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पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी, गहरा सकता है बिजली का सकंट
रिंपी गुप्ता/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
Updated Sun, 21 May 2017 09:18 AM IST
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थर्मल प्लांटों के सामने भारी मुसीबत
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पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी हो गई है। जबकि पैडी सीजन सिर पर है। ऐसे में अगर इसी तरह से कोयले की कमी प्लांटों पर बनी रही, तो सूबे में बिजली संकट होने का खतरा बन गया है। पावरकॉम के सीएमडी वेणु प्रसाद ने इस मामले का गंभीर नोटिस लेते हुए अधिकारियों को प्लांटों पर तुरंत 30 दिनों का कोयला स्टॉक करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस संबंधी जल्द से जल्द रिपोर्ट भी तलब की गई है।
पंजाब के सभी थर्मल प्लांटों में इस समय कोयले की कमी बन गई है। इनमें पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के बठिंडा, रोपड़ और लहरां मोहब्बत स्थित थर्मल प्लांटों के साथ-साथ राजपुरा व तलवंडी साबो के प्राइवेट थर्मल प्लांट भी शामिल हैं। रोपड़ के प्लांट को छोड़कर बाकी सभी प्लांटों में 15 दिनों से भी कम का कोयला है। जबकि पावरकॉम की ओर से तय नियमों के मुताबिक 30 दिनों के कोयले को ही पर्याप्त माना जाता है और 15 दिनों के कोयले के स्टाक को कम माना गया है।
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पंजाब के सभी थर्मल प्लांटों में इस समय कोयले की कमी बन गई है। इनमें पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के बठिंडा, रोपड़ और लहरां मोहब्बत स्थित थर्मल प्लांटों के साथ-साथ राजपुरा व तलवंडी साबो के प्राइवेट थर्मल प्लांट भी शामिल हैं। रोपड़ के प्लांट को छोड़कर बाकी सभी प्लांटों में 15 दिनों से भी कम का कोयला है। जबकि पावरकॉम की ओर से तय नियमों के मुताबिक 30 दिनों के कोयले को ही पर्याप्त माना जाता है और 15 दिनों के कोयले के स्टाक को कम माना गया है।
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उम्मीद से कम बचा कोयला
थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी
- फोटो : file photo
बठिंडा के थर्मल प्लांट में तो मात्र आठ दिनों का कोयला शेष है। पंजाब में 15 जून से पैडी सीजन शुरू हो रहा है और इस दौरान खास तौर से मौजूदा साल में बिजली की डिमांड काफी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इस साल अप्रैल से ही गर्मी शुरू हो गई है।
पावरकॉम अधिकारियों के मुताबिक इस बार बिजली की मांग पिछले साल की पीक डिमांड 11400 मेगावाट के मुकाबले 13 हजार मेगावाट तक रहने की आशंका है। किसानों को भी आठ घंटे बिजली सप्लाई दी जानी है। पावरकॉम तो पैडी सीजन के लिए पूरी तरह से तैयार रहने के दावे कर रहा है। लेकिन प्लांटों में कोयले की कमी से इन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
पैडी सीजन तो सिर पर है ही, ऊपर से मानसून भी नजदीक है। बारिश के कारण कोयले की आवक प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। बारिश से कोयला खानों में पानी भरने या फिर रेलवे ट्रैक वगैरह टूटने से कोयले की आवक में देरी होने की आशंका रहती है। बावजूद इसके पावरकॉम ने प्लांटों में कोयले के स्टाक को पूरा नहीं किया है।
प्लांट----------कोयले का स्टाक
बठिंडा आठ दिन
लहरां मोहब्बत---13 दिन
रोपड़ -----24 दिन
तलवंडी साबो 14 दिन
राजपुरा ----10 दिन
पावरकॉम अधिकारियों के मुताबिक इस बार बिजली की मांग पिछले साल की पीक डिमांड 11400 मेगावाट के मुकाबले 13 हजार मेगावाट तक रहने की आशंका है। किसानों को भी आठ घंटे बिजली सप्लाई दी जानी है। पावरकॉम तो पैडी सीजन के लिए पूरी तरह से तैयार रहने के दावे कर रहा है। लेकिन प्लांटों में कोयले की कमी से इन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
पैडी सीजन तो सिर पर है ही, ऊपर से मानसून भी नजदीक है। बारिश के कारण कोयले की आवक प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। बारिश से कोयला खानों में पानी भरने या फिर रेलवे ट्रैक वगैरह टूटने से कोयले की आवक में देरी होने की आशंका रहती है। बावजूद इसके पावरकॉम ने प्लांटों में कोयले के स्टाक को पूरा नहीं किया है।
प्लांट----------कोयले का स्टाक
बठिंडा आठ दिन
लहरां मोहब्बत---13 दिन
रोपड़ -----24 दिन
तलवंडी साबो 14 दिन
राजपुरा ----10 दिन