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बिहार भूमि सर्वे: क्या असमंजस, भ्रम और रिश्वतखोरी में चलेगा अभियान?

Wed, 25 Sep 2024 08:17 PM IST
Praveen Baghi प्रवीण बागी
Updated Wed, 25 Sep 2024 08:17 PM IST
सार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बिहार में भूमि सर्वे अभियान चल रहा है। पिछला सर्वे 1920 में अंग्रेजी शासनकाल में हुआ था। आजादी के बाद भूमि सर्वे करने के कई बार प्रयास हुए पर वे सफल नहीं हो सके। अब यह बीड़ा नीतीश कुमार ने उठाया है। निसंदेह यह एक सराहनीय पहल है। इससे भूमि विवादों का निपटारा हो जाएगा।

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bihar land survey 2024 by british government politics and challenges
सर्वे की अंतिम तिथि के बारे में सरकार के जिम्मेवार लोग खुद भ्रम फैला रहे हैं। ग्राम सभाओं में अंतिम तिथि 24 सितंबर बताई गई। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

पूरा बिहार अभी भूमि सर्वे के चक्कर में उलझ गया है। विभिन्न मंत्रियों के अलग-अलग राग अलापने के कारण यह दिन-प्रतिदिन और उलझता जा रहा है। आगे क्या होगा यह किसी को साफ नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री इस पर पूरी तरह मौन हैं। उधर इस सर्वे में अपनी जमीन बचाने के लिए परेशान लोगों को रिश्वतखोर लोग भी लूट रहे हैं। दावे सिद्ध करने के चक्कर में आपस में मार काट भी मची हुई है।

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दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बिहार में भूमि सर्वे अभियान चल रहा है। पिछला सर्वे 1920 में अंग्रेजी शासनकाल में हुआ था। आजादी के बाद भूमि सर्वे करने के कई बार प्रयास हुए पर वे सफल नहीं हो सके। अब यह बीड़ा नीतीश कुमार ने उठाया है। निसंदेह यह एक सराहनीय पहल है। इससे भूमि विवादों का निपटारा हो जाएगा।
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सर्वे कराने की जिम्मेवारी भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग की है। विभाग इसको लेकर कितना गंभीर है, इस पर अनेक राय हैं। विभाग के मंत्री डॉक्टर दिलीप कुमार जायसवाल इसको लेकर जो बयान दे रहे हैं, उससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही  है। अधिकारी से लेकर रैयत तक सब असमंजस में हैं। अभी ताजा उदाहरण 24 सितंबर का है। मंत्री ने सर्वे में आ रही दिक्कतों को दूर करने तथा सुझाव और शिकायत दर्ज कराने के लिए एक टॉल फ्री नंबर जारी किया। नंबर है-18003456215। मजेदार बात यह है कि यह नंबर हमेशा व्यस्त मिलता है। मैंने दो दिन में करीब 10 बार फोन किया लेकिन जवाब हमेशा एक ही रहता है। चाहें तो आप भी कोशिश कर सकते हैं।

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सर्वे की अंतिम तिथि के बारे में सरकार के जिम्मेवार लोग खुद भ्रम फैला रहे हैं। ग्राम सभाओं में अंतिम तिथि 24 सितंबर बताई गई। फिर 7 सितंबर को विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का बयान आया कि कोई अंतिम तिथि नहीं है। 15 सितंबर को उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी दोहराया कि जब तक सभी लोग संतुष्ट नहीं हो जाते, सर्वे का काम जारी रहेगा।


फिर 20 सितंबर को राजस्व मंत्री जायसवाल पूर्णिया में घोषणा करते हैं कि कागजात खोजने के लिए किसानों को 3 महीने का समय दिया गया है। यानी 3 महीने की सीमा रेखा खींच दी गई। कई अखबारों ने इसका मतलब निकाला कि सर्वे तीन माह के लिए स्थगित हो गया।

फिर 24 तारीख को टॉल फ्री नंबर जारी करते हुए विभागीय मंत्री ने कहा कि सर्वे से संबंधित स्वघोषणा देने की तिथि 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। अब इसमें से किस बयान को सही माना जाए, यह सवाल उठ खड़ा हुआ है। उधर मुख्यमंत्री पूरे प्रकरण पर चुप हैं। जमीन मालिक परेशान हैं। उनसे छोटे मोटे काम के भी मोटी रकम वसूली जा रही है। यानी इस सर्वे अभियान को डिरेल करने में सरकार के ही लोग लगे हुए हैं। ऐसे में इसकी सफलता संदिग्ध है। हिंदी में एक शब्द है ढपोरशंख।यह शब्द भूमि सर्वे के संदर्भ में नीतीश कुमार सरकार पर फिट बैठता है। करनी -कथनी का फर्क स्पष्ट है।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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