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मलबे के ढेरों तले दब गई बद्रीनाथ पुरी, गुम हो रही पौराणिक धाराएं

Fri, 26 May 2023 12:47 PM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Fri, 26 May 2023 12:47 PM IST
सार

बैंकुंठ धाम के नाम से भी पुकारे जाने वाले बद्रीनाथ धाम की यात्रा इन दिनों चरम पर पहुंच रही है। जून के महीने में तो सारा ही देश इस हिमालयी तीर्थ की ओर उमड़ पड़ता है। लेकिन आत्मिक शांति देने वाली बद्रीनाथ पुरी इन दिनों चारों ओर मलबे के ढेरों में बदली हुई है।

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Badrinath Master Plan And Crisis: Illegal Construction is Disturbing The Ecosystem Of Badrinath
Badrinath Master Plan - फोटो : Jay Singh Rawat

विस्तार

मास्टर प्लान के नाम पर करोड़ों सनातन धर्मावलम्बियों की आस्था के केन्द्र बद्रीनाथ धाम की रातों-रात कायापलट की सनक के कारण यह सर्वोच्च तीर्थ आज मलबे के ढेरों में तब्दील हो गया है। भारी मशीनों से अलकनन्दा तट समेत जहां तहां खुदाई के कारण इस उच्च हिमालयी क्षेत्र का पारितंत्र प्रभावित हो रहा है। सन् 1974 की विशेष कमेटी की रिपोर्ट की अनदेखी कर किए जा रहे बेतहाशा निर्माण कार्यों और खुदाई के कारण भगवान बद्रीनाथ के अभिषेक के लिए पानी देने वाली क्रूम धारा बंद हो गई है। बद्रीनाथ पुरी के निचले हिस्से में भूधंसाव प्रकट होने के साथ ही कुछ स्थानों पर दरारें देखी जा सकती हैं।

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विशेषज्ञ आशंकित हैं कि अगर भूवैज्ञानिकों की देखरेख में बद्रीनाथ के मास्टर प्लान का निर्माण कार्य नहीं कराया गया और धाम के मौलिक स्वरूप से इसी तरह छेड़छाड़ जारी रही तो भविष्य में केदारनाथ के जैसी आपदा की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।

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कहीं खोद रहे तो कही रौंद रहे हैं धर्म नगरी को

बैंकुंठ धाम के नाम से भी पुकारे जाने वाले बद्रीनाथ धाम की यात्रा इन दिनों चरम पर पहुंच रही है। जून के महीने में तो सारा ही देश इस हिमालयी तीर्थ की ओर उमड़ पड़ता है। लेकिन आत्मिक शांति देने वाली बद्रीनाथ पुरी इन दिनों चारों ओर मलबे के ढेरों में बदली हुई है।

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दानदाताओं द्वारा यात्रियों के आश्रय के लिए बनाई गई धर्मशालाओं की जगह विशाल मलबे के ढेर नजर आ रहे हैं। मास्टर प्लान के नाम पर पंडे पुरोहितों, दुकानदारों तथा हक हकूकधारी समाज की सैकड़ों वर्ष पुरानी बसागत को नए निर्माण के लिए एक झटके में ध्वस्त कर दिया गया है। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के नाम पर बद्रीनाथ मंदिर के चरणों से गुजर रही अलकनंदा के तट को भारी मशीनों से खोदा जा रहा है।

तीर्थयात्री भी किसी तरह दर्शन कर वहां से लौटने को आतुर दिख रहे हैं। यही नहीं बद्रीनाथ मंदिर के लिए स्थानीय ग्रामीणों द्वारा भी सैकड़ों नाली भूमि दान दी गई थी, जिस पर प्रशासन बिना मंदिर समिति को विश्वास में लिए कहीं दुकानें निर्मित करवा रहा है तो कहीं बाकायदा भूमि पूजन कर आवास बनवा रहा है।  

Badrinath Master Plan And Crisis: Illegal Construction is Disturbing The Ecosystem Of Badrinath
Badrinath Master Plan - फोटो : Jay Singh Rawat

पौराणिक महत्व की धाराएं गुम हो गईं

बेतहाशा और अवैज्ञानिक निर्माण के दुष्परिणाम का पहला संकेत क्रूम और प्रह्लाद जलधाराओं के बंद होने से सामने आने लगा है। जहां पर ये धारे थे वहां मलबे के बड़े ढेर नजर आ रहे हैं। ये दोनों ही जल श्रोत पौराणिक महत्व के थे। क्रूम धारा के जल से भगवान बद्रीनाथ का अभिषेक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार मंदिर और बद्रीनाथ पुरी के नीचे बहने वाली अलकनंदा के तट पर जेसीबी मशीनों से की जा रही खुदाई के कारण ये जलधाराएं बन्द हुई हैं और अगर आगे भी इसी तरह काम होता रहा तो बद्रीनाथ के गर्म पानी के तप्तकुण्ड भी एक दिन सूख जाएंगे। जल श्रोतों के नीचे खुदाई करने से अक्सर वे अपना भूमिगत मार्ग बदल देती हैं।

अगर वहां शेषनेत्र झील के आसपास भी इसी तरह भारी मशीनों से खुदाई की गई, तो इस झील का सूखना भी अवश्यंभावी है। यही नहीं रिवर फ्रंट डेवेलपमेंट के नाम पर अलकनन्दा तट पर बड़े पैमाने पर हो रही खुदाई से बद्रीनाथ पुरी का समूचा भूमिगत जलतंत्र अस्तव्यस्त होने की आशंका जताई जा रही है। अगर ये प्राकृतिक गर्म पानी के श्रोत भटक गए तो मंदिर में दर्शन से पहले तीर्थयात्रियों के लिए स्नान की समस्या खड़ी हो जाएगी।

कहीं दरारें कहीं धंसाव दिला रहा जोशीमठ की याद

भारी मशीनों से खुदाई का असर बद्रीनाथ पुरी में भूधंसाव के रूप में दिखाई देने लगा है। बाजार के निचले हिस्से में भूधंसाव साफ नजर आ रह है। कुछ भवनों की बुनियाद खोद डालने से उनके गिरने का खतरा उत्पन्न हो गया है। भूधंसाव के कारण पण्डे पुजारियों की कालोनी, पंचभैया मोहल्ला को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। बाजार गली में दरारें बढ़ गई हैं। प्रशासन ने दरार वाले स्थान के दोनों ओर यात्रियों की सुरक्षा के लिए दीवार खड़ी कर दी है।

रास्ता बंद होने से यात्रियों का आना जाना अब कुबेर गली से किया जा रहा है। बाजार में बिहारीलाल शाह और सरदार जी की दुकान के नाम से पुकारे जाने वाले स्थल तक लगभग 50 मीटर लम्बी दरार प्रकट होने से लोगों को बद्रीनाथ का जोशीमठ जैसा हस्र होने का अंदेशा सता रहा है। लेकिन भूविज्ञानियों का कहना है कि बद्रीनाथ एक समतल स्थल होने के कारण वहां जोशीमठ जैसी नौबत नहीं आएगी।

अलकनन्दा में डाल रहे मलजल संयंत्र की गंदगी

बद्रीनाथ मास्टर प्लान के नाम पर इस पौराणिक स्थल की मौलिकता से छेड़छाड़ तो हो ही रही थी लेकिन निर्माण कंपनी बद्रीनाथ के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लाण्ट के मलमूत्र भरे टैंक को अलकनन्दा में खाली कर गंगा की पवित्रता को भी दूषित कर रही है। एक तरफ सरकार गंगा की पवित्रता और निर्मलता के लिए नमामि गंगे प्रोजेक्ट पर खरबों रुपये खर्च कर रही है और दूसरी तरफ गंगा के उद्गम पर ही उसे मैला कर सरकार के इरादे पर पानी फेरा जा रहा है। मलजल शोधन संयंत्र से अलकनन्दा में प्रवाहित हो रही गंदगी का वीडियो वायरल होने पर करोड़ों सनातन धर्मावलम्बियों की भावनाएं भी आहत हो रही हैं।

Badrinath Master Plan And Crisis: Illegal Construction is Disturbing The Ecosystem Of Badrinath
Badrinath Master Plan - फोटो : Jay Singh Rawat

विशेषज्ञ कमेटी ने मना की थी मौलिक स्वरूप से छेड़छाड़

इससे पहले 1974 में भी बसंत कुमार बिड़ला की पुत्री के नाम पर बने बिड़ला ग्रुप के जयश्री ट्रस्ट ने भी बद्रीनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कर उसे नया स्वरूप देने का प्रयास किया था। उस समय सीमेंट कंकरीट का प्लेटफार्म बनने के बाद 22 फुट ऊंची दीवार भी बन गई थी और आगरा से मंदिर के लिए लाल बालू के पत्थर भी पहुंच गए थे। लेकिन चिपको नेता चण्डी प्रसाद भट्ट एवं गौरा देवी तथा ब्लाक प्रमुख गोविन्द सिंह रावत आदि के नेतृत्व में चले स्थानीय लोगों के आन्दोलन के कारण उत्तर प्रदेश की तत्कालीन हेमवती नन्दन बहुगुणा सरकार ने निर्माण कार्य रुकवा दिया था।

इस सम्बन्ध में 13 जुलाई 1974 को उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री बहुगुणा ने अपने वरिष्ठ सहयोगी एवं वित्त मंत्री नारायण दत्त तिवारी की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी की घोषणा की थी। इस कमेटी में भूगर्व विभाग के विशेषज्ञों के साथ ही भारतीय पुरातत्व विभाग के तत्कालीन महानिदेशक एम.एन. देशपांडे भी सदस्य थे। कमेटी की सिफारिश पर सरकार ने निर्माण कार्य पर पूर्णतः रोक लगवा दी थी।

तिवारी कमेटी ने बद्रीनाथ धाम की भूगर्वीय और भूभौतिकीय एवं जलवायु संबंधी तमाम परिस्थितियों का अध्ययन कर बद्रीनाथ में अनावश्यक निर्माण से परहेज करने की सिफारिश की थी। लेकिन बद्रीनाथ के इतिहास भूगोल से अनविज्ञ उत्तराखंड की मौजूदा सरकार ने मास्टर प्लान बनाने में इस सरकारी विशेषज्ञ कमेटी की सिफारिशों की तक अनदेखी कर दी। जिसका नतीजा सामने आने लगा है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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