{"_id":"6ada52e68fdb2c88480e18d0","slug":"pentagon-deep-cover-spy-programme-economic-warfare-china-and-other-us-competitors-report-claims-2026-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारोबारी बनकर चीन में जासूसी करेंगे अमेरिकी एजेंट?: आर्थिक जंग की तैयारी में पेंटागन, रिपोर्ट में खुलासा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
कारोबारी बनकर चीन में जासूसी करेंगे अमेरिकी एजेंट?: आर्थिक जंग की तैयारी में पेंटागन, रिपोर्ट में खुलासा
Thu, 22 Oct 2026 11:46 PM IST
देवेश त्रिपाठी
आईएएनएस, वॉशिंगटन
आईएएनएस, वॉशिंगटन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 22 Oct 2026 11:46 PM IST
सार
अमेरिका चीन के खिलाफ आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए गुप्त जासूसी तंत्र तैयार करने पर विचार कर रहा है। द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में अमेरिकी एजेंट निजी क्षेत्र के पेशेवरों के रूप में काम कर सकते हैं। हालांकि, पेंटागन ने इस दावे को गलत बताया है।
विज्ञापन
चीन की कंपनियों पर अमेरिका की नजर (AI Generated)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पेंटागन चीन और अमेरिका के अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ने के लिए गुप्त जासूसी कार्यक्रम को मजबूत बनाने की योजना पर काम कर रहा है। द वॉशिंगटन पोस्ट ने इस पहल से परिचित आधा दर्जन लोगों के हवाले से यह जानकारी दी है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग ने ऐसी किसी योजना पर काम किए जाने से इनकार किया है।
अखबार के मुताबिक, प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत अमेरिकी एजेंट कारोबारी या निजी क्षेत्र के अन्य पेशेवरों के रूप में अपनी पहचान छिपाकर काम करेंगे। उनकी पहचान का अमेरिकी सरकार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होगा। संबंधित लोगों ने अखबार को बताया कि यह पहल पेंटागन के व्यापक आर्थिक युद्ध अभियान का एक गुप्त हिस्सा होगी।
कौन कर रहा इस सीक्रेट मिशन की तैयारी?
रिपोर्ट के अनुसार, 'नॉनऑफिशियल कवर ऑफिसर्स' (एनओसी) नाम से प्रस्तावित इस कार्यक्रम की निगरानी टॉम राकुसन कर रहे हैं। वह सीआईए में 39 साल तक सेवा दे चुके हैं और फिलहाल उप रक्षा मंत्री स्टीव फीनबर्ग के वरिष्ठ सलाहकार हैं।
विज्ञापन
द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, राकुसन 2021 में सीआईए से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 2017 में वह एजेंसी के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस बने थे। यह पद सीआईए में जासूसी अभियानों के संचालन से जुड़ा सर्वोच्च पद माना जाता है। बाद में उन्होंने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित हस्तक्षेप को लेकर सीआईए की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया था।
अमेरिका की इस गुप्त खुफिया टीम में कौन-कौन शामिल?
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पहल पर काम करने के लिए सैन्य सेवाओं की विभिन्न शाखाओं, खुफिया एवं सुरक्षा मामलों के अवर रक्षा मंत्री के कार्यालय और सीआईए के सेवानिवृत्त अधिकारियों को शामिल किया गया है। हालांकि, इस कार्यक्रम की योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसे परिचालन में नहीं लाया गया है।
पेंटागन में यह कार्यक्रम किस विभाग के तहत काम करेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अखबार के अनुसार, इसे एक स्वतंत्र गुप्त जासूसी इकाई के रूप में बनाया जा सकता है या फिर पेंटागन की मौजूदा गुप्त मानव खुफिया क्षमताओं का विस्तार किया जा सकता है। रक्षा विभाग ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।
जासूसी कार्यक्रम की योजना पर क्या बोला पेंटागन?
पेंटागन के उप प्रेस सचिव जैकब ब्लिस ने अखबार को दिए बयान में कहा, "ऐसा लगता है कि यह सवाल ऐसी जानकारी पर आधारित है, जो बिल्कुल सच नहीं है। जो भी आपको ये दावे बता रहा है, उसे या तो सही जानकारी नहीं है या वह जानबूझकर आपको गुमराह कर रहा है, ताकि अपनी काल्पनिक कहानियों को आगे बढ़ा सके।"
द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, सीआईए ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। राकुसन ने भी टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। अखबार ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस की समितियों को इस पहल के बारे में जानकारी दी गई है।
खुफिया जानकारी जुटाना प्राथमिकता
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आर्थिक युद्ध को अपनी विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के अहम साधन के रूप में अपनाया है। इसके तहत आयात शुल्क और निर्यात नियंत्रण लागू करने, महत्वपूर्ण संसाधनों और तकनीकों में निवेश करने तथा आर्थिक खुफिया जानकारी जुटाने को प्राथमिकता दी जा रही है।
अखबार ने बताया कि सीआईए के उप निदेशक माइकल एलिस ने सितंबर में एक भाषण के दौरान कहा था कि अमेरिका चीन के खिलाफ अपनी जासूसी गतिविधियों का दायरा बढ़ा रहा है। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली चीनी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है।
पूर्व अधिकारियों ने जताई क्या चिंता?
पेंटागन ने इस साल एक आर्थिक रक्षा इकाई भी स्थापित की है। इस इकाई ने तेल और खनिज परियोजनाओं में निवेश किया है। इनमें ब्राजील की एक बड़ी दुर्लभ मृदा खदान के लिए 750 मिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल है। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, शुरुआती चर्चा में जासूसी कार्यक्रम को इसी इकाई के अधीन रखने का विचार भी आया था। हालांकि, मीडिया और कांग्रेस की बढ़ती निगरानी के बीच इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया।
अखबार से बातचीत में पूर्व अधिकारियों ने बताया कि पेंटागन के लिए गुप्त पहचान के साथ जासूसी करना कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। सैन्य सेवा से जुड़े रिकॉर्ड छिपाना मुश्किल होता है। इसके अलावा, बायोमेट्रिक पहचान और डिजिटल गतिविधियों से बनने वाले निशान किसी दूसरे नाम से काम करने के जोखिम को बढ़ा देते हैं।
इस कार्यक्रम को किस कानूनी अधिकार के तहत संचालित किया जा सकेगा, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। इस पहल से परिचित लोगों ने अखबार को बताया कि इसके कानूनी आधार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐतिहासिक रूप से सीआईए विदेशों में मानव खुफिया अभियान चलाने को अपने अधिकार क्षेत्र का हिस्सा मानती रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईए के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने राकुसन पर रक्षा विभाग के भीतर सीआईए जैसा अपना अलग संगठन बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन
अखबार के मुताबिक, प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत अमेरिकी एजेंट कारोबारी या निजी क्षेत्र के अन्य पेशेवरों के रूप में अपनी पहचान छिपाकर काम करेंगे। उनकी पहचान का अमेरिकी सरकार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होगा। संबंधित लोगों ने अखबार को बताया कि यह पहल पेंटागन के व्यापक आर्थिक युद्ध अभियान का एक गुप्त हिस्सा होगी।
विज्ञापन
कौन कर रहा इस सीक्रेट मिशन की तैयारी?
रिपोर्ट के अनुसार, 'नॉनऑफिशियल कवर ऑफिसर्स' (एनओसी) नाम से प्रस्तावित इस कार्यक्रम की निगरानी टॉम राकुसन कर रहे हैं। वह सीआईए में 39 साल तक सेवा दे चुके हैं और फिलहाल उप रक्षा मंत्री स्टीव फीनबर्ग के वरिष्ठ सलाहकार हैं।
विज्ञापन
द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, राकुसन 2021 में सीआईए से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 2017 में वह एजेंसी के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस बने थे। यह पद सीआईए में जासूसी अभियानों के संचालन से जुड़ा सर्वोच्च पद माना जाता है। बाद में उन्होंने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित हस्तक्षेप को लेकर सीआईए की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया था।
अमेरिका की इस गुप्त खुफिया टीम में कौन-कौन शामिल?
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पहल पर काम करने के लिए सैन्य सेवाओं की विभिन्न शाखाओं, खुफिया एवं सुरक्षा मामलों के अवर रक्षा मंत्री के कार्यालय और सीआईए के सेवानिवृत्त अधिकारियों को शामिल किया गया है। हालांकि, इस कार्यक्रम की योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसे परिचालन में नहीं लाया गया है।
पेंटागन में यह कार्यक्रम किस विभाग के तहत काम करेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अखबार के अनुसार, इसे एक स्वतंत्र गुप्त जासूसी इकाई के रूप में बनाया जा सकता है या फिर पेंटागन की मौजूदा गुप्त मानव खुफिया क्षमताओं का विस्तार किया जा सकता है। रक्षा विभाग ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।
जासूसी कार्यक्रम की योजना पर क्या बोला पेंटागन?
पेंटागन के उप प्रेस सचिव जैकब ब्लिस ने अखबार को दिए बयान में कहा, "ऐसा लगता है कि यह सवाल ऐसी जानकारी पर आधारित है, जो बिल्कुल सच नहीं है। जो भी आपको ये दावे बता रहा है, उसे या तो सही जानकारी नहीं है या वह जानबूझकर आपको गुमराह कर रहा है, ताकि अपनी काल्पनिक कहानियों को आगे बढ़ा सके।"
द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, सीआईए ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। राकुसन ने भी टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। अखबार ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस की समितियों को इस पहल के बारे में जानकारी दी गई है।
खुफिया जानकारी जुटाना प्राथमिकता
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आर्थिक युद्ध को अपनी विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के अहम साधन के रूप में अपनाया है। इसके तहत आयात शुल्क और निर्यात नियंत्रण लागू करने, महत्वपूर्ण संसाधनों और तकनीकों में निवेश करने तथा आर्थिक खुफिया जानकारी जुटाने को प्राथमिकता दी जा रही है।
अखबार ने बताया कि सीआईए के उप निदेशक माइकल एलिस ने सितंबर में एक भाषण के दौरान कहा था कि अमेरिका चीन के खिलाफ अपनी जासूसी गतिविधियों का दायरा बढ़ा रहा है। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली चीनी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है।
पूर्व अधिकारियों ने जताई क्या चिंता?
पेंटागन ने इस साल एक आर्थिक रक्षा इकाई भी स्थापित की है। इस इकाई ने तेल और खनिज परियोजनाओं में निवेश किया है। इनमें ब्राजील की एक बड़ी दुर्लभ मृदा खदान के लिए 750 मिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल है। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, शुरुआती चर्चा में जासूसी कार्यक्रम को इसी इकाई के अधीन रखने का विचार भी आया था। हालांकि, मीडिया और कांग्रेस की बढ़ती निगरानी के बीच इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया।
अखबार से बातचीत में पूर्व अधिकारियों ने बताया कि पेंटागन के लिए गुप्त पहचान के साथ जासूसी करना कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। सैन्य सेवा से जुड़े रिकॉर्ड छिपाना मुश्किल होता है। इसके अलावा, बायोमेट्रिक पहचान और डिजिटल गतिविधियों से बनने वाले निशान किसी दूसरे नाम से काम करने के जोखिम को बढ़ा देते हैं।
इस कार्यक्रम को किस कानूनी अधिकार के तहत संचालित किया जा सकेगा, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। इस पहल से परिचित लोगों ने अखबार को बताया कि इसके कानूनी आधार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐतिहासिक रूप से सीआईए विदेशों में मानव खुफिया अभियान चलाने को अपने अधिकार क्षेत्र का हिस्सा मानती रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईए के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने राकुसन पर रक्षा विभाग के भीतर सीआईए जैसा अपना अलग संगठन बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।