फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   Panipat of Haryana became the king of threads leaving behind Italy

उपलब्धि: इटली को पीछे छोड़ धागों का बादशाह बना पानीपत, इस तकनीक से रोज करोड़ों लीटर पानी भी बचा रहे

Mon, 20 Mar 2023 10:59 PM IST
भूपेंद्र सिंह संदीप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
संदीप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 20 Mar 2023 10:59 PM IST
सार

उत्तर भारत रोटर्स स्पिनर्स एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सचदेवा ने बताया कि रंगीन धागे के उत्पादन में पानीपत ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए इटली को पीछे छोड़ दिया है।

विज्ञापन
Panipat of Haryana became the king of threads leaving behind Italy
पानीपत की एक फैक्टरी में रंगाई करने के बाद सुखाए जाते धागे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

टेक्सटाइल के बाद हरियाणा के पानीपत शहर के धागे भी विश्व में अपना परचम लहरा रहे हैं। रंगीन धागा बनाने में पानीपत अब इटली को पीछे छोड़कर दुनिया में नंबर वन बन गया है। यहां 135 उद्योगों में प्रतिदिन 35 लाख किलोग्राम धागे का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि इटली 20 लाख किलोग्राम उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर है। 

विज्ञापन


पानीपत के धागे की खास बात यह है कि उद्यमी पानी का इस्तेमाल किए बिना जर्मनी में बनी अत्याधुनिक मशीनों से उत्पादन कर रहे हैं। इससे हर रोज करोड़ों लीटर पानी बच रहा है। औद्योगिक नगरी में ऐसी 510 मशीनें लगाई गई हैं, जिन्होंने धागा उद्योग में क्रांति का संचार किया है।
विज्ञापन


एक नई मशीन पुरानी तीन मशीनों के बराबर है। इसकी उत्पाद गुणवत्ता भी पुरानी मशीनों से दोगुनी अच्छी हैं। नई मशीनों के इस्तेमाल से पानीपत में प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में मदद मिली है। पानीपत से कुल 16,000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है, जिसमें धागा व्यापार का बड़ा योगदान है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उद्यमियों और देश के लिए गर्व का विषय : सचदेवा
उत्तर भारत रोटर्स स्पिनर्स एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सचदेवा ने बताया कि रंगीन धागे के उत्पादन में पानीपत ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए इटली को पीछे छोड़ दिया है। यह उद्यमियों के लिए ही नहीं बल्कि देश के लिए भी गर्व का विषय है। यहां बिना पानी इस्तेमाल के रंगीन धागे का उत्पादन किया जा रहा है। हर रोज 35 लाख किलोग्राम धागे का उत्पादन हो रहा है, जो विश्व में सबसे ज्यादा है। यह जर्मनी की अत्याधुनिक मशीनों की मदद से संभव हुआ है।

इटली से ऐसे निकला आगे 

  • 35,00,000 किलो धागे का पानीपत में प्रतिदिन उत्पादन
  • 20,00,000 किलोग्राम का ही उत्पादन कर रहा इटली


उत्पादन दोगुना, गुणवत्ता भी अच्छी
अत्याधुनिक जर्मन मशीनों के इस्तेमाल से तीन साल में धागे का उत्पादन बढ़कर दोगुना से अधिक हो चुका है। इसकी गुणवत्ता भी दूसरे देशों के धागे से अच्छी मानी जाती है।

60 से अधिक देशों में इस्तेमाल
पानीपत के धागे का घरेलू बाजार के साथ दुनिया के कई देशों में निर्यात हो रहा है। 60 से अधिक देशों में यहां के धागे का इस्तेमाल होता है। सबसे अधिक खपत यूरोप में होती है। पानीपत के धागे से महंगी टी-शर्ट बनाई जा रही हैं। कंबल उद्यमी भी अब धागा उत्पादन में कदम रख रहे हैं।  



खास बात
पानीपत से, 16,000 करोड़ का निर्यात होता है  जिसमें धागा उद्योग का बड़ा योगदान है। जर्मन मशीनों की मदद से हर रोज करोड़ों लीटर पानी बच रहा है। यह प्रदूषण नियंत्रण में भी मददगार है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed