{"_id":"6a9b82b13166f7ab9202f471","slug":"iaea-finds-iran-in-noncompliance-after-20-years-un-security-council-referral-proposed-2026-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर छाया संकट: पहली बार आईएईए ने माना नियमों का पालन नहीं हुआ, क्या लगेगा प्रतिबंध?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर छाया संकट: पहली बार आईएईए ने माना नियमों का पालन नहीं हुआ, क्या लगेगा प्रतिबंध?
Sat, 05 Sep 2026 08:17 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 05 Sep 2026 08:17 AM IST
सार
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा अंतरराष्ट्रीय संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक ले जाने के लिए प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है। 20 साल बाद पहली बार आईएईए ने ईरान को परमाणु अप्रसार की जिम्मेदारियों का पालन न करने वाला क्यों माना? क्या निरीक्षकों को प्रवेश न देने और 60 फीसदी तक समृद्ध यूरेनियम के भंडार ने संकट को और गंभीर बना दिया है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
अब सुरक्षा परिषद में ईरान को घेरने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव अब और बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सामने ऐसा प्रस्ताव रखने की तैयारी की है, जिसमें ईरान को परमाणु अप्रसार की अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन न करने के मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक भेजने की बात है। यह मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि जून 2025 में आईएईए बोर्ड ने करीब 20 साल बाद पहली बार ईरान को अपनी परमाणु अप्रसार संबंधी जिम्मेदारियों का पालन न करने वाला पाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
मसौदे में ईरान के खिलाफ क्या कहा गया?
प्रस्ताव अभी बातचीत के दौर में है और आईएईए बोर्ड को औपचारिक रूप से नहीं सौंपा गया है। इसमें आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से प्रस्ताव और पहले पारित प्रस्तावों को आईएईए के सभी सदस्यों के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा तक पहुंचाने को कहा गया है। प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पैदा चुनौतियों का कूटनीतिक समाधान निकालने का समर्थन भी किया गया है। सभी पक्षों से बातचीत में रचनात्मक तरीके से शामिल होने की अपील की गई है। प्रस्ताव में बदलाव भी संभव है। औपचारिक रूप से पेश होने के बाद इस पर अगले सप्ताह वियना में आईएईए बोर्ड की बैठक में मतदान होगा।
विज्ञापन
ईरान की सबसे बड़ी परेशानी क्या?
परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान पर अपने सभी परमाणु पदार्थ और गतिविधियों की जानकारी देने तथा आईएईए के निरीक्षकों को यह जांचने देने की कानूनी जिम्मेदारी है कि परमाणु सामग्री का इस्तेमाल शांतिपूर्ण कामों के अलावा कहीं नहीं हो रहा। जून 2025 में अमेरिका और इस्राइल के ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद से ईरान ने प्रभावित परमाणु स्थलों पर आईएईए निरीक्षकों को प्रवेश नहीं दिया है। एजेंसी छह महीने से अधिक समय से हथियार बनाने की क्षमता के करीब पहुंच चुके यूरेनियम के भंडार की स्थिति भी सत्यापित नहीं कर पाई है। आईएईए ने हाल में चेतावनी दी कि निरीक्षकों को प्रवेश न देना और परमाणु सामग्री की पुष्टि न हो पाना प्रसार का जोखिम पैदा करता है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
विज्ञापन
ईरान के पास कितना यूरेनियम और खतरा कितना बड़ा?
- आईएईए के अनुसार ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है, जिसे 60 फीसदी तक शुद्धता पर समृद्ध किया गया है।
- हथियार बनाने के लिए आम तौर पर करीब 90 फीसदी शुद्धता वाला यूरेनियम चाहिए होता है। यानी ईरान का मौजूदा भंडार तकनीकी रूप से उस स्तर से बहुत दूर नहीं है।
- आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पिछले साल कहा था कि यह मात्रा ईरान को सैद्धांतिक रूप से 10 परमाणु बम बनाने में सक्षम कर सकती है, अगर वह अपने कार्यक्रम को हथियार बनाने की दिशा में ले जाने का फैसला करे।
- उन्होंने साफ किया था कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास परमाणु हथियार मौजूद है।