{"_id":"57ded9ea4f1c1b1d0aa825b2","slug":"now-k-hard-military-action-needed-defense-expert","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हमला सीधा सेना पर हुआ है, बयानबाजी नहीं अब लें एक्शन : मेजर जनरल ( रि.) एजेबी जैनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमला सीधा सेना पर हुआ है, बयानबाजी नहीं अब लें एक्शन : मेजर जनरल ( रि.) एजेबी जैनी
विपिन धनकड़, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Sep 2016 05:38 PM IST
सार
रक्षा विशेषज्ञों और रिटायर आर्मी अधिकारियों का कहना
ईट का जवाब पत्थर से देने का वक्त, बदलना होगा रुख
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uri attack
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के उड़ी में आर्मी के बेस कैंप पर हुए आतंकवादी हमले को लेकर जानकारों का कहना है कि अब कश्मीर में हार्ड मिलिट्री एक्शन की जरूरत है। हमला सीधा सेना पर हुआ है। जिस तरह का राजनीति माहौल पिछले कुछ महीनों में बना, उससे तय था कि ऐसी हरकत जरूर होगी। अब वक्त ईट का जवाब पत्थर से देने का है। सेना इसके लिए पूरी तरह सक्षम है। पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को लेकर एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र असेंबली में उठाने जा रहा है। बलूचिस्तान पर भारत के स्टैंड से पाकिस्तान बिदक गया है। हार्ड एक्शन से ही उसे नियंत्रित किया जा सकता है।
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सेना को स्ट्रांग एक्शन लेने दिया जाए
jaini
- फोटो : अमर उजाला
सेना को स्ट्रांग एक्शन लेने दिया जाए
1971 की जंग लड़ चुके आर्मी के रिटायर मेजर जनरल एजेबी जैनी का कहना है उड़ी में सेना के कैंप पर जो हमला हुआ, उसके लिए सिर्फ पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है। जम्मू-कश्मीर को लेकर चल रही राजनीति भी जिम्मेदार है। मुझे हमले पर आश्चर्य नहीं हो रहा। बलूचिस्तान को लेकर भारत ने जो रुख अपनाया, उसके बाद यह होना ही था। सेना का काम सरकार चलाना नहीं है। बल्कि बिगडे़ हालात को सुधारकर सरकार चलाने योग्य बनाना है। कश्मीर में बिगड़े हालात के बाद सेना ने यह काम कर दिया था। सेना के 17 जवानों की जान जाने में सरकार का फेल्योर भी है। कश्मीर को लेकर पीडीपी की नीयत शुरू से गंदी रही है। मेजर जनरल जैनी का कहना है ऐसे में सरकार को तीन कदम उठाने चाहिए। जम्मू-कश्मीर में ऐसा मजबूत गवर्नर बनाया जाए, जो वहां के हालात और भौगोलिक स्थिति से खासा परिचित हो। आर्मी स्ट्रांग एक्शन ले। अब यूनिफाइट कमांड बनाने की आवश्यकता है। जिससे में सभी फोर्स के लोग शामिल हो और उसकी कमान प्रधानमंत्री के हाथ में हो। अहम यह भी है कि राजनीतिक बयानबाजी से बचें, एक्शन लें।
1971 की जंग लड़ चुके आर्मी के रिटायर मेजर जनरल एजेबी जैनी का कहना है उड़ी में सेना के कैंप पर जो हमला हुआ, उसके लिए सिर्फ पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है। जम्मू-कश्मीर को लेकर चल रही राजनीति भी जिम्मेदार है। मुझे हमले पर आश्चर्य नहीं हो रहा। बलूचिस्तान को लेकर भारत ने जो रुख अपनाया, उसके बाद यह होना ही था। सेना का काम सरकार चलाना नहीं है। बल्कि बिगडे़ हालात को सुधारकर सरकार चलाने योग्य बनाना है। कश्मीर में बिगड़े हालात के बाद सेना ने यह काम कर दिया था। सेना के 17 जवानों की जान जाने में सरकार का फेल्योर भी है। कश्मीर को लेकर पीडीपी की नीयत शुरू से गंदी रही है। मेजर जनरल जैनी का कहना है ऐसे में सरकार को तीन कदम उठाने चाहिए। जम्मू-कश्मीर में ऐसा मजबूत गवर्नर बनाया जाए, जो वहां के हालात और भौगोलिक स्थिति से खासा परिचित हो। आर्मी स्ट्रांग एक्शन ले। अब यूनिफाइट कमांड बनाने की आवश्यकता है। जिससे में सभी फोर्स के लोग शामिल हो और उसकी कमान प्रधानमंत्री के हाथ में हो। अहम यह भी है कि राजनीतिक बयानबाजी से बचें, एक्शन लें।
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बिना सख्त एक्शन नहीं मानेगा पाक
attack
‘पाकिस्तान में चार सैन्य तख्तापलट और उसका भारत की सिक्योरिटी पर असर’ प्रोजेक्ट पर काम कर रहे डॉ. हरवीर सिंह का मत है कि बिना सख्त एक्शन के पाकिस्तान मानने वाला नहीं है। जैसे को तैसा कार्रवाई चाहिए। आतंकवाद पाकिस्तान की स्टेट पॉलिसी है। वहां की सेना भारत के खिलाफ नफरत और डर पैदा कर फायदा उठा रही है। पाकिस्तान सेना प्रमुख राहिल शरीफ ने हाल में बयान दिया कि कश्मीर पाकिस्तान की लाइफ लाइन है। पाकिस्तान सोमवार से होने जा रही यूनाइटेड नेशन की जनरल एसेंबली में कश्मीर का मुद्दा उठाएगा। 195 देश इसमें भाग लेंगे। बलूचिस्तान पर भारत को अपना स्टैंड और तेज करना चाहिए। बलूचिस्तान के अलावा गिलकिस्तान में भी अलगाववाद बढ़ाने की आवश्यकता है। हमले के जवाब में आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप पर इंटेलीजेंस और ड्रोन के जरिए सूचना लेकर हमले करने की जरूरत है। यह वक्त घुसपैठ का है।
परमाणु हमले की पाक की 11वीं धमकी
sanjay
- फोटो : अमर उजाला
आतंकवादी हमले के बाद भारत के कड़े रुख पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बयान दिया कि अगर भारत की सेना ने पाकिस्तान की जमीन पर कदम रखा तो वह परमाणु हमला करने से भी नहीं चूकेंगे। पाकिस्तान परमाणु हमले की धमकी देता रहा है। रक्षा अध्ययन के विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार का कहना है भारत को परमाणु हमले की पाकिस्तान ने यह 11वीं बार धमकी दी है। 1991 के बाद सिर्फ दो देश पाकिस्तान और नॉर्थ कोरिया परमाणु हमले की धमकी देते रहे हैं। विश्व में सबसे ज्यादा परमाणु हमले की धमकी रूस ने 22 बार अमेरिका ने 16 बार (शीत युद्ध के दौरान) दी। ब्रिटेन, चीन और फ्रांस ने एक-एक बार यह धमकी दी। अहम बात यह है कि परमाणु हमले के मामले में पाकिस्तान फर्स्ट स्ट्राइक कंट्री और भारत सेकेंड स्ट्राइक कंट्री है। फर्स्ट स्ट्राइक का मतलब देश परमाणु हमला कर तो सकता है, लेकिन अगर उस पर पहले हो जाए तो वह जवाब देने के लिए लायक नहीं बचेगा। भारत सेकेंड स्ट्राइक कंट्री है। अगर भारत पर परमाणु हमला हो जाए तो भी वह उसका जवाब देकर हमला करने वाले को नेस्तनाबूद कर सकता है। जानकारों के मुताबिक यह वजह है कि पाक की परमाणु हमले की धमकी सिर्फ गीदड़ भभकी है।
आक्रामक होने की आवश्यकता
dayal
- फोटो : अमर उजाला
आक्रामक होने की आवश्यकता
मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी के पूर्व हेड डॉ. जगेश्वर दयाल का कहना है आतंकवादियों ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। ऐसा भी नहीं कि जंग के हालात बन गए हैं। बलूचिस्तान पर भारत का रुख और जम्मू-कश्मीर में सेना की सख्ती दिखाने के बाद से ऐसे किसी हमले की आशंका थी। भारत को अपनी पॉलिसी में और आक्रामकता लानी होगी। पलटवार की जरूरत है। कश्मीर की सरकारें रही हो या अलगाववादी, इन्होंने हालातों को बेहतर बनाने से ज्यादा बिगाड़ने का काम किया है। इस हमले के बाद टेंशन बढ़ना लाजिमी है। ऐसा नहीं है कि दोनों तरफ से फौजों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। लेकिन भारत को इस पर सख्त एक्शन लेने की जरूरत है।
मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी के पूर्व हेड डॉ. जगेश्वर दयाल का कहना है आतंकवादियों ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। ऐसा भी नहीं कि जंग के हालात बन गए हैं। बलूचिस्तान पर भारत का रुख और जम्मू-कश्मीर में सेना की सख्ती दिखाने के बाद से ऐसे किसी हमले की आशंका थी। भारत को अपनी पॉलिसी में और आक्रामकता लानी होगी। पलटवार की जरूरत है। कश्मीर की सरकारें रही हो या अलगाववादी, इन्होंने हालातों को बेहतर बनाने से ज्यादा बिगाड़ने का काम किया है। इस हमले के बाद टेंशन बढ़ना लाजिमी है। ऐसा नहीं है कि दोनों तरफ से फौजों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। लेकिन भारत को इस पर सख्त एक्शन लेने की जरूरत है।
रक्षा विशेषज्ञों और रिटायर आर्मी अधिकारियों का कहना
ईट का जवाब पत्थर से देने का वक्त, बदलना होगा रुख