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34 साल बाद इस कुंड में फिर दिखा मगरमच्छ
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 23 Mar 2017 04:19 PM IST
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- फोटो : Internet
धौलपुर के मचकुण्ड तालाब में 34 साल बाद फिर मगरमच्छ दिखा है। इस पर यहां लोगों में अजीब सा डर बना हुआ है। साथ ही मगरमच्छ देखने वालों की भीड़ भी यहां जुटी हुई है।
जानकारी के अनुसार मचकुण्ड तालाब में दो मगरमच्छ के आना लोगों के लिए कौतुहल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि बुधवार को भी उन्हें गुरुद्वारा घाट के किनारे मगरमच्छ बैठा हुआ दिखाई दिया। यह मगरमच्छ करीब दो से तीन घंटे तक घाट के किनारे बैठा रहा, बाद में फिर से पानी में चला गया। इस बारे में मचकुंड महंत कृष्णदास ने कहा है कि उन्होंने 34 साल के कार्यकाल में आज तक इस कुंड में मगरमच्छों का वास नहीं देखा। अब इस कुंड में ये दोनों मगरमच्छ कहां से और कैसे आ गए यह रहस्यमय बना हुआ है।
उधर, लोगों की आस्था से जुड़े इस तालाब में मगरमच्छ के आने से श्रद्धालुओं में भय व्याप्त है। इस पवित्र सरोवर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के सरोवर में आने की खबर ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी में रहने वाले जीवों के लिए यह समय प्रजनन काल होता है और मगरमच्छ भी इस समय ही प्रजनन करते हैं। वन विभाग ने कुंड में तीन से चार मगरमच्छ होने का अंदेशा जताया है।
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जानकारी के अनुसार मचकुण्ड तालाब में दो मगरमच्छ के आना लोगों के लिए कौतुहल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि बुधवार को भी उन्हें गुरुद्वारा घाट के किनारे मगरमच्छ बैठा हुआ दिखाई दिया। यह मगरमच्छ करीब दो से तीन घंटे तक घाट के किनारे बैठा रहा, बाद में फिर से पानी में चला गया। इस बारे में मचकुंड महंत कृष्णदास ने कहा है कि उन्होंने 34 साल के कार्यकाल में आज तक इस कुंड में मगरमच्छों का वास नहीं देखा। अब इस कुंड में ये दोनों मगरमच्छ कहां से और कैसे आ गए यह रहस्यमय बना हुआ है।
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उधर, लोगों की आस्था से जुड़े इस तालाब में मगरमच्छ के आने से श्रद्धालुओं में भय व्याप्त है। इस पवित्र सरोवर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के सरोवर में आने की खबर ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी में रहने वाले जीवों के लिए यह समय प्रजनन काल होता है और मगरमच्छ भी इस समय ही प्रजनन करते हैं। वन विभाग ने कुंड में तीन से चार मगरमच्छ होने का अंदेशा जताया है।
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