{"_id":"6a68c5b6bc3c4a6be50db0f7","slug":"millions-of-citizens-have-extended-their-support-to-the-demand-for-cow-protection-2026-07-28","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: देशभर में गूंजा गो सम्मान आह्वान, करोड़ों नागरिकों ने गोसंरक्षण की मांग को दिया समर्थन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: देशभर में गूंजा गो सम्मान आह्वान, करोड़ों नागरिकों ने गोसंरक्षण की मांग को दिया समर्थन
Tue, 28 Jul 2026 08:37 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 28 Jul 2026 08:37 PM IST
सार
जिलाधिकारी कार्यालयों में पहुंचे प्रतिनिधिमंडलों ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए गोसंरक्षण से जुड़ी विभिन्न मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।
विज्ञापन
गोसंरक्षण की मांग को लेकर ज्ञापन
- फोटो : संवाद
विस्तार
गोमाता की सेवा, सुरक्षा और सम्मान को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाए जाने की मांग को लेकर चलाए जा रहे "गो सम्मान आह्वान" अभियान के दूसरे चरण ने को देशव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर लिया। अभियान के आयोजकों के अनुसार, देशभर से 15 करोड़ से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षर एकत्र कर संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यों के राज्यपालों एवं मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भेजे गए।
देश के विभिन्न राज्यों के जिला मुख्यालयों पर सुबह से ही संत-महात्मा, गोसेवक, किसान, मातृशक्ति, युवा एवं अनेक सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में एकत्र हुए। कार्यक्रम की शुरुआत गोमाता के पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद एवं सामूहिक प्रार्थना के साथ हुई। इसके पश्चात विभिन्न जिलों में शांतिपूर्ण एवं अनुशासित प्रार्थना-यात्राएं निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर गोसंरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
प्रार्थना-यात्राओं के दौरान सुसज्जित गोमाता एवं बछड़ों की शोभायात्राएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। प्रतिभागियों ने हाथों में अभियान के ध्वज, बैनर एवं संदेश लिखे प्लेकार्ड लेकर गोमाता के संरक्षण, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का संदेश दिया। कई स्थानों पर 15 करोड़ से अधिक हस्ताक्षरों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
विज्ञापन
जिलाधिकारी कार्यालयों में पहुंचे प्रतिनिधिमंडलों ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए गोसंरक्षण से जुड़ी विभिन्न मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया। ज्ञापन में गोहत्या-निषेध के लिए केंद्रीय कानून बनाने, गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान देने, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, गोचर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने, राष्ट्रीय गो-चारा नीति लागू करने सहित 30 से अधिक मांगों का उल्लेख किया गया।
विज्ञापन
देश के विभिन्न राज्यों के जिला मुख्यालयों पर सुबह से ही संत-महात्मा, गोसेवक, किसान, मातृशक्ति, युवा एवं अनेक सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में एकत्र हुए। कार्यक्रम की शुरुआत गोमाता के पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद एवं सामूहिक प्रार्थना के साथ हुई। इसके पश्चात विभिन्न जिलों में शांतिपूर्ण एवं अनुशासित प्रार्थना-यात्राएं निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर गोसंरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
विज्ञापन
प्रार्थना-यात्राओं के दौरान सुसज्जित गोमाता एवं बछड़ों की शोभायात्राएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। प्रतिभागियों ने हाथों में अभियान के ध्वज, बैनर एवं संदेश लिखे प्लेकार्ड लेकर गोमाता के संरक्षण, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का संदेश दिया। कई स्थानों पर 15 करोड़ से अधिक हस्ताक्षरों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
विज्ञापन
जिलाधिकारी कार्यालयों में पहुंचे प्रतिनिधिमंडलों ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए गोसंरक्षण से जुड़ी विभिन्न मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया। ज्ञापन में गोहत्या-निषेध के लिए केंद्रीय कानून बनाने, गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान देने, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, गोचर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने, राष्ट्रीय गो-चारा नीति लागू करने सहित 30 से अधिक मांगों का उल्लेख किया गया।
Trending Videos
अभियान के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रथम चरण में 27 अप्रैल 2026 को देशभर की लगभग 5,000 तहसीलों के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक हस्ताक्षर सरकार तक पहुंचाए गए थे। उनके अनुसार, मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं होने के कारण दूसरे चरण में अभियान को और अधिक व्यापक बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप 15 करोड़ से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गोमाता भारतीय संस्कृति, कृषि परंपरा, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला रही हैं। उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण केवल धार्मिक आस्था तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक कृषि, पशुधन संवर्धन और ग्रामीण विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वक्ताओं ने सरकार से आग्रह किया कि देशभर से प्राप्त जनसमर्थन और करोड़ों नागरिकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अभियान की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय लिया जाए।
आयोजकों ने इस अभियान को जनसहभागिता और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से सम्पन्न यह अभियान देश में गोसेवा और जनजागरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सभी वर्गों से मिले व्यापक समर्थन के आधार पर सरकार गोमाता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।
अंत में अभियान से जुड़े पदाधिकारियों ने संत समाज, किसानों, महिला शक्ति, युवाओं, स्वयंसेवकों तथा विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गोसंरक्षण और जनजागरण के लिए ऐसे प्रयास भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गोमाता भारतीय संस्कृति, कृषि परंपरा, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला रही हैं। उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण केवल धार्मिक आस्था तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक कृषि, पशुधन संवर्धन और ग्रामीण विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वक्ताओं ने सरकार से आग्रह किया कि देशभर से प्राप्त जनसमर्थन और करोड़ों नागरिकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अभियान की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय लिया जाए।
आयोजकों ने इस अभियान को जनसहभागिता और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से सम्पन्न यह अभियान देश में गोसेवा और जनजागरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सभी वर्गों से मिले व्यापक समर्थन के आधार पर सरकार गोमाता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।
अंत में अभियान से जुड़े पदाधिकारियों ने संत समाज, किसानों, महिला शक्ति, युवाओं, स्वयंसेवकों तथा विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गोसंरक्षण और जनजागरण के लिए ऐसे प्रयास भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे।