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Hindi News ›   City & states ›   Husband not entitled to relief in case of married woman's unnatural death: Court

विवाहिता की अप्राकृतिक मौत के मामले में पति राहत का हकदार नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 02:15 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि महज 13 महीने में नवविवाहिता की अप्राकृतिक मौत के मामले में आरोपी पति समानता के आधार पर राहत का हकदार नहीं है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने वासुदेव मुरजानी की ओर से जमानत पर रिहाई की मांग को लेकर दाखिल आपराधिक अपील खारिज कर दी।
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मामला कानपुर नगर के काकादेव थाना क्षेत्र का है। विवाहिता सोनी के भाई नीरज सागर ने दिसंबर 2024 में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही वासुदेव और उसके परिजन दहेज को लेकर सोनी को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। 15 लाख रुपये और एक कार की मांग कर रहे थे। इसी दौरान सोनी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई।
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एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने पति, सास और ससुर को जेल भेज दिया था। सास-ससुर की जमानत अर्जी मंजूर होने के बाद पति ने समानता के आधार पर जमानत की मांग के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि विवाहिता रीढ़ की हड्डी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी, जिससे तंग आकर उसने आत्महत्या की। यह भी दलील दी कि शादी दहेज विरोधी निरंकारी भवन में हुई थी। सहआरोपियों सास और ससुर को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में याची भी जमानत का हकदार है।

कोर्ट ने पाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर रस्सी के निशान व फांसी से दम घुटने की पुष्टि हुई है। रीढ़ की हड्डी की बीमारी इतनी गंभीर नहीं थी कि विवाहिता शादी के बाद महज 13 महीने में ऐसा आत्मघाती कदम उठाने के लिए विवश हो जाए। संवाद
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