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खतरे में नदियों का वजूद चौदह में से पांच सूखीं
Updated Sun, 29 May 2016 11:57 PM IST
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सिरसा नदी
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सोनभद्र की नदियों का वजूद खतरे में है। जिले में बहने वाली 14 में से पांच नदियां सूख गई हैं। यह नौबत अवैध खनन के चलते पैदा हुई है।.
खनन के लिए नदियों की धारा अवैध पुल बनाकर बाधित कर दी जाती है। इससे नदियां सिकुड़ रहीं और प्रदूषित हुई हैं। प्रशासन ने कई बार अवैध पुलों को तोड़वाया लेकिन कुछ ही दिनों बात नए पुल बना दिए जाते हैं। औद्योगिक कचरे से भी नदियों का जल दूषित हो रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पानी का गंभीर संकट जिले में हो सकता है।
जंगलों और पहाड़ों से घिरे सोनभद्र से छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार की सीमाएं सटी हैं। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से निकलने वाली तमान नदियां जिले से होकर गुजरती हैं। इनके जल को क्षेत्र में सिंचाई और पीने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। मगर इलाके की प्राकृतिक संपदा ही आफत का सबब बन गई है।
अंधाधुंध खनन के चलते नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। ज्यादातर नदियों में बालू और पत्थर का अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। सोन नदी में कई जगह अस्थायी पुल बनाकर नदियों की धारा रोक दी गई है और खनन हो रहा। इससे नदियां सिकुड़ती जा रही हैं। रेणु नदी में औद्योगिक कंपनियों का रासायनिक कचरा जा रहा। इससे नदी का पानी विषाक्त हो गया है। पानी में भारी मात्रा में फ्लोराइड और भारी धातुएं पाई जाती हैं। इससे गंभीर बीमारियां आसपास के गांवों के लोगों को हो रही हैं।
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जिले में सोन, कनहर, रेणु, विजुल, पांडू नदियां वजूद में हैं जबकि पांगन, मलिया, अजीर, लैरा, बेलन, लउवा, बकहर, कर्मनाशा और ठेमा नदियां सूख गई हैं। नदियों के सूखने से जिले में पानी का संकट गहरा गया है। हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पर्यावरणविदों का कहना है कि जब अभी से ही पानी का इतना संकट है तो आने वाले दिनों में इससे भी गंभीर स्थिति हो सकती है
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खनन के लिए नदियों की धारा अवैध पुल बनाकर बाधित कर दी जाती है। इससे नदियां सिकुड़ रहीं और प्रदूषित हुई हैं। प्रशासन ने कई बार अवैध पुलों को तोड़वाया लेकिन कुछ ही दिनों बात नए पुल बना दिए जाते हैं। औद्योगिक कचरे से भी नदियों का जल दूषित हो रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पानी का गंभीर संकट जिले में हो सकता है।
जंगलों और पहाड़ों से घिरे सोनभद्र से छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार की सीमाएं सटी हैं। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से निकलने वाली तमान नदियां जिले से होकर गुजरती हैं। इनके जल को क्षेत्र में सिंचाई और पीने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। मगर इलाके की प्राकृतिक संपदा ही आफत का सबब बन गई है।
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अंधाधुंध खनन के चलते नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। ज्यादातर नदियों में बालू और पत्थर का अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। सोन नदी में कई जगह अस्थायी पुल बनाकर नदियों की धारा रोक दी गई है और खनन हो रहा। इससे नदियां सिकुड़ती जा रही हैं। रेणु नदी में औद्योगिक कंपनियों का रासायनिक कचरा जा रहा। इससे नदी का पानी विषाक्त हो गया है। पानी में भारी मात्रा में फ्लोराइड और भारी धातुएं पाई जाती हैं। इससे गंभीर बीमारियां आसपास के गांवों के लोगों को हो रही हैं।
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जिले में सोन, कनहर, रेणु, विजुल, पांडू नदियां वजूद में हैं जबकि पांगन, मलिया, अजीर, लैरा, बेलन, लउवा, बकहर, कर्मनाशा और ठेमा नदियां सूख गई हैं। नदियों के सूखने से जिले में पानी का संकट गहरा गया है। हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पर्यावरणविदों का कहना है कि जब अभी से ही पानी का इतना संकट है तो आने वाले दिनों में इससे भी गंभीर स्थिति हो सकती है