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जानलेवा हमले में चार दोषियों को दस साल कठोर कारावास और जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने जानलेवा हमला मामले में चार दोषियों को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी को 11,500 रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा। यह हमला 28 जून 2015 को दस लाख रुपये के कर्ज से बचने के लिए किया गया था।
सुबह करीब सात बजे सज्जन सिंह और उनकी पत्नी कांता अपने खेत से लौट रहे थे। तभी जोगेंद्र, उसकी पत्नी सुशीला, सारंग और ओमप्रकाश सहित अन्य लोगों ने उन पर हमला कर दिया। जोगेंद्र और सारंग ने लाठी व मूसल से सज्जन सिंह पर वार किया। सुशीला ने पत्थर से सज्जन सिंह के सिर पर हमला किया, जिससे वह जमीन पर गिर गए। सज्जन सिंह को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें पहले रोहतक और फिर जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल, दिल्ली ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी चोटों को जानलेवा बताया था। कांता को भी हमले में चोटें आई थीं। पुलिस ने कांता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 120-बी (आपराधिक साजिश) जोड़ी गईं। पुलिस ने जोगेंद्र, सारंग, ओमप्रकाश और बाद में सुशीला को गिरफ्तार किया।
अदालत ने धारा 307/120-बी भारतीय दंड संहिता के तहत सभी दोषियों को दस साल का कठोर कारावास दिया। प्रत्येक पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना न भरने पर उन्हें छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 323/120-बी भारतीय दंड संहिता के तहत छह महीने का कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माना तय हुआ। धारा 341/120-बी भारतीय दंड संहिता के लिए एक महीने का साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माना लगाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और हिरासत अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
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दोषी सारंग (33), जोगेंद्र (55), ओमप्रकाश (80) और सुशीला (44) ने अदालत से नरमी बरतने का अनुरोध किया था। उन्होंने अपनी उम्र, परिवार पर निर्भरता और व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला दिया। अदालत ने इन दलीलों पर विचार किया, लेकिन न्याय के हित में कठोर सजा को आवश्यक बताया। न्यायालय ने समाज के हित को दोषी के व्यक्तिगत हित से ऊपर रखा। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समाज को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया।
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झज्जर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने जानलेवा हमला मामले में चार दोषियों को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी को 11,500 रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा। यह हमला 28 जून 2015 को दस लाख रुपये के कर्ज से बचने के लिए किया गया था।
सुबह करीब सात बजे सज्जन सिंह और उनकी पत्नी कांता अपने खेत से लौट रहे थे। तभी जोगेंद्र, उसकी पत्नी सुशीला, सारंग और ओमप्रकाश सहित अन्य लोगों ने उन पर हमला कर दिया। जोगेंद्र और सारंग ने लाठी व मूसल से सज्जन सिंह पर वार किया। सुशीला ने पत्थर से सज्जन सिंह के सिर पर हमला किया, जिससे वह जमीन पर गिर गए। सज्जन सिंह को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें पहले रोहतक और फिर जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल, दिल्ली ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी चोटों को जानलेवा बताया था। कांता को भी हमले में चोटें आई थीं। पुलिस ने कांता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 120-बी (आपराधिक साजिश) जोड़ी गईं। पुलिस ने जोगेंद्र, सारंग, ओमप्रकाश और बाद में सुशीला को गिरफ्तार किया।
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अदालत ने धारा 307/120-बी भारतीय दंड संहिता के तहत सभी दोषियों को दस साल का कठोर कारावास दिया। प्रत्येक पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना न भरने पर उन्हें छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 323/120-बी भारतीय दंड संहिता के तहत छह महीने का कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माना तय हुआ। धारा 341/120-बी भारतीय दंड संहिता के लिए एक महीने का साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माना लगाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और हिरासत अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
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दोषी सारंग (33), जोगेंद्र (55), ओमप्रकाश (80) और सुशीला (44) ने अदालत से नरमी बरतने का अनुरोध किया था। उन्होंने अपनी उम्र, परिवार पर निर्भरता और व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला दिया। अदालत ने इन दलीलों पर विचार किया, लेकिन न्याय के हित में कठोर सजा को आवश्यक बताया। न्यायालय ने समाज के हित को दोषी के व्यक्तिगत हित से ऊपर रखा। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समाज को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया।
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