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भारतीय ज्ञान प्राप्त होने पर जीवन में दुख स्पर्श भी नहीं कर सकता : प्रोफेसर रामनाथ झा
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23jjrp14- माजरा दूबलधन स्थित तपोभूमि जटेला धाम में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद अतिथि व अन्य। स्र
- फोटो : kathua
बेरी। माजरा दूबलधन स्थित तपोभूमि जटेला धाम में स्वामी नितानंद वाणी प्रचार प्रसार समिति और जनता कॉलेज चरखी दादरी के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा की अनुमोदित स्वामी नितानंद की वाणी : मूल्य चिंतन और सार्थकता विषय पर आयोजित की गई।
स्वामी नितानंद महाराज की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के अध्यक्ष पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास ने सभी वक्ताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्राध्यापकों का स्वागत किया। जनता महाविद्यालय चरखी दादरी के प्राचार्य डॉ. यशवीर सिंह ने संगोष्ठी का परिचय प्रस्तुत किया।
प्रथम सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली से पधारे प्रोफेसर रामनाथ झा ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान प्राप्त होने पर जीवन में दुख स्पर्श भी नहीं कर सकता है। उन्होंने मनीषा पंचकम और मातृ मंचकम जैसे ग्रंथ पढ़ने की ओर प्रेरित किया।
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दूसरे सत्र के वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पूरन चंद टंडन ने संत नितानंद कृत सत्य सिद्धांत प्रकाश में सामाजिकता का बोध, सहजता में गहनता, विद्या माया, अविद्या माया, प्रकृति प्रदत्त भोजन आदि विषयों पर विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि संतों की वाणियों में जीवन जीने की कला है। संगोष्ठी में डॉ. हेमलता शर्मा, डॉ. किरण, डॉ. दयानंद कादयान, डॉ. सुमन कुंडू, डॉ. महेश कुमार, शोधार्थी आशु, मनीषा, पूजा, सुनीता, रजनी, प्रीति मौजूद रहे।
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स्वामी नितानंद महाराज की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के अध्यक्ष पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास ने सभी वक्ताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्राध्यापकों का स्वागत किया। जनता महाविद्यालय चरखी दादरी के प्राचार्य डॉ. यशवीर सिंह ने संगोष्ठी का परिचय प्रस्तुत किया।
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प्रथम सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली से पधारे प्रोफेसर रामनाथ झा ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान प्राप्त होने पर जीवन में दुख स्पर्श भी नहीं कर सकता है। उन्होंने मनीषा पंचकम और मातृ मंचकम जैसे ग्रंथ पढ़ने की ओर प्रेरित किया।
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दूसरे सत्र के वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पूरन चंद टंडन ने संत नितानंद कृत सत्य सिद्धांत प्रकाश में सामाजिकता का बोध, सहजता में गहनता, विद्या माया, अविद्या माया, प्रकृति प्रदत्त भोजन आदि विषयों पर विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि संतों की वाणियों में जीवन जीने की कला है। संगोष्ठी में डॉ. हेमलता शर्मा, डॉ. किरण, डॉ. दयानंद कादयान, डॉ. सुमन कुंडू, डॉ. महेश कुमार, शोधार्थी आशु, मनीषा, पूजा, सुनीता, रजनी, प्रीति मौजूद रहे।