवागमन पर तरह तरह की पाबंदियां लगा रहे हैं ताकि अपने देश के नागरिकों को सुरक्षित रख सके।  यह जानकारी भी दिलचस्प है कि दुनिया के दूसरे कोने से यूरोप में आकर बसने वालों की तादाद दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। जबकि पर्यटकों के लिए हमेशा से ही यह महादेश आकर्षण का केंद्र रहा है।

यहां की प्राकृतिक सुंदरता, संपन्नता, सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और लोगों का शांतिपूर्ण व्यवहार खूब पसंद किया जाता है। लेकिन इस महामारी के खत्म होने के बाद पासपोर्ट की खोई हुई ताकत, पर्यटन और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटने में कितना वक्त लगेगा यह देखना होगा। फिलहाल पूरी दुनिया खुद को कोरोना वायरस से बचाने में लगी हुई है जबतक इसका कहर कम नहीं हो जाता ईयू पासपोर्ट से पाबंदियां हटने की संभावना नहीं है। संभव है कि कुछ महीनों के बाद फिर से इस सूचकांक की समीक्षा भी करनी पड़ जाए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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