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सावधानी पूर्वक जांच के बाद समाप्त की जानी चाहिए स्कूल की मान्यता समाप्त-हाईकोर्ट

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2020 03:56 PM IST
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School accreditation should be terminated after careful examination- High court
सावधानी पूर्वक जांच के बाद समाप्त की जानी चाहिए स्कूल की मान्यता समाप्त-हाईकोर्ट -याचिका पर सीबीएसई के फैसले पर लगाई रोक, सीबीएसई ने की थी स्कूल की मान्यता समाप्त अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली, 19 अप्रैल दिल्ली हाईकोर्ट ने दक्षिणी दिल्ली के एक निजी स्कूली की अस्थायी मान्यता समाप्त करने के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में सीबीएसई से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की एकल पीठ ने सीबीएसई के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी स्कूल की मान्यता खत्म करना कठोर कदम है जिसका इसके छात्रों की शैक्षणिक प्रगति पर असर पड़ता है और सावधानीपूर्वक ‘‘जांच’’ के बाद ही ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए। पीठ ने स्कूल मान्यता समाप्त किए जाने पर सीबीएसई से 26 मई तक जवाब मांगा है। सीबीएसई ने 12 मार्च को दक्षिणी दिल्ली स्थित एक निजी स्कूल की अस्थाई मान्यता को समाप्त करने का फैसला किया था। सीबीएसई के फैसले को स्कूल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसी याचिका के आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीएसई का रुख जानने के लिए नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि याचिका पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि मान्यता समाप्त करने के कारण उचित प्रतीत नहीं होते, जिन्हें स्कूल की याचिका पर सुनवाई के बाद तय किया जा सकता है। याचिका में स्कूल ने तर्क दिया है कि अगर स्कूल की मान्यता समाप्त होती है तो वहां पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। याचिका में कहा गया है कि अगर स्कूल ने कोई गलती की है तो यह देखा जाना है कि क्या यह इतना गंभीर है कि स्कूल की मान्यता ही समाप्त की जाए।  उल्लेखनीय है कि सीबीएसई के आदेश के मुताबिक स्कूल में एक शिक्षक को पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक (पीजीटी) के तौर पर नियुक्त किया गया था, जबकि उनके पास उपयुक्त योग्यता नहीं थी, पद के लिए प्रिंसिपल भी योग्य नहीं थीं और स्कूल की प्रबंधन समिति मालिकाना प्रकृति की थी। इसी आधार पर सीबीएसई  ने स्कूल के खिलाफ यह फैसला सुनाया था।  वहीं स्कूल ने कोर्ट को बताया कि निरीक्षण समिति की अक्टूबर 2016 की रिपोर्ट में पाया गया कि पीजीटी के तौर पर शिक्षक की नियुक्ति चूक थी, जबकि प्रिंसिपल की योग्यता के बारे में लगाए गए आरोप सही नहीं थे। ------ अरुण कुमार
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