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Patna Lathicharge: बिहार में लोकतंत्र या लाठीतंत्र..!

Fri, 14 Jul 2023 12:10 PM IST
Kunal Verma कुणाल वर्मा
Updated Fri, 14 Jul 2023 12:10 PM IST
सार

नीतीश सरकार में यह लाठीचार्ज की कोई पहली घटना नहीं है। एक दिन पहले बुधवार 12 जुलाई को भी किसान सलाहकारों के ऊपर नीतीश कुमार की पुलिस ने जमकर लाठियां चलाई थी। पुलिस वालों ने लोगों को सड़क पर गिरा-गिराकर लाठियां बरसाईं। लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए थे। महिलाओं को भी चोटें आई थी।

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Bihar Politics: According to Bihar police Leader vijay singh death was not due to lathicharge
बिहार में लाठीचार्ज के दौरान बीजेपी नेता की मौत - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पटना में गुरुवार का दिन इतिहास के पन्नों में काले अध्याय के तौर पर दर्ज हो गया। दरअसल जिस बेरहमी से बिहार पुलिस के जवानों और कमांडो ने बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं, सांसदों, विधायकों पर लाठियों की बौछार कर अपनी मर्दानगी का नमूना दिखाया है उसने अपने आप आने वाले दिनों की रूपरेखा तैयार कर दी है।

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लाठीचार्ज के दौरान जिला स्तर के एक बड़े नेता की मौत ने बिहार में ' लाठीतंत्र ' के नारे को और हवा दे दी है। यह पहली बार नहीं है कि पटना में पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया है। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि पिछले कुछ सालों में करीब 12 बार नीतीश कुमार की पुलिस ने अपनी ताकत साबित करने के लिए निहत्थे लोगों पर लाठियां चलाई है।

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बीजेपी नेता की मौत


पटना पुलिस और प्रशासन का पूरा अमला गुरुवार को बीजेपी नेता की मौत को सामान्य मौत बताने में जुट गया है। जबकि बीजेपी के सभी बड़े नेताओं का दावा है कि लाठीचार्ज के दौरान ही जहानाबाद के भाजपा नेता विजय कुमार सिंह घायल हो गए थे। घायल अवस्था में उन्हें पहले स्थानीय नर्सिंग होम ले जाया गया, वहां से चिकित्सकों ने मामला गंभीर होने के कारण पटना मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। पीएमसीएच में विजय कुमार सिंह को बचाया नहीं जा सका।

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उधर पूरा सरकारी तंत्र इस बात को साबित करने में लग गया है कि विजय कुमार सिंह अचेत अवस्था में पाए गए थे। उनके शरीर पर किसी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं हैं।

अब पूरी लड़ाई इसी पर होगी कि विजय कुमार सिंह की मौत कैसे हुई। बीजेपी और नीतीश कुमार अंत-अंत तक अपने दावे पर कायम रहेंगे। पर इस सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जिस तरह बिहार पुलिस ने बर्बरता की सारी हदों को पार किया वह सामान्य नहीं है।
 

आखिर पुलिस को ऐसे क्या निर्देश मिले थे कि उसने सांसदों और विधायकों तक का लिहाज नहीं किया। बीजेपी सांसद का वीडियो वायरल है जिसमें उनके निजी सुरक्षाकर्मी उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं और बिहार पुलिस के जवान सांसद की जान लेने पर आमदा हैं। उनके ऊपर ऐसे लाठियां भांजी जा रही हैं जैसे वे कोई आतंकवादी या गैंगस्टर हों।

Bihar Politics: According to Bihar police Leader vijay singh death was not due to lathicharge
बिहार सरकार के लाठीतंत्र पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं पर गुरुवार को जो हुआ उसने सभी सीमाओं को तोड़ दिया। - फोटो : Amar Ujala

सैकड़ों वीडियो और टीवी के लाइव फुटेज मौजूद हैं जिसमें बिहार पुलिस की बर्बरता को नजदीक से देखा जा सकता है। नीतीश सरकार में यह लाठीचार्ज की कोई पहली घटना नहीं है। एक दिन पहले बुधवार 12 जुलाई को भी किसान सलाहकारों के ऊपर नीतीश कुमार की पुलिस ने जमकर लाठियां चलाई थी। पुलिस वालों ने लोगों को सड़क पर गिरा-गिराकर लाठियां बरसाईं। लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए थे। महिलाओं को भी चोटें आई थी।

आंकड़ों की बात करें तो पिछले कुछ सालों में करीब 12 से अधिक बार बिहार के युवाओं को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी से पीटा गया है। अभ्यर्थी जब भी अपनी मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन करने पहुंचते हैं पटना पुलिस लाठियों से स्वागत करती है। इसी महीने एक जुलाई को पटना पुलिस ने शिक्षक अभ्यर्थियों पर एक दो बार नहीं बल्कि चार-चार बार लाठी बरसाई थी। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो पुलिस की बर्बरता बयां करने को काफी है।
 

गुरुवार 13 जुलाई को दूसरी बार पटना पुलिस ने सभी हदों को पार किया। इससे पहले 22 अगस्त 2022 को दरभंगा से पटना आए शिक्षक अभ्यर्थी को इतना पीटा गया था कि उसकी हालत गंभीर हो गई। अभ्यर्थी हाथ में तिरंगा लिए था, पर उसे पीटते-पीटते अधमरा कर दिया गया। पिटाई का वीडियो वायरल होने पर देश भर में गुस्से की लहर दौड़ गई थी। लाठी भांजने वाले एडीएम पर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन हद तो यह कि वह लाठीबाज एडीएम तरक्की पा गया। उधर, आज भी वह अभ्यर्थी अपने पैरों पर ठीक से खड़ा नहीं हो सका है।


बिहार सरकार के लाठीतंत्र पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं पर गुरुवार को जो हुआ उसने सभी सीमाओं को तोड़ दिया। बिहार को लाठीतंत्र के रूप में बड़ा मुद्दा मिल गया है। नीतीश कुमार सरकार से सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या हर मांग का जवाब लाठी से ही दिया जाएगा? अगर बात लाठी की है तो जवाब चुनाव में वोट से मिलने की बात जोर शोर से उठने लगी है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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