इमाम ने वीडियो कॉलिंग पर दूल्हे से कहा, क्या तुम्हें निकाह कबूल है, कबूल है
शामली में सऊदी अरब में बैठा दूल्हा और शामली में थी दुल्हन। दूरी सात समंदर पार की, मगर सात जन्मो के बंधन की रस्म तकनीकि सुविधाओं ने चुटकी में संपन्न करा दी। इमाम ने वीडियो कॉलिंग पर दूल्हे से कहा, क्या तुम्हें निकाह कबूल है, तो दूल्हे ने कहा कबूल है, बस फिर क्या था बज गईं तालियां। मिठाई का वितरण हुआ और शादी संपन्न होने पर लोगों ने गले मिलकर खुशियों का इजहार किया।
शामली के मोहल्ला आजाद चौक निवासी रहम इलाही की पुत्री नाहिद अंजुम का रिश्ता बिजनौर के किरतपुर निवासी मोहम्मद आबिद के साथ तय हुआ। आबिद सऊदी अरब में नौकरी करता है। नाहिद अंजुम की चचेरी बहन भी सऊदी अरब में रहती है, उसी ने आबिद और नाहिद अंजुम का रिश्ता जुड़वाया और निकाह की तारीख तय कर दी गई, लेकिन वीजा संबंधित कागजात पूरे न हो पाने की वजह से सऊदी अरब से आबिद भारत नहीं आ सका। इसके बाद दोनों ही परिवार के लोग पशोपेश में आ गए कि आखिर निकाह कैसे संपन्न कराया जाए। इसके बाद उन्होंने मौलाना से संपर्क कर निकाह के नियम कायदों की जानकारी ली तथा दारुल उलूम के डायरेक्शन भी जाने और ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग के जरिये निकाह करने पर सहमति बन गई।
इसी के चलते सोमवार को दूल्हा पक्ष के लोग आबिद के प्रतिनिधि (वकील) के रूप में मोहम्मद नाजिम को साथ लेकर लड़की के घर पहुंचे। फिर शाही जामा मसजिद में इमाम मौलाना शौकीन ने दोनों पक्षों के गवाह इश्तकार और करम इलाही के सामने मेहर की रकम 21 हजार रुपये के साथ सऊदी में बैठे आबिद को वीडियो कॉल कर निकाह की रस्म पूरी कराई गई। एक तरफ सऊदी अरब में बैठे आबिद ने निकाह कबूल फरमाया, तो शामली में उसके प्रतिनिधि (वकील) के रूप में चचेरे भाई नाजिम ने आबिद के लिए नाहिद अंजुम को कबूल किया। इसके बाद सभी ने खुुशी जाहिर की। इसी तरह नाहिद अंजुम ने भी आईएमओ पर आबिद को कबूल कर लिया। यह शादी शुक्रवार को शामली में चर्चा का विषय बनी रही।
सऊदी अरब में भी मना जश्न
एक तरफ दूल्हे आबिद के परिवार के लोग दुल्हन पक्ष के घर शामली पहुंचे, तो आबिद भी सऊदी अरब में नाहिद अंजुम की चचेरी बहन के यहां दूल्हा बनकर पहुंचा था। परिवार के लोगों के मुताबिक दोनों ही जगह शादी की तैयारियां करनी पड़ी। दुल्हन के घर पर बारातियों की मेहमानवाजी की गई, तो सऊदी अरब में चचेरी बहन के यहां दावत का इंतजाम किया गया। शादी संपन्न होने के बाद दोनों ही जगह खुशियां मनाई गईं। मौलाना शौकीन, इमाम शाही जामा मस्जिद शामली ने बताया कि कागजात पूरे नहीं होने के कारण दूल्हा आबिद भारत नहीं आ सका। शादी की तारीख तय थी, जिसके चलते वीडियो कॉल के जरिये निकाह संपन्न कराया गया। प्रतिनिधि (वकील) के तौर पर आबिद के चचेरे भाई ने अपने भाई के लिए निकाह कबूल किया, जिसके बाद शादी संपन्न हो गई।