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ग्राफिक एरा में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स की खोजों पर कार्यशाला शुरू

Fri, 03 Nov 2017 07:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नोएडा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 03 Nov 2017 07:43 PM IST
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Work shop in Graphic Era University for electronics and electrical research
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स कम्यूनिकेशन सिस्टम्स के क्षेत्र में हो रही नई खोजें दुनिया को बदल सकती हैं। ऐसी ही कुछ खोजों पर दुनिया के कई प्रमुख संस्थानों के विशेज्ञों ने आज ग्राफिक एरा में चर्चा की। रिसेन्ट इनोवेशन्स इन इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन सिस्टम्स विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस के पहले दिन विशेषज्ञों ने चलते-चलते खुद चार्ज होने वाली मानव रहित गाड़ियां, तार रहित बिजली वितरण, स्मार्ट मीटर जो बिजली चोरी का भी पता लगा सकते हैं और पेस मेकर जो दिल में पड़ने वाले तनावों के मुताबिक काम कर सकते हैं जैसे शोध कार्यों पर प्रकाश डाला। संभावना है कि जल्द ही ये शोध कार्य अपने अंजाम तक पहुंचेंगे।
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कान्फ्रेन्स में बोलते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ आकलैण्ड, न्यूजीलैण्ड के प्रोफेसर डॉ. नितिष पटेल ने बताया कि 1990 से 2000 के बीच दुनिया भर में खराब हुए पेस मेकरों में से 41 प्रतिशत (करीब दो लाख) कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग में गलतियों के कारण फेल हुए थे। प्रो. पटेल ने कहा कि उनके विश्वविद्यालय में मैथेमैटिकल दिलों को आपातकाल में मानव दिल द्वारा झेले जाने वाले अलग अलग स्तर के तनाव देकर पेस मेकर द्वारा किए जाने वाले काम पर शोध चल रहा है। उन्होंने तार रहित बिजली वितरण, चलते चलते चार्ज होने वाले बैटरी चलित वाहनों पर भी प्रस्तुति दी।
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मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी, इलाहाबाद के प्रो. डॉ. आशीष कुमार सिंह ने ’पावर क्वालिटी इश्यूज इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि पावर इन्डस्ट्री में पिछले सौ सालों में जो बदलाव हुए हैं उससे कहीं ज्यादा आने वाले दस सालों में होंगे। पावर क्वालिटी मॉनीटिरिंग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पश्चात्य देशों की तर्ज पर भारत में भी स्मार्ट मीटरों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग होना चाहिए। एम.एम.एम. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के कुलपति प्रो. (डा.) एस. एन. सिंह ने मूविंग टूवर्डस स्मार्ट इलैक्ट्रिक ग्रिड इन इण्डिया विषय पर प्रस्तुति दी।

ग्राफिक एरा विष्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. (डा.) आर. सी. जोशी ने कहा कि विश्व भर में ऊर्जा की मांग तो बढ़ती जा रही है पर पारम्परिक ऊर्जा स्त्रोत कम होते जा रहे हैं। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा नई खोजों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 90 के दशक में इन्टरनेट सबसे बड़ा इनोवेशन था और आज उससे भी बड़ा इनोवेषन आई.ओ.टी. (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) है। कुलपति प्रो. (डा.) एल. एम. एस. पालनी ने अंग्रेजी कहावत ’नेसेसिटी इज दा मदर ऑफ इनवेंशन’ सुनाते हुए कहा कि आज तक जो भी नये अविष्कार हुए हैं किसी न किसी आवश्यकता के कारण हुए हैं और ये सिलसिला आगे भी चलता रहेगा।

ग्राफिक एरा में नई शोधों पर कार्यशाला में 50 शोध पत्र प्रस्तुत

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यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स कम्यूनिकेशन सिस्टम के क्षेत्र की नई खोजों की इंटरनेशनल कांफ्रेन्स के दूसरे दिन विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर सांईस विभाग द्वारा इस विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया गया।

ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर सांईस विभाग के श्री वैभव अग्रवाल कम कीमत वाले सॉफ्टवेयर की मदद से एक स्मार्टफोन से अन्य मोबाइलों को चार्ज करने की तकनीक पर शोध कर रहे हैं। सम्भावना है कि यह शोध जल्द ही अपने अंजाम तक पहुंचेगा। कॉन्फ्रेन्स के दूसरे दिन यू.के. की बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. मैक शर्मा ने आई.ओ.टी., डाटा और डिसीजन सपोर्ट विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ प्रिटोरिया के प्रोफेसर डा. आर. सी. बंसल ने स्मार्ट ग्रिड टेक्नोलॉजी जिस विषय पर हो रहे नये शोध कार्यों पर प्रकाश डाला।

आई.आई.टी. रूड़की के प्रोफेसर डा. नागेंद्र प्रसाद पाठक ने नॉन इनवेसिव आर.एफ. सेन्सर विषय पर और आई.आई.टी. रूड़की के ही प्रोफेसर डा. वाई. वी. हूटे ने रोबस्टपी आई.डी. कन्ट्रोलर डिजाइन विषय पर प्रस्तुतियां दी। कॉन्फ्रेंस के संयोजक मण्डल के सदस्य और इलेक्ट्रिल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डा. पद्मनाभ ठाकुर ने बताया कि कार्यशाला के दूसरे दिन चार तकनीकी सत्रों का आयोजन भी किया गया। वैभव अग्रवाल के साथ ही बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी की सुश्रि मिताली महेश, एम.एन.आई.टी., जयपुर के श्री जितेन्द्र कुमारनामा, एम.एम.एम. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के बृजेषकुमार और ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के शुभम नेगी के शोध पत्रों के मिलाकर कुल 25 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस दो दिवसीय कांफ्रेंस में पहुंचे 100 राष्ट्रीय और अंतर्राश्ट्रीय शोध पत्रों में से कुल 50 प्रस्तुति के लिए चयनित किए गए थे। कांफ्रेंस का अायोजन विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग ने यूसर्क और सी.एस.आई.आर. नईदिल्ली के सहयोग से किया।
 
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