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कोरोना से युद्ध में सबसे पहले भारत 

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corona virus in India: India first in fight against COVID-19
कोरोना से युद्ध में विश्व को राह दिखाता भारत. तस्वीर जी-20 सम्मेलन की. - फोटो : पीटीआई

एक इंसान की वास्तविक परीक्षा उसकी आरामदायक स्थितियों में नहीं, अपितु चुनौतीपूर्ण समय में ही होती है। कोविड-19 वैश्विक चुनौती के रूप में एक ऐसा ही अवसर है जो सभी स्तरों पर हमारे वास्तविक नेतृत्व को उभारेगा। यह वह समय है जब संगठनात्मक से लेकर व्यक्तिगत तक सभी स्तर व तरह के नेतृत्व प्रतिकूल परिस्थितियों में अपनी-अपनी क्षमता के लिटमस टेस्ट से गुजरेंगे। प्रधानमन्त्री से लेकर मुख्यमंत्री तक और जिलाधिकारी तक का पूरा सरकारी तंत्र मौजूदा संकट के खिलाफ इस सामूहिक लड़ाई में एक साथ खड़ा है। 

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जब विश्व की महाशक्तियां अपने घुटनों पर आ गई हैं, ऐसे समय में भारत, हमारे प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में उनके पीछे खड़े 130 करोड़ भारतीयों की एकजुटता एवं समर्थन से मजबूती के साथ खड़ा है। यह विश्वस्तरीय नेतृत्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां इतनी विविधतापूर्ण एवं मौजूदा संघीय संरचना वाले देश ने एकजुटता के साथ अपने कदम आगे रखे हैं और दुनिया को दिखाया है कि जब भारत को आगे लेकर जाने की बात आती है तो हम किस प्रकार एकजुट होकर खड़े होते हैं। 
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प्रधानमंत्री की विनती 
सबसे बड़े राजनैतिक जनादेश के साथ हमारे प्रधानमंत्री की छवि को मैं याद करता हूं जिन्होंने राष्ट्रीय टेलीविजन पर 130 करोड़ लोगों से अपील की व अपने नागरिकों के समक्ष हाथ जोड़कर विनती की कि वे इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए सक्रिय उपायों का अनुपालन करें। यह राष्ट्रीय चरित्र की ताकत, अपने लोगों के लिए चिंता का भाव तथा राष्ट्र की क्षमताओं में विश्वास को प्रस्तुत करता है, निश्चित रूप से कमजोरी को नहीं। 
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दरअसल, यह इस महामारी के भीषण आक्रमण का पूर्वानुमान लगाने की एक दूरदर्शी दृष्टि है और आने वाली चुनौतियों के लिए जनता कर्फ्यू, अनिवार्य समयबद्ध लॉकडाउन तथा क्षमता निर्माण की घोषणा करने जैसे सक्रिय उपायों को लागू करना है। भारत सदैव वैश्विक परिवार अर्थात् "वसुधैव कुटुम्बकम" के सिद्धांत पर विश्वास करता आया है तथा भारतीय समाज के लोकाचार का पालन करते हुए कोविड-19 के लिए आपातकालीन निधि का प्रस्ताव किया और देश में आपसी सह-अस्तित्व और भाईचारे की मिसाल कायम की। 

यह वैश्विक नेतृत्व क्षमताओं का एक अद्वितीय उदाहरण है जिसकी स्वीकार्यता सभी महाद्वीपों में है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में वे इस संकट की घड़ी में अथक प्रयास कर देश की मदद कर रहे हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलोनसरो ने इस मुश्किल वक्त में उनकी मदद करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है तथा उन्होंने इसकी तुलना रामायण की उस घटना से की जिसमें भगवान हनुमान ने जीवन रक्षक के रूप में संजीवनी लाकर लक्ष्मण की जान बचाई थी। प्रधानमंत्री द्वारा की गई इस पहल ने बदलते वैश्विक परिदृश्य व वैश्विक नेतृत्व के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका साबित कर दी है। 
 

corona virus in India: India first in fight against COVID-19
पीएम मोदी ने देश को समय-समय पर मार्गदर्शन दिया. - फोटो : अमर उजाला

“राष्ट्र सर्वोपरि” की नीति
प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को 21 दिनों के लॉकडाउन का आह्वान तथा भारतीय नागरिकों द्वारा इसके अनुपालन में निर्विवाद विश्वास दर्शाना, राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक परिप्रेक्ष्य में उनकी सार्वभौमिक स्वीकार्यता का प्रतिबिंब है। उनकी “राष्ट्र सर्वोपरि” की नीति ने लोगों को एकजुट कर इस वैश्विक खतरे से लड़ने के लिए मजबूत किया है। उनके लिए देशवासियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण हमेशा सबसे पहले रहे हैं। देश के सभी राज्यों ने सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों एवं सलाह का पालन किया है। भारत ने अपने इतिहास में सामूहिक संघवाद को इतने करीब से कभी नहीं देखा। 

माननीय प्रधानमंत्री की एक अपील पर समाज के सभी वर्गों के बहुमूल्य योगदान के साथ पीएम केयर्स फंड तेजी से बढ़ रहा है। युवा एवं महत्वाकांक्षी खिलाड़ियों द्वारा इस लड़ाई में योगदान देने के लिए अपने पदक व ट्रॉफियां नीलाम करते देखना एक सुखद अनुभव रहा है। वृद्ध पुरुषों एवं महिलाओं द्वारा अपने जीवनकाल की बचत का दान करना व्यक्तिगत एवं राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रेरणादायक पहलू हैं। 

हर तरह की समस्याएं भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण सीख भी साथ लाती हैं। जब दुनिया की बड़ी शक्तियों के शीर्ष नेतृत्व डगमगा रहे हैं और राष्ट्रीय संकल्प बिखर रहा है वहीं इस वैश्विक संकट से लड़ने के दृढ़ संकल्प के साथ सम्पूर्ण देश हमारे प्रधानमंत्री के साथ एकजुट है। वास्तविक नायक वे कोरोना योद्धा हैं, जो युद्ध के मैदान में लड़ रहे हैं ताकि हम सुरक्षित, स्वस्थ रहें और अपने परिवारों के साथ रहें। प्रशासनिक तंत्र, पुलिस, स्वास्थ्य अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता असुरक्षित और असुविधाजनक वातावरण में अथक कार्य कर रहे हैं जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हम आराम से सुरक्षित रहें। 

corona virus in India: India first in fight against COVID-19
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के एक-एक नागरिक से इस युद्ध में शामिल होने का आव्हान किया है. - फोटो : पीटीआई

कोरोना से लड़ रहे नायकों का आभार 
आइए हम अपने जीवन के इन हीरो का आभार व्यक्त करना न भूलें। यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि भारत सरकार के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में मैंने राजस्थान के 20 जिलों की नज़दीकी से निगरानी की है, जिसमें महामारी का केंद्र बना भीलवाड़ा भी शामिल है। कोविड के विरुद्ध कार्य कर रही मशीनरी तथा जिला प्रशासन के साथ मेरी हर रोज होने वाली बातचीत एवं प्रतिक्रियाओं के दौरान मैंने उन्हें इस संकट के समय में अपनी योजनाओं एवं निष्पादन में एक कदम आगे पाया। 

आंकड़ों से पता चलता है कि प्रकोप को रोकने के लिए यह एक दुस्साध्य श्रम था। लगभग 3900 सर्वेक्षण टीमों का गठन किया गया जिन्होंने 4.5 लाख घरों का सर्वेक्षण किया, 23 लाख लोगों की जांच की, 18000 लोगों को आइसोलेट कर उनकी जांच की गई और यह सब केवल तीन सप्ताह के अंतराल में किया गया। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह सब कार्य इसलिए हो पा रहा क्योंकि हम सब मानते हैं कि यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है।

हमने समाज के कुछ लोगों द्वारा किए गए कतिपय घिनौने परिदृश्यों एवं बुरे उदाहरणों को भी देखा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण और अवांछनीय है और हमें इसे एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए और प्रशासन का सहयोग करना चाहिए और हिमालय जैसी विकट चुनौती से जूझने में अपने प्रधानमंत्री को मजबूत करना चाहिए।

हमारे प्रधानमंत्री के शब्दों व आंखों में दर्द और चिंता का भाव स्पष्ट दिखाई देता है जिसे हमें महसूस करना और पढ़ना चाहिए। यह ऐसा चरम काल है जब हम राष्ट्रीय कर्तव्यों को महसूस करें और इस तरह आगे बढ़कर कार्य करने का समय है जिसमें हम जो कुछ भी करें, उसमें "राष्ट्र सर्वोपरि" या राष्ट्र को प्रथम रखने का भाव हो। 

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’  द्वारा अमर उजाला के लिए लिखा गया विशेष लेख.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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