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डीम्ड यूनिवर्सिटी की डिग्री के निलंबन पर रियायत का फैसला करेगा सुप्रीम कोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Tue, 09 Jan 2018 05:41 AM IST
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चार डीम्ड यूनिवर्सिटी से वर्ष 2001 से 2005 के बीच मिली इंजीनियरिंग की डिग्रियों को निलंबित करने पर सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर विचार कर फैसला देगा। इससे प्रभावित छात्रों ने डिग्रियां निलंबित करने के आदेश पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से रियायत देने की गुहार लगाई। इनमें से कई छात्र इन्फोसिस, माइक्रोसॉफ्ट, डेल आदि बड़ी आईटी कंपनियों में कार्यरत हैं तो कई आईटीबीपी और डीआरडीओ में। इन सभी की डिग्री 15 जनवरी से निलंबित हो रही है।
न्यायमूर्ति आदर्श गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने सोमवार को छात्रों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। शीर्ष अदालत अब शुक्रवार को इस पर अपना फैसला सुनाएगी। याचिका दायर करने वाले करीब दो सौ छात्रों ने इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ (उदयपुर), इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज (राजस्थान) और विनायक मिशन रिसर्च फाउंडेशन (तमिलनाडु) डीम्ड यूनिवर्सिटी से वर्ष 2001 से 2005 के बीच इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी।
पढ़ें- 123 शैक्षणिक संस्थाओं पर अपने नाम के साथ विश्वविद्यालय शब्द का इस्तेमाल करने पर लगी रोक
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न्यायमूर्ति आदर्श गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने सोमवार को छात्रों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। शीर्ष अदालत अब शुक्रवार को इस पर अपना फैसला सुनाएगी। याचिका दायर करने वाले करीब दो सौ छात्रों ने इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ (उदयपुर), इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज (राजस्थान) और विनायक मिशन रिसर्च फाउंडेशन (तमिलनाडु) डीम्ड यूनिवर्सिटी से वर्ष 2001 से 2005 के बीच इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी।
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गत तीन नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन चारों डीम्ड यूनिवर्सिटी से वर्ष 2005 के बाद इंजीनियरिंग की डिग्री को निरस्त कर दिया था जबकि वर्ष 2001 से 2005 के बीच इन चारों विश्वविद्यालयों से इंजीनियरिंग की डिग्री निलंबित कर दी थी। हालांकि 2001 से 2005 के बीच डिग्री हासिल करने वाले को रियायत दी गई थी। इन छात्रों को अपनी डिग्री बचाने के लिए एआईसीटीई की परीक्षा में बैठना होगा। परीक्षा में सफल होने पर उनकी डिग्री बच सकती है।
सोमवार को अलग-अलग छात्रों के समूह की ओर से कई वकीलों ने दलीलें पेश की। उनका कहना था कि बीटेक की डिग्री निलंबित होने से उनकी नौकरी खतरे में पड़ गई है। उनका कहना था कि 10-12 वर्ष पढ़ाई पूरी कर चुके लोगों के लिए फिर से परीक्षा देना मुश्किल है। कुछ छात्रों ने वर्ष 2001 से 2005 के बीच इन डीम्ड यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री हासिल की और आगे की पढ़ाई (एमटेक, मैनजमेंट आदि) आईआई आदि प्रतिष्ठित संस्थानों से की और वे अच्छी जगहों पर नौकरी कर रहे हैं।
कुछ छात्रों का यह भी कहना था कि आदेश में सिर्फ बीटेक की डिग्री निलंबित करने की बात है लेकिन डिप्लोमा, एमटेक आदि की भी डिग्री को निलंबित किया जा रहा है। उनका कहना था कि कई ने पंजीकृत संस्थानों से बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद इनमें से एक डीम्ड यूनिवर्सिटी से एमटेक आदि की डिग्री ली। ऐसे लोगों के समक्ष भी नौकरी का संकट आ गया है। छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से रियायत बरतने की गुहार की है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट छात्रों के अलग-अलग समूह के लिए अलग-अलग आदेश पारित करेगा।
सोमवार को अलग-अलग छात्रों के समूह की ओर से कई वकीलों ने दलीलें पेश की। उनका कहना था कि बीटेक की डिग्री निलंबित होने से उनकी नौकरी खतरे में पड़ गई है। उनका कहना था कि 10-12 वर्ष पढ़ाई पूरी कर चुके लोगों के लिए फिर से परीक्षा देना मुश्किल है। कुछ छात्रों ने वर्ष 2001 से 2005 के बीच इन डीम्ड यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री हासिल की और आगे की पढ़ाई (एमटेक, मैनजमेंट आदि) आईआई आदि प्रतिष्ठित संस्थानों से की और वे अच्छी जगहों पर नौकरी कर रहे हैं।
कुछ छात्रों का यह भी कहना था कि आदेश में सिर्फ बीटेक की डिग्री निलंबित करने की बात है लेकिन डिप्लोमा, एमटेक आदि की भी डिग्री को निलंबित किया जा रहा है। उनका कहना था कि कई ने पंजीकृत संस्थानों से बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद इनमें से एक डीम्ड यूनिवर्सिटी से एमटेक आदि की डिग्री ली। ऐसे लोगों के समक्ष भी नौकरी का संकट आ गया है। छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से रियायत बरतने की गुहार की है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट छात्रों के अलग-अलग समूह के लिए अलग-अलग आदेश पारित करेगा।